भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया को पति की दीर्घायु के लिए रखा जाने वाला हरितालिका तीज का व्रत दो सितम्बर यानी सोमवार को रखना शुभकारी होगा। तृतीया तिथि रविवार को दिन 11:21 बजे के बाद शुरू होगी। जो सोमवार सुबह 9:01 बजे तक रहेगी।
उदया तिथि के कारण सोमवार को तृतीया तिथि शास्त्रों के अनुसार मानी जाएगी। भगवान शिव और पार्वती का पूजन सुहागिन व कुंवारी कन्याएं शाम 7:54 बजे तक पूजाअर्चन करना होगा। क्योंकि शाम 7:56 बजे से भद्रा लग जाएगा। कुंवारी कन्याएं सुयोग्य वर के लिए व्रत रख सकेंगी।
आचार्य अवध नारायण द्विवेदी ‘घनश्याम’ ने बताया कि सोमवार शाम 7:55 बजे से भ्रदा लग जाएगी। इस कारण भद्रा के पूर्व ही पूजन-अर्चन करना मंगलकारी होगा। द्वितीया युक्त तृतीया इस ब्रत में नहीं ली जाती है। साथ ही निर्णय सिन्धु के अनुसार चतुर्थी सहित तृतीया में व्रत करना फलदायी होता है। इस व्रत में सौभाग्यवती स्त्रियां नए लाल वस्त्र पहनकर, मेंहदी लगाकर, सोलह श्रंगार करती हैं और शुभ मुहूर्त में भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करती हैं।

