मुंबई। आ. रविशेखरसूरीश्वरजी म. सा. की निश्रा में नेमानी वाड़ी, ठाकुरद्वार के प्रांगण में आज भगवान महावीर स्वामी का जन्म वांचन का अद्भुत कार्यक्रम हुआ।
सुबह 8.30 बजे आ. रविशेखरसूरीश्वरजी की निश्रा में भगवान महावीर जन्म वांचन का कार्यक्रम शुरू हुआ। सबसे पहले मंगलाचरण करके 14 सपनाजी की बोलियाँ शुरू की गई उनके बाद 8 अष्टमंगल की बोलियाँ ली गयी, हर सपनाजी और अष्टमंगल के 3 चढ़ावें की बोलियाँ बोली गयी, जिसमें सबसे पहले सपनाजी और अष्टमंगल झुलाते हुए उतारना, फूलों की माला पहनाना और माथे पर लेकर संघ को दर्शन करवाना और पधारना, इनके अलावा मंदिरजी की वार्षिक ध्वजा, संघ पर अमी-झरना (छांटना), प्रथम श्रीफल वधाने, कल्पवृक्ष, पारणाजी जी से लगते, आदि चढ़ावों की बोलियाँ बोली गयी।
सभी चढ़ावों के लाभार्थियों के परिवार के सदस्यों को गुरुदेव ने वासक्षेप से आशीर्वाद प्रदान किया और सबका कंकु से तिलक और मोतियों के हार से बहुमान किया गया। पर्वाधिराज महापर्व पर्युषण के पांचवे दिन ही भगवान महावीर स्वामी का जन्म वांचन होता हैं और उसका महत्व भी गुरुदेव ने अच्छे से समझाया ।
दोपहर ठीक 12.39 बजे गुरुदेव ने भगवान महावीर सव्वमी का जन्म वांचन शुरू किया जिसमें 24 तीर्थंकरों ने अपनी माता के गर्भ में कितना समय व्यतीत किया उसका विवरण बताते हुए अंत में भगवान महावीर स्वामी के जन्म समय का दृष्टांत बताया। कार्यक्रम में अट्ठाई और उसके ऊपर की सभी बड़ी तपस्या के सैकड़ों तपस्वियों के लिए बैठने की अलग से व्यवस्था की गई।
भगवान महावीर स्वामी का पारणा घर लेकर जाने के लाभार्थी श्रीमती छगनीबाई बख्तावरमलजी पामेचा (झालो की मदार) परिवार ने संघ को उनके घर पर पधारकर पारणाजी झुलाने की विनंती की और कार्यक्रम के पश्चात पारणाजी, 14 सपने, अष्टमंगल, और कल्पवृक्ष वाजते-गाज़ते अपने घर लेकर गए।
किशन सिंघवी और कुणाल शाह के अनुसार कार्यक्रम में ठाकुरद्वार संघ के पदाधिकारी और समर्पण ग्रुप के कार्यकर्ताओं के अलावा सैकड़ों तपस्वियों और श्रावक-श्राविकाओं की उपस्थिति रही।

पर्युषण महापर्वः ठाकुरद्वार में भगवान महावीर स्वामी का जन्म वांचन

