उदयपुर। एकदिवसीय ज्ञानशाला प्रशिक्षक प्रशिक्षण शिविर मुनिश्री प्रसन्नकुमारजी, मुनिश्री धैर्यकुमारजी के सानिध्य में हुआ। विषय : “कैसे करें बच्चों में सम्यक ज्ञान एवं सम्यक दर्शन के संस्कारों का निर्माण” आयोजक:- श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा उदयपुर, संभागी क्षेत्र: उदयपुर, गोगुंदा, रावलिया कला थे। शिविर का शुभारंभ नमस्कार महामंत्रोच्चार से हुआ। मंगलाचरण प्रशिक्षिका बहिनो ने किया। स्वागत ज्ञानशाला परामर्शक श्रीमान फतेहलाल जी सा जैन द्वारा किया गया। सभा अध्यक्ष श्रीमान सूर्यप्रकाश मेहता ने कहा प्रशिक्षिकाओं मे युवती बहनों को जोड़ने पर जोर दिया ताकि बच्चों की साइकॉलोजी को अच्छी तरह समझा जा सके।
मुनिश्री प्रसन्नकुमार जी ने कहा कि प्रशिक्षिकाओं पर बच्चो के निर्माण का दायित्व है, उन्हें वात्सल्य और अनुशासन दोनों का ध्यान रखना होगा। मुनिश्री ने बताया कि ज्ञानशाला के लिए छ: बातें आवश्यक है 1. व्यवस्था पक्ष, 2. सुरक्षा पक्ष, 3. जीवन से प्रशिक्षण, 4. जीवन व्यवहार का प्रशिक्षण, 5. खान पान की शुद्धि, 6. प्रशिक्षिकाओं में सामंजस्य। मुनिश्री धैर्यकुमार जी ने ज्ञानशाला प्रशिक्षिकाओं से बच्चों को अधिक से अधिक साधु संत के सम्पर्क मे लाने को कहा जिससे उनमे धार्मिक भावना बढे और त्याग भावना आए। तत्पश्चात क्षेत्रिय संयोजिका श्रीमती सुनीता बेंगानी द्वारा सभी प्रशिक्षिकाओं का परिचय करवाया गया एवं ज्ञानशाला तथा प्रारूप के सभी नियमो की जानकारी दी गई।
सभा अध्यक्ष श्रीमान सूर्यप्रकाश मेहता द्वारा प्रशिक्षिकाओं की समस्याओं को सुनकर उन्हे हल किया गया। सविता बोहरा, प्रतिभा इन्टोदिया एवं संगीता चपलोत द्वारा आध्यात्मिक खेलों का आयोजन किया गया। भोजन व्यवस्था मे श्री विनोद मांडोत का सहयोग प्राप्त हुआ। इस शिविर में सहभागी प्रशिक्षिकाओं की संख्या:27 थी। शिविर का संचालन ज्ञानशाला सहसंयोजिका संगीता चपलोत द्वारा किया गया। सभी प्रशिक्षिकओं के प्रयासों ने शिविर को सफल बनाया। इस कार्यक्रम की जानकारी श्री रोहित चौधरी ने दी।

उदयपुर में एकदिवसीय ज्ञानशाला प्रशिक्षक प्रशिक्षण शिविर “कैसे करें बच्चों में सम्यक ज्ञान एवं सम्यक दर्शन के संस्कारों का निर्माण”

