तेरापंथ का कुम्भ है मार्यादा महोत्सव-मुनि जिनेशकुमारजी
दापोली-महाराष्ट्र। महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमण के सुशिय मुनि श्री जिनेशकुमारजी ठाणा-2 के सानिध्य में 155वा मर्यादा महोत्सव समारोह का आयोजन स्थानीय आराधना भवन में श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा द्वारा आयोजित किया गया।इस अवसर पर कार्यक्रम में मुख्य अतिथि दादा ईदाते (पूर्व अध्यक्ष विमुक्त जाती भटक्या जमती आयोग भारत सरकार)थे। सन्मानिय अतिथि श्री सम्पतजी देसरला(अध्यक्ष श्री जैन मदारिया साजनान कोंकण मंडल) श्री सुरेन्द्र कोठारी (अध्यक्ष श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा पुणे) श्री मनोज संकलेचा (प्रकाशन प्रभारी अ. भा. ते.यु. प) थे।
इस अवसर पर उपस्थित धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री ने कहा तेरापंथ एक प्राणवान धर्मसंघ है। इसकी प्राणशक्ति को पोषण देने वाला तत्व मर्यादा है। मर्यादा जीवन की आधारशिला है। मर्यादा शक्ति का स्त्रोत है। मर्यादा वह मशाल है जो जिंदगी को जगमगा देती है।मर्यादा वह पतवार है जो जिंदगी की नाव को पार पहोचाती है।मर्यादा वह उष्मा है को शीतकाल की ठंडी बयार को सहने की क्षमता देती है।मर्यादा सुरक्षा कवच है । मर्यादा एक शब्द में कहु तो जीवन का समग्र दर्शन है। मर्यादा के बिना मनुष्य का आचार भी उज्वल नही होता। मुनि श्री ने आगे कहा स्वतंत्रता जब स्वछन्द्रता में परिणत हो जाती है तब घर परिवार समाज की व्यवस्ता चरमरा जाती है।वर्तमान युग आधुनिक युग है। कोई भी व्यक्ति किसी के अनुसाशन में रहना पसंद नही करता। अनुशासन के बिना व्यक्ति सर्वतोमुखी विकास से वंचित रहता है।आचार्य भिक्षु ने न्याय,संविभाग,प्रेम -सौदह,व्यवस्था व समभाव की वृद्धि के लिए मर्यादाओं का निर्माण किया। तेरापंथ धर्मसंघ का महत्वपूर्ण पर्व मर्यादा महोत्सव है। मर्यादाओ का महोत्सव केवल तेरापंथ धर्मसंघ में ही मनाया जाता है। इस दिन आचार्य भिक्षु द्वारा निम्मित मर्यादाओं का वाचन किया जाता है।जयाचार्य ने मर्यादा महोत्सव का शुभारंभ किया।मुनि श्री ने कहा मार्यादा महोत्सव तेरापंथ धर्मसंघ का कुम्भ है,व्यक्ति का जीवन मार्यादित,संयमित,व्यवस्थित होना चाहिए,आडम्बर प्रदर्शन से बचना चाहिए,फ़िज़ूल खर्ची से बचना चाहिए,रहन- सहन,खान-पान में सवास्तता होनी चाहिए। कोंकण व दापोली अच्छा क्षेत्र है और यहा के श्रावक-श्राविकाऐ श्रद्धाशील है।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि दादा ईदाते ने विचार व्यक करते हुए कहा जैन तत्त्वज्ञान का स्थान विश्व मे सबसे बडा है।नैतिक जीवन का केंद्र है भगवान महावीर।जहा मर्यादा समाप्त होती है वह विनाश का प्रारंभ हो जाता है। इस अवसर पर सन्मानिय अतिथि सम्पतजी देसरला, सुरेन्द्रजी कोठारी,मनोजजी संकलेचा,उपासक चंद्रप्रकाशजी मेहता ने अपने महत्वपूर्ण विचार व्यक्त किए।मंगलाचरण व मर्यादा महोत्सव के गीत का संगान महिला मंडल ने किया।दापोली के युवकों ने सुरमधुर गीत का संगान किया। ज्ञानशाला के बच्चों ने सुंदर परिसंवाद प्रस्तुत किया।इस अवसर पर बालक अर्हम जैन,महाड़ से बाबूलाल गांधी,जैन मंदिर ट्रस्टी चेतन मेहता,दिनेश खिवेसरा(अध्यक्ष तेयुप पुणे)आदि ने अपने भाव व्यक्तत्व व गीत के माध्यम से किये।स्वागत भाषण तेरापंथी सभा दापोली के अध्यक्ष दिलीप जैन ने किया।आभार ज्ञापन मनोहर पितलिया ने किया।कार्यक्रम का सूत्र संचालन मुनि परमानंद व किशोर जैन ने किया।इस अवसर पर कार्यक्रम में पुणे,महाड़,मानगांव,खेड़,रत्नागिरी, दाभोल,वाकावली,उरण,चिपलूण, दासगांव आदि क्षेत्रों से अच्छी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति थी।कार्यक्रम सफल बनाने में सभी कार्यकर्ताओं का योगदान रहा।

