मुंबई। आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या शासन श्री साध्वी श्री शिवमालाजी के सान्निध्य में कालबादेवी में दंपति शिविर का आयोजन किया गया जिसमें दंपति सहित 200 भाई बहनों ने भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुवात साध्वी श्री शिवमालाजी ने नमस्कार महामंत्र से की। दक्षिण मुंबई महिला मंडल ने दंपति पर सुमधुर गीतिका की प्रस्तुति से पूरी परिषद को भाव विभोर किया। फाउंडेशन के कार्याध्यक्ष गणपतलाल जी डागलिया ने सभी का स्वागत करते हुए इस कार्यक्रम की सराहना की।
साध्वी श्री अमित रेखा जी, अर्हम प्रभा जी ने दाम्पत्य जीवन कैसे सुखमय हो, कहानी के माध्यम से इसकी प्रेरणा दी। सभा अध्यक्ष सुरेश जी डागलिया ने भी पति पत्नी के छोटी छोटी बात से केसे उलझन को सुलझाने का प्रयास करे उसके बारे में जानकारी दी। दक्षिण मुंबई महिला मंडल ने सुंदर परिसंवाद रिल के माध्यम से प्रस्तुति की। परिषद ने ओम अर्हम की गूँज से सभी का हौसला बढ़ाया। कार्यक्रम की मुख्य वक्ता सी.ए.तरुणा जी बोहरा ने जीवन को कैसे सुखमय बनाए, किस तरह आज के परिवार में सामंजस्य रहे, एक दूसरे की भावना को समझे आदि टिप्स दिए। कार्यक्रम के बीच में आचार्य भिक्षु के जीवन संबंधित घटनाओं को चित्र के माध्यम से पहचान कर उसके संबंधित गीत को गाने जैसे रोचक ब्रेक ने सभी का उत्साह वर्धन किया। मनोरंजक गेम्स ने कार्यक्रम को और भी रोचक बना दिया।
लेखक व कवयित्री श्रीमती मंजू मंगल प्रभात जी लोढ़ा ने भी अपने विचार व्यक्त किए। शासन श्री साध्वी श्री शिवमाला जी ने परिवार में किस तरह शांति पूर्ण व्यवहार से एकता रह सके, आजकल परिवार बहुत टूटने लगे छोटी छोटी बातों से भी कड़वाहट की भावना एक दूसरे के प्रति रहती हे। आपसी सामंजस्य में भी कमी आ रही। सभी आजकल स्वतंत्र रहना चाहते है। आपने प्रेरक कविता, कहानी के माध्यम से दंपति को प्रेरणा दी। परिवार में किस तरह खुशहाली हो,एक दूसरे की भावना का आदर करे। कार्यक्रम में फाउंडेशन, सभा, युवक परिषद ,महिला मंडल ,अणुव्रत समिति के पदाधिकारीगण की सराहनीय उपस्थिति रही । किशोर मंडल कन्या मंडल का सहयोग रहा। आभार प्रकट महिला मंडल अध्यक्षा लतिका डागलिया ने किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन सभा के मंत्री दिनेश धाकड़ और शर्मिला धाकड़ सह जोड़े से पैरोडी के माध्यम से अपने लाजवाब अंदाज में बड़ी ही कुशलता से किया। यह जानकारी तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष गिरीश सिसोदिया ने दी।
कालबादेवी में हुआ सहजीवन सुमंगल कार्यशाला का आयोजन

