केरल: शनिवार को तीसरे दिन भी डोम्बिवली तेरापंथ युवक परिषद ने आचार्य श्री महाश्रमण जी के रास्ते की सेवा का लाभ लिया। इस रास्ते की सेवा में तेयुप अध्यक्ष ललित सिंघवी, मंत्री सुरेश बैद, कोषाध्यक्ष ललित परमार, सभा अध्यक्ष सुरेश सिंघवी, मंत्री कैलाश सियाल, महिला मंडल संयोजिका सरोज सिंघवी, सह संयोजिका पिंकी परमार, कन्या मंडल, किशोर मंडल आदि श्रावकों की सहभागिता रही।
आचार्य श्री महाश्रमण जी ने श्रावको का मार्गदर्शन करते हुए फ़रमाया की एक आदमी ज्ञानी है ज्ञानी आदमी के ज्ञान का सार क्या हैं ज्ञान का सार है आचार। आचार का एक सार है अहिंसा जहा अहिंसा है वहा सुख ही सुख होती है और दुखों की माँ हिंसा होती हैं। हिंसा से सिर्फ और सिर्फ दुख ही मिलता हैं। लोभ और गुस्से के कारण व्यक्ति हिंसा करता हैं। हिंसा नरक में ले जाने वाला तत्व बन जाता हैं।
मंच का संचालन करते हुए मुनि दिनेश कुमार ने कहा कि संकल्प, बल और बुद्धि का योग होता है तब सफलता किसी से दूर नही रह सकती हैं। उसमें भी जिसे विवेक सही विवेक की प्राप्ति होती है वो भव से तर जाता हैं। वही तेयुप डोम्बिवली की टीम ने सांध्यकालीन प्रवास में भी रास्ते की सेवा का लाभ लिया।
साथ ही शनिवार की सामायिक कार्यक्रम में सामूहिक तौर पर सहभागिता दर्ज करवाई। वही दिन में मुख्य मुनि श्री महावीर कुमार जी , मुनि श्री योगेश कुमार जी ए मुनि श्री सत्य कुमार जी एवं साध्वी वर्या के सानिध्य में कार्यशाला, सेवा, दर्शन का लाभ लिया। तेयुप डोम्बिवली टीम का हौसला बढ़ाने का काम अभातेयुप के राष्ट्रीय अध्यक्ष विमल कटारिया ने इस यात्रा में खुद शामिल हो कर किया।
गुरु शरणम यात्रा में आतिथ्य प्रायोजक के तौर पर श्रद्धा की प्रतिमुर्ति स्व.श्रीमती मोहनीदेवी भैरुलालजी परमार, श्रीमती रेखाजी जगदीशजी परमार एवं Water bottle प्रायोजक श्री विकासजी रतनलालजी कोठारी और
Pen pencil set प्रायोजक श्रीमती लताजी राजकुमारजी हिरावत परिवार का परिषड़ की ओर से मोमेंटो दे कर सम्मानित किया गया।
ज्ञान का सार है व्यक्ति का आचार – आचार्य श्री महाश्रमण जी

