विकास धाकड़/विलेपार्ले (मुंबई)। कार्यक्रम की शुरुआत साध्वी श्री जी के नवकार मंत्रोच्चार से हुई। विलेपार्ले से सिंगर रेणु जी कोठारी ने स्वर लहरियों के साथ मंगलाचरण प्रस्तुत कर उपस्थित जनसमुदाय को भाव-विभोर कर दिया। पर्युषण महापर्व के चौथे दिन वाणी संयम दिवस के अवसर पर अंधेरी स्थित सिम्फनी हॉल में विशाल जनमेदिनी को संबोधित करते हुए आचार्य श्री महाश्रमण जी की विदुषी शिष्या साध्वी श्री राकेश कुमारी जी ने अपने मंगल उद्बोधन में कहा “परस्पर संबंध एवं संपर्क सूत्र का एक शक्तिशाली माध्यम वाणी बनता है। मनुष्य सामाजिक प्राणी है, समाज में व्यवहार के धरातल पर जीता है। ऐसे में वाणी का प्रयोग अति आवश्यक है। परस्परता बनाए रखने के लिए मधुर एवं सत्य भाषा बोलना जरूरी है। सत्य भाषा में असीम शक्ति समाई हुई है। साध्वी श्री जी ने आगे कहा कि जैन आगम में चार प्रकार की भाषा का उल्लेख आता है-सत्य भाषा, असत्य भाषा, मिश्र भाषा एवं व्यवहार भाषा। चारों भाषाओं पर विस्तार से जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि अविचारित,अनावश्यक, अनर्थकारी एवं मर्मभेदी भाषा का प्रयोग नहीं करना चाहिए। वाणी का प्रयोग सोच-समझकर एवं संयमपूर्वक करना चाहिए। साध्वी श्री जी ने भगवान महावीर के तीसरे भव मरीचि पर प्रवचन देते हुए बताया कि अहंकार करके जीव कैसे कर्म बंधन कर लेता है। कुल का मद भी कर्म बंधन का हेतु बनता है।
प्रसंग के माध्यम से उन्होंने वाणी के साथ-साथ अहंकार एवं कुल के मद से बचने की प्रेरणा दी। इस अवसर पर साध्वी श्री विपुलयशा जी ने मौन दिवस को उजागर करते हुए कहा-कम से कम बोलो, पहले सोचो फिर बोलो, सत्य व मधुर बोलो। उन्होंने कहा कि विज्ञान ने कहा है कि जीभ पर लगी चोट जल्दी ठीक होती है, पर ज्ञानियों ने कहा है कि जीभ से लगी चोट जल्दी ठीक नहीं होती। अतः वाणी का संयम रखना जीवन में अत्यंत आवश्यक है। कार्यक्रम का कुशल संचालन साध्वी श्री मलय विभा जी ने किया। तुलसी महाप्रज्ञ फाउंडेशन के अध्यक्ष मेघराज जी धाकड़ ने भी अपने विचारों को व्यक्त किया।
पर्युषण महापर्व के इन आध्यात्मिक आयोजनों में विलेपारले तेयुप अध्यक्ष महेंद्र जी बडाला, दीपक जी डागलिया, विनोद जीकोठारी, राजू जी कोठारी, अनिल जी बाफना, अरविंद जी कोठारी, सुनील जी वडाला, मुकेश जी वडाला, महिला मंडल अध्यक्षा कुसुम जी कोठारी, मंत्री वनीता वडाला, बेबी कोठारी, भावना डागलिया एवं शिल्पा डागलिया सहित अनेक श्रावक-श्राविकाएं अपनी सहभागिता दे रहे हैं। पर्युषण के दौरान अखंड नमस्कार महामंत्र का जाप भी नियमित रूप से चल रहा है, जिसमें श्रद्धालु भावपूर्वक अपनी सहभागिता दे रहे हैं। कार्यक्रम की संपन्नता से पूर्व साध्वी श्री मलयविभा जी द्वारा प्रश्नों का सुंदर एवं रोचक सिलसिला भी चलाया जा रहा है। प्रश्नोत्तर के इस क्रम से सभी में विशेष रुचि बनी रहती है और श्रद्धालु ध्यानपूर्वक प्रवचन सुनते हुए विषय को और अधिक गहराई से समझने का प्रयास करते हैं।
विलेपार्ले (मुंबई) में वाणी संयम दिवस पर साध्वी श्री जी ने सत्य मधुर एवं विवेकपूर्ण वाणी का दिया पावन संदेश

