कांदिवली। युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी की विदुषी शिष्या शासन श्री साध्वी श्री विद्यावतीजी ‘द्वितीय’ ठाणा 5 के सान्निध्य में पर्युषण के पांचवे दिन को व्रत चेतना दिवस के रूप में मनाया गया। साध्वी वृंद द्वारा नमस्कार महामंत्र का सर्वप्रथम उच्चारण किया गया। साध्वी श्री विद्यावतीजी ने प्रवचन में कहा – पर्युषण का हर दिन त्याग तप का संदेश लेकर उदित होता है। प्राचीन समय में श्रावक को श्रमणोपासक कहा जाता था। श्रमणोपासक वह होता है जो साधु संतों की उपासना करता है, कुछ त्याग करता है और व्रत धारण करता है। श्रावक पर्युषण में स्वयं के भीतर में जागृति पैदा करता है। स्वाध्याय, ध्यान, जप, सामायिक एवं मौन आदि की धर्माराधना कर ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है।
साध्वी श्री जी ने आगे कहा – भगवान महावीर के जीवन की अध्यात्म यात्रा भवि प्राणियों के जीवन को परिवर्तित करने वाली होती है। कर्मों के कारण कितनी कष्टप्रद यात्रा से भगवान महावीर गुजरे थे। साध्वी श्री जी ने आज भगवान महावीर के अठारहवें भव का प्रभावी विवेचन किया। साध्वी प्रियंवदाजी ने उद्बोधन में कहा – व्रत के द्वारा आत्मा निर्मल बनती है। व्यक्ति मानसिक पवित्रता की श्रेणी पर आरोहण करता है। व्रत से अपने भव सीमित हो जाते हैं। संकल्प शक्ति एवं आत्मविश्वास के द्वारा विकास की ऊंचाइयों का स्पर्श कर लेता है। अणुव्रत भी यही कहता है कि अपने आचरण को सुधारो। आचरण नहीं सुधारा तो विकास बंद हो जायेगा। कर्म बंधन को तोड़ने में स्वयं को ही मजबूत बनना पड़ेगा। कषाय को शांत करने की उमंग होनी चाहिए।
साध्वी मृदुयशाजी ने तीर्थ एवं तीर्थंकर पर प्रकाश डालते हुए कहा – प्रत्येक व्यक्ति तीर्थ एवं तीर्थंकर को विशेष रूप से समझने का प्रयास करें। साध्वी प्रेरणा श्री जी ने प्रारंभिक उपदेश में आगम का वाचन किया। साध्वी मृदुयशा जी ने श्रमणोपासक साधना शिविर में रत श्रावक श्राविकाओं को संयमित रहने की प्रेरणा दी। साध्वी प्रेरणा श्री जी ने रात्रिकालीन सत्र में तेरापंथ के कुछ विशिष्ट श्रावकों के जीवन पर प्रकाश डाला एवं प्रश्नोत्तर का क्रम भी चलाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ बोरीवली तेरापंथ महिला मंडल के मंगलाचरण से हुआ। कार्यक्रम का संचालन बोरीवली तेरापंथी सभा के अध्यक्ष मानव सिंघी ने किया एवं स्वागत वक्तव्य दिया।
फाउंडेशन के पूर्व अध्यक्ष के एल परमार, विनोद बोहरा, बाबूलाल राठौड़, रमेश सांखला, जवरीमल नौलखा, महेश मेहता, अनिल कोठारी कैलाश बेताला, अशोक बाबेल, मांगीलाल धिंग, ज्ञानचंद बाफना, भंवर लाल बापना, घासीलाल मेहता, भगवती लाल बापना, अशोक सिंघवी शांतिलाल मेहता, राजेंद्र मुथा, अजय डांगी, महावीर बापना, हेमत सिंघवी, सविता मेहता, प्रीत कोठारी, पिंकी मेहता, मंजू कोठारी, अनिल चौरडिया सुभाष बापना, अशोक हिरण, अर्जुन सिंघवी, तेजमल श्रीश्रीमाल, देवेंद्र कावड़िया, हिम्मत मुनोत, रेणु बाबेल, उल्लास बाई बापना, भेरूलाल चपलोत, अंजू चौरडिया, चंचल बोहरा, मंजू बाबेल, स्नेहा गोमती, निर्मल कच्छारा, स्नेहा मेहता, विनोद डागलिया, सुनील संचेती सुभाष दूगड़, रमेश मादरेचा सहित विभिन्न गणमानय महानुभाव उपस्थित रहे।
श्री तुलसी महाप्रज्ञ फाउंडेशन के अध्यक्ष मेघराज धाकड़ मंत्री जगदीश परमार के कुशल मार्गदर्शन में तेरा पंथ सभा कांदिवली के अध्यक्ष मीठालाल धाकड़ मलाड अध्यक्ष रतनलाल लोढ़ा कांदिवली अध्यक्ष आशीष श्रीश्रीमाल मलाड अध्यक्ष सुनील धिंग महिला मंडल अध्यक्ष निर्मला कोठारी उर्मिला भंडारी मंत्री रेखा धोखा रतन कोठारी तैयारी में लगे हुए हैं।
कांदिवलीः व्रत से आत्मविश्वास एवं करणीय अकरणीय का विवेक जागृत होता है

