मुंबई। तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशम् अधिशाश्ता आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुश्रावक प्रवक्ता उपासक श्रीमान दिनेश जी कोठारी (दुबई) उपासक सहयोगी श्री जयंतीलाल जी बरलोटा (मुंबई) के मंगल उपस्थिति में मरुधर भवन अंधेरी मैं पर्युषण महापर्व का चौथा दिन वाणी संयम दिवस के रूप में हर्षोल्लास के साथ मनाया। प्रवक्ता उपासक दिनेश जी कोठारी ने कहा अनावश्यक नहीं बोलना ही वाणी का संयम है। जिसको हम मौन भी कहते हैं। मौन भीतर मे प्रवेश करने का प्रथम द्वार है। वाणी संयम का एक प्रकार है मौन। मौन ज्ञान को बढ़ाता है व विवाद को घटाता है। उपासक सहयोगी श्री जयंतीलाल जी बरलोटा (मुंबई) ने कहा व्यंग्यात्मक शब्दों का प्रयोग न करें। कम बोलें। धीरे बोलें। धीरे बोलने वाला वाणी के माधुर्य को बढ़ाता है,वाणी के असंयम से महाभारत हो जाता है। वाणी के संयम से घर परिवार स्वर्ग बन सकता है।लगभग 40 चंदनबाला तेला तप हुए, अनेक भाई बहनोंने तप के प्रत्याख्यान भी किये। यह जानकारी हमें तेयुप अध्यक्ष हेमंत लोढ़ा ने दी।

