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महाबलेश्वर सुकून के पल

Last updated: August 13, 2019 11:31 am
Surabhi Saloni
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6 Min Read
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पुणे और मुंबई वालों के लिए महाबलेश्वर वीकेेंड डेस्टिनेशन है। कुछ समय शोरगुल से हट कर प्रकृति के बीच बिताने का मन हो तो महाबलेश्वर देखने जाएं। घने जंगलों से घिरे इस पहाड़ी सौंदर्य को देखने दूर-दूर से लोग आते हैं। महाबलेश्वर को पहाड़ों की रानी कहा जाता है। ब्रिटिश शासनकाल में इसे सबसे खूबसूरत हिल स्टेशन का खिताब मिला है। हरी-भरी पहाडिय़ों को देखकर सैलानी मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। ठंडी हवाएं, उंची चोटियां महाबलेश्वर की विशेषता हैं। ब्रिटिश शासन के जमाने में महाबलेश्वर ग्रीष्मकालीन राजधानी होती थी। यह महाराष्ट्र का सबसे करीबी और लोकप्रिय हिल स्टेशन है।
खूबसूरत नजारे
पिछली गर्मियों में एकाएक महाबलेश्वर जाने का कार्यक्रम बन गया। हरे-भरे मोड़ों वाली घुमावदार सड़कों से जैसे-जैसे हम आगे बढ़ते हैं, मौसम में तब्दीली का अनुभव होने लगता है। गंतव्य के करीब पहुंचते-पहुंचते बादलों ने ऐलान कर दिया कि वो आज जी भर कर बरसेंगे। बारिश के नजारे देख कर मन उत्साहित होने लगा। कृष्णा नदी का उद्गम स्थल भी यही है। रिमझिम फुहारों के बीच प्रकृति के इस अप्रतिम सौंदर्य को निहारना अलग एहसास कराता है। पहाड़ों पर दूर-दूर तक फैली हरियाली और चारों तरफ घनघोर कोहरा, शांत वातावरण के बीच चिडिय़ों की मधुर आवाजें कानों में मिश्री घोल रही हैं तो वहीं सड़क किनारे ऊंचाई से गिरते झरने हमें अपनी तरफ खुद-ब-खुद आकर्षित कर लेते हैं।
पल-पल बदलता मौसम
जैसे-जैसे सफर आगे बढ़ रहा था, मौसम भी रंग बदल रहा था। हमने पुणे से एक कार हायर की थी। महाबलेश्वर से पहले पंचगनी पड़ता है, जो अपने शैक्षिक संस्थानों के लिए जाना जाता है। कई बॉलीवुड हस्तियों की स्कूलिंग यहां से हुई है। यहां से महाबलेश्वर केवल 20 किलोमीटर दूर है। पंचगनी की आबोहवा में हलकी ठंडक है, दिल्ली के प्रदूषण के बाद यहां की शुद्ध हवा जैसे फेफड़ों को ताजगी से भर देती है। जून महीने में भी यहां की धूप सुकून दे रही थी। पीछे हम दिल्ली की भीषण गर्मी छोड़ कर आए थे तो मौसम की यह तब्दीली कुछ परेशान भी करने लगी थी। बारिश का आलम यह कि कुछ देर होती-फिर रुक जाती, जरा सा आगे बढ़ते ही फिर बारिश घेर लेती। यहां घरों के बाहर दीवारों पर काई जमने की एक वजह शायद यही है। स्थानीय लोग बताते हैं कि यहां गर्मी में ही सबसे ज्यादा बारिश होती है।
घूमने वाली जगहें
हम दिल्ली की गर्मी के हिसाब से महाबलेश्वर पहुंचे थे और लग रहा था कि इतनी सर्दी तो वहां होती नहीं, लिहाजा नाममात्र के ही गर्म कपड़े साथ रखे थे। हमारे वहां पहुंचते-पहुंचते मौसम का मिजाज कुछ इस तरह बदला कि अच्छी खासी ठंड हो गई। बारिश थी कि थमने का नाम ही नहीं ले रही थी। खैर ऐसे ही मौसम में हम एलिफेंट हेड पॉइंट तक गए। यहां नैचरल रॉक से बना हाथी का सिर है। वहां से दूर-दूर तक सिर्फ पहाड़ और हरियाली दिखाई देती है, ऐसा वहां के लोगों ने बताया मगर हम जितनी देर वहां रुके, कोहरे ने समूची वादियों को इस कदर घेर रखा था कि कुछ साफ नजर ही नहीं आ रहा था। हवा ठंडी और बारिश भी लगातार…कभी तेज तो कभी धीमी। ऐसे मौसम में देर तक वहां रुकना मुनासिब नहीं था।
सावित्री प्वॉइंट
हमारे गाइड ने हमें सावित्री पॉइंट देखने की सलाह दी तो वहां भी गए। वहां से सावित्री नदी दिखाई देती है लेकिन यहां भी इतनी धुंध थी कि कुछ नहीं दिख रहा था। रिमझिम बरसात में बंदरों के झुंड जम कर मस्ती कर रहे थे, हालांकि वे किसी को तंग नहीं करते, हां खाने-पीने का सामान साथ लेकर चल रहे हों तो थोड़ा सावधान रहने की जरूरत होती है क्योंकि वे हाथ से सामान छीन लेते हैं। मौसम खराब होने लगा तो गाइड ने वापस लौटने को कहा। मन में मलाल था कि मुश्किल से मिली छुट्टियों में जी भर इस जगह को देख नहीं सके।
प्रतापगढ़ किला
इसके बाद हम पहुंचे प्रतापगढ़ का किला देखने, जो पहाड़ की चोटी पर बना है। इसे छत्रपति शिवाजी ने बनवाया था। यह महाराष्ट्र का सबसे बड़ा किला है, यहां शिवाजी और बीजापुर के सेनापति अफजल खान के बीच युद्ध हुआ था, जिसमें शिवाजी को विजय प्राप्त हुई थी और अफजल खान उनके हाथों मारा गया था।
शिव मंदिर
ओल्ड महाबलेश्वर में भगवान शिव का सबसे प्राचीन मंदिर है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह मंदिर पांच हजार वर्ष पुराना है, इसे 13वीं सदी में बनाया गया था। दीवार पर उस जमाने की शिल्पकारी देखते ही बनती है। इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां रुद्राक्ष के आकार का शिवलिंग है। महाबलेश्वर मंदिर के परिसर में श्री पंचगंगा मंदिर है। यहां पर पांच नदियों का उद्गम स्थल है- जैसे कृष्णा, कोयना, सावित्री, गायत्री, वेण्णा।
दक्षिण भारत की सबसे प्रसिद्ध नदी कृष्णा है। यहां गाय के मुख से जल निकल कर कुंड में गिरता है। ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर को पांडवों ने बनवाया था। कहा जाता है कि जो इस कुंड में स्नान करता है, समस्त दोषों और पापों से मुक्त हो जाता है।

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