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अमित शाह ने कहा हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध और ईसाई शरणार्थियों को जाने नहीं देंगे, घुसपैठियों को रहने नहीं देंगे

Last updated: October 1, 2019 7:01 pm
Surabhi Saloni
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3 Min Read
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कोलकाता: गृह मंत्री बनने के बाद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह मंगलवार को पहली बार पश्चिम बंगाल पहुंचे। उन्होंने कहा, ‘‘मैं आज हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध और ईसाई शरणार्थियों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि केंद्र आपको भारत छोड़ने के लिए मजबूर नहीं करेगा। अफवाहों पर ध्यान न दें। एनआरसी के पहले हम सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल लेकर आएंगे, जो यह सुनिश्चित करेगा कि इन लोगों को भारत की नागरिकता मिले।’’
उन्होंने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल और अनुच्छेद 370 में एक स्पेशल कनेक्शन है, क्योंकि यह इसी मिट्टी का बेटा है। श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने एक नारा दिया था, एक निशान, एक विधान और एक प्रधान।’’ इससे पहले शाह कोलकाता के नेताजी इंडोर स्टेडियम पहुंचे। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि तृणमूल ने जानबूझकर एनआरसी को लेकर राज्य में आतंक पैदा करने की कोशिश की है। शाह इस मुद्दे पर सभी आशंकाओं को दूर करेंगे।
इससे पहले राज्य में अपनी नागरिकता खोने के डर से 11 लोगों ने आत्महत्या कर ली थी। शहर और राज्य भर के सरकारी कार्यालयों में सैकड़ों लोगों को अपने जन्म प्रमाण पत्र और आवश्यक दस्तावेज लेने के लिए लाइन में लगे देखा जा रहा है।
‘ममता हमें शरणार्थी विरोधी पार्टी के रूप में पेश कर रही’
शाह ने कई बार कहा है कि देश भर में एनआरसी लागू की जाएगी। वहीं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इसका विरोध करती रही हैं। उन्होंने कहा था कि वह राज्य में एनआरसी कभी लागू नहीं होने देंगी। बंगाल के भाजपा नेता ने कहा कि तृणमूल पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठियों को बचाने के लिए एनआरसी का विरोध कर रही है, जो उनके वोट बैंक हैं। असम में एनआरसी की अंतिम सूची से कई हिंदुओं को हटा दिए जाने के बाद, यह हमें हिंदू विरोधी और शरणार्थी विरोधी पार्टी के रूप में पेश करने की कोशिश की जा रही है।
असम पहला राज्य जहां एनआरसी लागू
असम देश का पहला राज्य है जहां एनआरसी लागू की गई है। वहां 31 अगस्त को एनआरसी की लिस्ट जारी की गई थी, जिसमें 19 लाख से ज्यादा लोगों के नाम शामिल नहीं थे। इसमें 12 लाख हिंदू हैं। एनआरसी 1985 के असम समझौते के प्रावधानों में से एक है।

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