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‘आबादी नियंत्रित नहीं हुई तो विकास का लाभ बेमानी हो जाएगा’ एजेंसी,नई दिल्ली

Last updated: June 25, 2019 8:13 am
Surabhi Saloni
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6 Min Read
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नई दिल्ली:राज्यसभा में सोमवार को कांग्रेस के डॉ टी सुब्बीरामी रेड्डी ने देश की बढ़ती आबादी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि अगर इस समस्या पर काबू नहीं पाया गया तो विकास का लाभ बेमानी हो जाएगा। शून्यकाल में रेड्डी ने बढ़ती आबादी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में चीन को पीछे छोड़ कर भारत, दुनिया में सर्वाधिक आबादी वाला देश बन जाएगा।

रेड्डी ने कहा कि अगर आबादी को नियंत्रित नहीं किया गया तो अर्थव्यवस्था, रोजगार और संसाधनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। बेरोजगारी, पर्यावरण असंतुलन और शहरों की ओर पलायन की समस्या बढ़ेगी। ऐसे में विकास का लाभ बेमानी हो जाएगा। उन्होंने मांग की कि परिवार नियोजन को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन योजनाएं लाई जानी चाहिए अन्यथा जनसंख्या पर अंकुश नहीं लगाया जा सकता।

सभापति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि ऐसे मुद्दों पर गहन विचार विमर्श की जरूरत है। विभिन्न दलों के सदस्यों ने इस मुद्दे से स्वयं को संबद्ध किया। शून्यकाल में ही माकपा सदस्य के के रागेश ने देश के छह हवाईअड्डों का निजीकरण किए जाने का मुद्दा उठाया और सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार किए जाने की मांग की।

उन्होंने कहा कि केरल स्थित तिरुवनंतपुरम हवाईअड्डा राज्य सरकार की जमीन पर बनाया गया है और घाटे में कतई नहीं चल रहा है। राज्य सरकार ने इस हवाईअड्डे की जिम्मेदारी स्वयं उठाने की पेशकश की है और इस बारे में केरल के मुख्यमंत्री ने हाल ही में नीति आयोग की बैठक के दौरान प्रधानमंत्री से बात भी की। इस बारे में एक प्रस्ताव भी केंद्र को भेजा गया लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने कहा कि पांच हवाई हड्डों को अदाणी समूह के सुपुर्द किए जाने का भी वह विरोध करते हैं।

रागेश ने कहा ”सरकार को देश के हवाईअड्डों का निजीकरण किए जाने के अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।” माकपा के ही केशव प्रसाद ने केरल में नए पेट्रोल खुदरा बिक्री केंद्र खोले जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि फिलहाल राज्य में ऐसे 1,700 से अधिक केंद्र हैं और ये केंद्र तय मानक से कम पेट्रोल बेच रहे हैं। ”इसलिए फिलहाल नए केंद्र खोले जाने की जरूरत नहीं है।

प्रसाद ने कहा कि सरकार को नए केंद्र खोलने से पहले बाजार का अध्ययन करना चाहिए। बीजद के प्रसन्न आचार्य ने बुनकरों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि हथकरघा क्षेत्र सर्वाधिक रोजगार सकता है। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि एक ओर तो बुनकरों के डिजाइन चुराए जा रहे हैं जो की जीआई नियम का उल्लंघन है। वहीं दूसरी ओर सरकार की ओर से हथकरघा उत्पादों को दी जाने वाली दस फीसदी की रियायत बंद कर दी गई है। उन्होंने सरकार से यह रियायत पुन: शुरू करने और बुनकरों के हितों की रक्षा करने की मांग की।

कांग्रेस के राजमणि पटेल ने कहा कि रीवा में अदालत भवन को दूसरी जगह स्थानांतरित किया गया है जबकि पुराने भवन के पास ही कलेक्ट्रेट होने की वजह से लोगों को सामाजिक न्याय के लिए अन्यत्र नहीं जाना पड़ता था। समीप ही सरकारी भूमि खाली पड़ी है जहां अदालत भवन बनाया जा सकता है।

इसी पार्टी के पी एल पुनिया ने प्राकृतिक पिपरमेंट बनाने के लिए उपयोगी मेन्था की फसल का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में मेन्था का 80 फीसदी उत्पादन भारत में होता है। उत्तर प्रदेश का बाराबंकी जिला इसमें अग्रणी है लेकिन मेन्था उत्पादक किसानों को उत्पाद कर एवं जीएसटी के रूप में दो दो बार कर का भुगतान करना पड़ता है। ऐसा नहीं होना चाहिए।

पुनिया ने कहा कि मेन्था के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य तय कर किसानों को इसकी लागत का डेढ गुना दाम दिया जाना चाहिए और उन्हें आधुनिक प्रोसेसिंग संयंत्र भी मुहैया कराया जाना चाहिए। कांग्रेस के मोतीलाल वोरा ने उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालयों और अधीनस्थ अदालतों में बड़ी संख्या में मुकदमे लंबित होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाई गई और अब उनकी सेवानिवृत्ति की आयु सीमा बढ़ाने की मांग की जा रही है।

वोरा ने कहा कि सरकार को इस ओर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। विभिन्न दलों के सदस्यों ने इस मुद्दे से स्वयं को संबद्ध किया। मनोनीत राकेश सिन्हा ने उत्तरी बिहार में स्वास्थ्य की देखभाल के लिए समुचित सुविधाओं के अभाव का मुद्दा उठाते हुए सरकार से मांग की कि बेगूसराय जिले में एक अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान की स्थापना की जानी चाहिए। उन्होंने कहा ”बेगूसराय जिला उत्तर बिहार के सभी जिलों से जुड़ा है। यहां एम्स की स्थापना होने से न केवल लोगों को सुविधा मिलेगी, बल्कि यहां अनुसंधान भी किया जा सकेगा।”

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