विकास धाकड़/मुंबई। युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी की विदुषी सुशिष्या साध्वी श्री राकेश कुमारी जी आदि ठाणा ४ के पावन सान्निध्य में विलेपार्ले गोयल भवन में 224वें चरमोत्सव के उपलक्ष्य में भावपूर्ण धम्म जागरण का आयोजन किया गया। भिक्षु स्वामी के प्रति श्रद्धा, समर्पण एवं भक्ति से ओतप्रोत इस आयोजन में विलेपार्ले, सांताक्रूज़, अंधेरी एवं बांद्रा से श्रावक-श्राविकाओं की अच्छी उपस्थिति रही। कार्यक्रम का शुभारंभ साध्वी श्री राकेश कुमारी जी के नवकार मंत्र उच्चारण से हुआ। सूरत से पधारीं दोनों बहनों ने पूनम जी बुरड़ एवं चांदनी जी जैन ने मंगलाचरण के पश्चात अपने स्वरचित भावपूर्ण गीतों से भक्ति का वातावरण निर्मित किया।
अंधेरी से पधारे संदीप जी जैन, जो बॉलीवुड प्लेबैक सिंगर भी रह चुके हैं तथा साध्वी श्री दीप यशा जी के संसार पक्षीय बड़े सुपुत्र हैं, ने अपनी भावभरी प्रस्तुतियों से सभी को भक्तिरस में सराबोर कर दिया। वहीं रेणुजी कोठारी, जो वर्ष 2018 में अमृतवाणी स्वर संगम की नेशनल लेवल विनर रह चुकी हैं, ने भी अपनी सुमधुर गीत प्रस्तुतियों से कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए। चारों गीतकार-गायकों की प्रस्तुतियों ने ऐसा भक्तिमय समां बाँधा कि उपस्थित श्रावक-श्राविकाएँ भक्ति गीतों के साथ गुनगुनाते और झूमते नजर आए। सीमा जी रोटांगण ने भी अपने भावों की सुंदर अभिव्यक्ति प्रस्तुत की। इस अवसर पर साध्वी श्री राकेश कुमारी जी ने कहा कि भिक्षु स्वामी के प्रति समर्पण और श्रद्धा के भावों से हुई यह भक्ति सभी को अपने साथ लीन कर देती है।
आज के जीवन में व्यक्ति अनेक प्रकार के तनाव और चिंताओं से घिरा रहता है, लेकिन जब ऐसी भक्ति में हम झूमते हैं तो मन को एक अलग ही ऊर्जा और शांति का अनुभव होता है। गायकों ने अपनी प्रस्तुतियों से पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया और सभी को भिक्षु स्वामी की भक्ति में लीन कर दिया। साध्वीश्री जी ने कहा कि भिक्षु स्वामी हमारे आराध्य हैं। उन्होंने कितने-कितने कष्टों सहन करके वीतराग पथ का मार्ग दिखाया शुद्ध साधन से शुद्ध साध्य की प्राप्ति का मार्ग दिखाया।
आज भिक्षु निर्वाण के इस पावन दिवस पर हम धम्म जागरण के माध्यम से भक्ति गीतों में झूम रहे हैं। “एक शाम भिक्षु के नाम” की यह भक्ति अपने भीतर शक्ति देने वाली, अनुरक्ति देने वाली है। ऐसे भक्ति गीतों के माध्यम से हमारे कर्मों की निर्जरा भी होती है। साध्वी श्री राकेश कुमारी जी ने सभी कलाकारों के प्रति मंगलकामना व्यक्त करते हुए कहा कि वे इसी प्रकार अपने भक्ति गीतों के माध्यम से जन-जन में भक्ति की भावना जागृत करते रहें तथा भिक्षु स्वामी एवं धर्मसंघ का गुणगान करते रहें। इस अवसर पर साध्वी श्री राकेश कुमारी जी ने अपने स्व-रचित गीतिका की अत्यंत भावपूर्ण प्रस्तुति भी दी, जिसने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक भावों से भर दिया। कार्यक्रम का कुशल संचालन रेखा कोठारी ने किया। तेरापंथ समाज विलेपार्ले की ओर से सभी कलाकारों का सम्मान किया गया। अंत में साध्वी श्री राकेश कुमारी जी के मंगलपाठ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
विलेपार्ले (मुंबई) गोयल भवन के प्रांगण में २२४ वें आचार्य श्री भिक्षु चरमोत्सव कार्यक्रम का सुंदर आयोजन

