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Reading: चुनाव में वोट खरीदना लोकतंत्र का अपमान; मंत्री की स्वीकारोक्ति से ‘मत चोरी’ पर मुहर : हर्षवर्धन सपकाल
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Mumbai / Maharshtra

चुनाव में वोट खरीदना लोकतंत्र का अपमान; मंत्री की स्वीकारोक्ति से ‘मत चोरी’ पर मुहर : हर्षवर्धन सपकाल

Last updated: November 29, 2025 5:37 pm
Surabhi Saloni
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5 Min Read
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Highlights
  • स्थानीय इकाई चुनाव में महाविकास आघाड़ी में कोई नाराज़गी नहीं; सभी दलों का स्वबल का निर्णय; कार्यकर्ताओं की भावना का सम्मान किया गया।
  • नासिक में साधुओं के नाम पर पेड़ों की कटाई एक बहाना; ‘साधुग्राम’ के नाम पर भ्रष्टाचार का खेल

मुंबई/बुलढाणा। नगरपालिका चुनाव प्रचार में सत्ताधारी दल के मंत्री ही यह कहते हैं कि “किसी से भी पैसे ले लो, लेकिन वोट हमें ही दो,”-यह लोकतंत्र का मज़ाक उड़ाने वाली बात है। भाजपा-महा-युति का काम अब “पैसा फेंक तमाशा देख” पर उतर आया है। मंत्री स्वयं इसकी खुली स्वीकारोक्ति कर रहे हैं, इसका अर्थ यह है कि कांग्रेस और राहुल गांधी द्वारा उजागर की गई मत चोरी पर आज मुहर लग गई है, ऐसा कहना है महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल का।
बुलढाणा में मीडिया से बात करते हुए प्रदेशाध्यक्ष सपकाल ने कहा कि स्थानीय स्वशासन संस्थाओं के चुनाव वास्तव में कार्यकर्ताओं के चुनाव होते हैं। कार्यकर्ताओं ने ये चुनाव स्वबल पर लड़ने की मांग की थी, और उसी का सम्मान करते हुए कांग्रेस तथा महाविकास आघाड़ी के घटक दल चुनाव लड़ रहे हैं। कुछ जगह पर गठबंधन हुआ है, कुछ स्थानों पर मुकाबला स्वबल पर है। शरद पवार और उद्धव ठाकरे को इसकी पूरी जानकारी दी गई है, इसलिए आघाड़ी में नाराज़गी का कोई प्रश्न ही नहीं उठता। जिला परिषद और नगर निगम चुनाव का कार्यक्रम अभी घोषित नहीं हुआ है; उस पर निर्णय कार्यक्रम आने के बाद लिया जाएगा।
महा-युति सत्ता के लिए मजबूर
महा-युति के अंदरूनी विवादों पर बोलते हुए सपकाल ने कहा कि ‘ट्रिपल इंजन सरकार’ सत्ता के बिना रह ही नहीं सकती। भाजपा, शिंदे सेना और अजित पवार की एनसीपी-ये सभी सत्ता के लिए लालायित हैं। इसलिए महा-युति में कितनी भी खींचतान हो, सरकार में बने रहने के लिए ये लोग हर समझौता कर लेंगे। तपोवन में पेड़ों की कटाई-पैसे हड़पने का माध्यम कुंभ मेले के लिए नासिक के तपोवन क्षेत्र में 1800 पेड़ों की कटाई पर बोलते हुए सपकाल ने कहा कि साधु तो पहाड़ों, जंगलों, हिमालय और प्रकृति के बीच रहते आए हैं, यही भारत की अध्यात्म परंपरा है। नासिक में कुंभ मेला हो रहा है, लेकिन यदि पर्यावरण का संरक्षण नहीं होगा तो यह किसी के लिए भी ठीक नहीं। पेड़ों को न काटें तो पैसे कैसे हड़पे जाएंगे? बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई केवल एक बहाना है-असल मकसद ज़मीन खाली कर उससे माल कमाना है।
“फडणवीस मुझे पहचानें, यह कोई ज़िद नहीं”
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सपकाल ने कहा कि यदि वे कहते हैं कि वे मुझे नहीं पहचानते, तो मुझे कोई आपत्ति नहीं। हम दोनों विदर्भ के हैं, और वे मुख्यमंत्री थे तब मैंने विधानसभा में कई मुद्दे उठाए, जिसका जवाब उन्होंने ही दिया था। मुझे पहचानें यह मेरा आग्रह नहीं है; और पहचानने के लिए जिस तरह का ‘प्रोफाइल’ चाहिए-वह मेरे पास नहीं है: न मैंने भ्रष्टाचार किया, न पार्टी बदली, न ईडी के केस हैं और न संस्थान मेरे पास। मैं सामान्य परिवार से आता हूँ। फडणवीस की बुद्धिमत्ता पर मुझे भरोसा था, लेकिन उनके पहचानने के मापदंड क्या हैं, पता नहीं-हाँ, पर जनता से किए वादे वे न भूलें। महाराष्ट्र की दुर्दशा करने वाले गुंडों को तो वे पहचानें और सबक सिखाएँ।
“इसीलिए उन्हें ‘गजनी’ कहा…”
मुख्यमंत्री को ‘गजनी’ कहने के पीछे कारण बताते हुए सपकाल ने कहा कि उन्हें अपने ही बयानों की याद नहीं रहती। उन्होंने कहा था कि विदर्भ अलग राज्य बने बिना शादी नहीं करूँगा, लेकिन शादी कर ली। कहा था कि अजित पवार को ‘चक्की पीसने’ पर मजबूर कर देंगे; कहा था कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से कभी गठबंधन नहीं करेंगे—लेकिन आज उन्हीं के साथ कुर्सी साझा कर रहे हैं। सरकार बनते ही पहली फाइल धनगर आरक्षण पर साइन करेंगे, ऐसा कहा था। नांदेड में कहा था कि “2014 तक वहां कोई विकास ही नहीं हुआ”। उन्हें अपने ही बयान याद नहीं रहते—इसलिए मैंने उन्हें ‘गजनी’ कहा।

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