नई दिल्ली:ईवीएम की विश्वसनीयता को लेकर उठाए जा रहे सवाल चुनाव नतीजे आने के बाद पूरी तरह गलत साबित हुए। चुनाव आयोग के अनुसार, ईवीएम का वीवीपैट पर्ची से मिलान सौ फीसदी सही साबित हुआ है।
सभी राज्यों के मुख्य चुनाव अधिकारियों के मुताबिक, 20,625 वीवीपैट में से किसी भी मशीन के आंकड़े बदले हुए नहीं पाए गए। जितने वोट ईवीएम मशीन पर दिखे वीवीपैट में से भी उतनी ही पार्चियां बाहर आईं।
इस साल चुनाव में 90 करोड़ मतदाताओं को नई सरकार के लिए अपना मत देना था। इसके लिए आयोग ने कुल 22.3 लाख बैलेट यूनिट, 16.3 लाख कंट्रोल यूनिट और 17.3 लाख वीवीपैट इस्तेमाल की थी।
आयोग के अनुसार, इस बार 17.3 लाख वीवीपैट में से 20,625 वीवीपैट का ईवीएम से मिलान किया गया। वहीं पिछली बार महज 4125 वीवीपैट पर्चियों का ईवीएम से मिलान किया गया था।
आठअप्रैल को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद चुनाव आयोग ने कम से कम पांच पोलिंग बूथ पर ईवीएम और वीवीपैट के मिलान की व्यवस्था की थी। ईवीएम में पड़े वोटों की सही जानकारी और रिकॉर्ड के लिए वीवीपैट की व्यवस्था वर्ष2013-14 में शुरू की गई थी। ईवीएम से छेड़छाड़ की संभावना को देखते हुए चेन्नई के एक एनजीओ ने ईवीएम और वीवीपैट की पर्चियों के 100 प्रतिशत मिलान को लेकर याचिका दायर की थी। हालांकि कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया था।
लोकसभा चुनाव के नतीजे आने से पहले 22 विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग से मांग की थी कि ईवीएम और वीवीपैट पर्चियों का मिलान किया जाए। लेकिन आयोग ने इसे खारिज कर दिया। विपक्षी दलों की मांग थी कि यदि किसी भी मतदान केंद्र पर वीवीपैट पर्चियों का मिलान सही नहीं पाया गया तो संबंधित विधानसभा क्षेत्र में सभी पर्चियों की गिनती की जाए। सुप्रीम कोर्ट और आयोग ने यह मांग खारिज कर दी थी।
EVM अग्निपरीक्षा में पास, वीवीपैट से 100% मिलान सही

