सूरत {गुजरात} विकास धाकड़/करुणा की बेमिशाल मूरत थे- आचार्य कालुगणी । सिटी लाईट तेरापंथ भवन सूरत में तेरापंथ के अस्टमाचार्य कालूगणी की स्वर्गारोहण दिवस पर प्रोफेसर डॉ साध्वीश्री मंगलप्रज्ञा जी के सान्निध्य में आयोजित हुआ। इस अवसर पर महामना कालगणिराज के जीवन-दर्शन का व्याख्यान करते हुए साध्वी श्री जी ने कहा-कालगणी तेरापंथ संघ के तेजस्वी,यशस्वी वर्चस्वी शक्तिशाली आचार्य थे। पुण्य पुरोधा के जन्म लेते ही भविष्य वाणी की गई यह संघ का आचार्य बनेगा। तेरापंथ संघ और विशेषतः साध्वी समाज की शिक्षा विकास में कालगणी की चिन्तन प्रणम्य है। उन्होंने अपने कर्तृत्व और नेतृत्व से संघ को ऊंचाइयां प्रदान की। साध्वी श्री जी द्वारा अनेक मार्मिक रोमांचकारी घटनाओं के विवेचन से परिषद को अभिभूत कर दिया। अनसुनी अनेक प्रसंगों का जिक्र किया तेरापंथ प्रबोध में गुरुदेव श्री तुलसी ने करुणा की इकलौती मूरत, कालू काया कल धोती कहकर उनके व्यक्तित्व को महिमा मंडित किया है।
वास्तव में कालुगणी की रसास्वादन, मुनि तुलसी, मुनि करुणा व्यापक वरुणा का तात्कालिक साधु साध्वियों ने खुद किया। उन्होंने जीवन भर संघ हित में अनेक कार्य किए गुरुदेव तुलसी आचार्य महाप्रज्ञ जैसे युगप्रधान आचार्य युग को मिले. यह कालगणी की दिव्य दृष्टि और पुण्य प्रताप का प्रतिफल है। कालगणी की पारखी नजर ने मात्र 22 वर्षी युवा संत तुलसी को संघ का दायित्व सौंपा यह उनके साहस का परिचायक है।
यह कहें तो कोई अतिशयोक्ति नहीं,यदि कालगणी नहीं होते तो तेरापंथ का ऐसा विराट रूप नहीं होता। उनका विश्वास नमन योग्यहे,अनुसरण-योग्य । सम्पूर्ण परिषद को प्रेरणा प्रदान करते हुए साध्वी श्री जी ने कहा- घर-परिवार के भावी पिढ़ी का हौसला बुलंद करने के खिए विकास करने के लिए साहस और विश्वास की जरूरत है,साध्वी सुदर्शन प्रभा साध्वी अतुलयशा, साध्वी, राजुल प्रभा, साध्वी चैतन्य प्रभा और साध्वी शोर्य प्रभा ने कालू त्रिस्या हैं भाग्य रुसवां गीत का सह संगान किया। संचालन साध्वी सुदर्शन प्रभा ने किया।
सूरत {गुजरात} आचार्य कालुगणी पुण्यतिथि मनाई- प्रोफेसर साध्वी मंगलप्रज्ञा

