ठाणे। साध्वी श्री आणिमाश्रीजी एवं साध्वी श्री मंगलप्रज्ञाजी के सानिध्य में तेरापंथ भवन के विशाल एवं रमणीय हॉल में पर्युषण महापर्व के नवाहिक कार्यक्रम का प्रारंभ उत्साह व उमंग के साथ विशाल जन-मेदिनी की उपस्थिति में हुआ।
साध्वी श्री आणिमाश्रीजी ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा मोहसक्ति के कीचड़ में फ़सी हुई यह आत्मा अनादिकाल से संसार मे भटक रही है। कभी-कभी ऐसे पल आते है, जब अंतःकरण की गहराई में जाकर इन बंधनो को काटने के लिए वह उद्यत हो जाती है, किंतु अचानक आसक्ति का छिलका उसके पांव तले आ जाता है और वह फिसलकर शिखर से पुनः नीचे आ गिरती है। आसक्त चेतना तभी अनासक्ति की ओर बह पाएगी, जब वह अन्तर्दृष्टि का जागरण कर ले। चेतना को अन्तर्मुखी बनाकर ही व्यक्ति लक्षित मंजिल को प्राप्त कर सकता है। पर्युषण महापर्व चेतना को अन्तर्मुखी बनाने का महापर्व है। पर्युषण महापर्व संयम की साधना , आराधना का महापर्व है। हम इन आठ दिनों में मन का संयम, इन्द्रिय संयम, वाणी संयम, खाद्य संयम की विशेष साधना कर जीवन को नई दिशा दे। मंगलकामना।
साध्वी श्री मंगलप्रज्ञाजी ने कहा जिस प्रकार वर्षा ऋतु में मयूर नृत्य कर आनंदित होता है, वैसे ही पर्युषण का यह समय भव्यप्राणि रूपों मयूरों के नृत्य करने का समय है। पर्युषण का समय आत्मा को कोहिनूर की तरह आबदार, चमकदार एवं वजनदार बनाने का समय है। अप्रमन्त्र योग में रहने का समय है।
साध्वी श्री कर्णिकाश्रीजी ने कहा आत्माराधन के इन महापर्व पर हम अपने प्रशस्त चिंतन, समता, मैत्री एवं करुणा के द्वारा मनुष्य जीवन को सार्थकता प्रदान करे एवं इस चद्दर की आत्मा को शतोगुणित करे।
साध्वी सुधाप्रभाजी ने खाद्य संयम पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा स्वास्थ्य का महामंत्र है – खाद्य संयम। स्वास्थ्य समस्त सुखों का पायदान है। हित-मीत व ऋतु भोजन व्यक्ति को स्वस्थ, प्रसन्न व तंदरुस्त रखता है।
साध्वी मैत्रीप्रभा ने मंच संचालन करते हुए कहा पर्युषण महापर्व जागरण का शंखनाद कर रहा है। आत्म उत्थान की दिशा में जागरण हो।
साध्वी स्मतव्यशाजी ने आगमवाणी का रसपान कराया।
कोपरी महिलामंडल ने सुमधुर मंगलसंगान किया। भिक्षु महाप्रज्ञ ट्रस्ट के सरंक्षक निर्मल श्रीश्रीमाल ने नए ट्रस्टियों की घोषणा करते हुए सबका स्वागत किया। सहमंत्री पवन ओस्तवाल ने सूचनाएं सम्प्रसारित की।
आत्मानंद प्राप्ति का अपूर्व समय है पर्युषण – साध्वी आणिमाश्रीजी

