नई दिल्ली:इजराय के स्पेसक्राफ्ट बेरेशीट सफलता पूर्वक चंद्रमा की कक्षा में पहुंच गया है। इजरायली यान ने यह उपलब्धि तकरीबन डेढ़ माह में हासिल की है। यह 11 अप्रैल को चंद्रमा के सतह पर उतरेगा। बेरेशीट को एलन मस्क की कंपनी स्पेस एक्स के फाल्कन 9 रॉकेट से 21 फरवरी को रवाना किया गया था। बेरेशीट को हिब्रू में या जेनेसिस कहा जाता है, जिसका अर्थ उत्पत्ति या प्रारंभ होता है।
बेरेशीट के क्रिएटर SpaceIL ने एक ट्वीट में बताया कि यान ने चंद्रमा की संवेदनशील कक्षा में सफलता पूर्वक प्रवेश कर लिया है। यान अब चंद्रमा की सतह पर उतरने से पहले उसकी अंडाकार कक्षा में चारों ओर चक्कर लगाएगा। SpaceIL के अध्यक्ष मॉरिस काह्न ने कहा कि यह ऐतिहासिक उपलब्धि है। इसके साथ इजरायल दुनिया के उन 7 देशों में शामिल हो गया है, जो चंद्रमा की कक्षा में दाखिल होने का कीर्तिमान रच चुके हैं। भारत भी इन देशों में शामिल है। चंद्रयान-1 12 नवंबर 2008 को चंद्रमा की कक्षा में दाखिल हुआ था।
चंद्रमा पर सफलतापूर्वक उतरने का है लक्ष्य : SpaceIL का अगला लक्ष्य बेरेशीट को चंद्रमा की सतह पर सफलतापूर्वक उतारने का है। अब तक रूस, अमेरिका और चीन के लैंडर सफलतापूर्वक चंद्रमा की सतह पर उतर चुके हैं। चीन के यान ने इस साल 2 जनवरी को युतु2 लैंडर चंद्रमा के अंधेरे हिस्से में सफलतापूर्वक उतारा है। यान ने चंद्राम के इस हिस्से पर कई सारे परीक्षण भी किए हैं। अगर इजरायल का बेरेशील 11 अप्रैल को सफल्तापूर्वक चंद्रमा की सतह पर उतर जाता है तो तकनीकी और वित्तीय तौर पर ऐसा करने वाला वह दुनिया का पहला प्राइवेट मिशन होगा।
इसरो का Chandrayan-2 इस माह लॉन्च होने की उम्मीद : इधर भारत का Chandrayan-2 मिशन को जनवरी में स्थगित कर दिया गया था। इसके इस माह प्रक्षेपित किए जाने की उम्मीद है। हालाकि इसकी कोई तारीख अब तक तय नहीं हुई है। कहा जा रहा है कि भारतीय अंतरिक्ष मिशन ISRO अपने 800 करोड़ रुपये के दूसरे lunar mission को लेकर कोई खतरा मोल नहीं लेना चाहता है। हाल ही में उसके लैंडर विक्रम के पैरों में लैंडिंग टेस्ट के दौरान फ्रैक्चर आ गया था। इसरो मिशन के लॉन्च से पहले इस खामी को दूर करने की कोशिशों में लगा हुआ है।
दो माह तक चंद्रमा की सतह पर रहेगा बेरेशीट लैंडर : इजरायल के साइंस एंड टेक्नोलॉजी मिनिस्ट्री के मुताबिक 11 अप्रैल को चंद्रमा की सतह पर उतरने के बाद बेरेशीट लैंडर तकरीबन 2 माह तक रहेगा। बेरेशीट चंद्रमा के चुंबकीय क्षेत्र को मापने और मैपिंग सहित सतह पर वैज्ञानिक प्रयोग करना शुरू कर देगा।
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