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“सुपरबॉयज़ ऑफ मालेगांव” अब प्राइम वीडियो पर

Last updated: April 25, 2025 3:19 pm
Surabhi Saloni
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4 Min Read
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एक्सल एंटरटेनमेंट और टाइगर बेबी प्रोडक्शन की यह फिल्म, रितेश सिधवानी, फरहान अख्तर, जोया अख्तर और रीमा कागती द्वारा प्रोड्यूस और रीमा कागती द्वारा डायरेक्टेड, “सुपरबॉयज़ ऑफ मालेगांव” अब आज से प्राइम वीडियो पर 240 देशों और क्षेत्रों में स्ट्रीमिंग हो रही है। यह फिल्म वरुण ग्रोवर द्वारा लिखी गई है और अमेजन MGM स्टूडियोज’ की ओरिजिनल फिल्म है। इसमें अदर्श गौरव, विनीत कुमार सिंह, और शशांक अरोड़ा जैसे टैलेंटेड और वर्सेटाइल एक्टर लीड रोल्स में हैं।
भारत के सबसे पसंदीदा एंटरटेनमेंट डेस्टिनेशन प्राइम वीडियो ने आज बहुप्रशंसित फिल्म ‘सुपरबॉयज़ ऑफ मालेगांव’ के एक्सक्लूसिव ग्लोबल स्ट्रीमिंग प्रीमियर का ऐलान किया है। यह अमेज़न एमजीएम स्टूडियोज़ की ओरिजिनल फिल्म है, जिसे एक्सेल एंटरटेनमेंट और टाइगर बेबी ने मिलकर प्रोड्यूस किया है। फिल्म के निर्माता हैं रितेश सिधवानी, फरहान अख्तर, जोया अख्तर और रीमा कागती, और इसे रीमा कागती ने ही डायरेक्ट किया है। फिल्म की कहानी को वरुण ग्रोवर ने लिखा है।

https://www.instagram.com/reel/DI1s_D3MEnF/?igsh=Z3ZnMmkwem8zNDg5

इस फिल्म में आदर्श गौरव, विनीत कुमार सिंह और शशांक अरोड़ा जैसे बेहतरीन कलाकार लीड रोल में नजर आ रहे हैं। यह फिल्म अब प्राइम वीडियो पर दुनिया भर के 240 देशों और क्षेत्रों में एक्सक्लूसिवली स्ट्रीम हो रही है।
‘सुपरबॉयज़ ऑफ मालेगांव’ फिल्म मालेगांव के एक शौकिया फिल्ममेकर नासिर शेख की जिंदगी पर आधारित है। मालेगांव के लोग अपनी रोजमर्रा की मुश्किलों से राहत पाने के लिए बॉलीवुड सिनेमा का सहारा लेते हैं। ऐसे में नासिर तय करता है कि वो मालेगांव के लोगों के लिए, मालेगांव के लोगों के साथ मिलकर एक फिल्म बनाएगा। वो अपने दोस्तों के एक अनोखे और जुगाड़ू ग्रुप को साथ लेकर अपने सपने को सच करने निकल पड़ता है, और इसी के साथ मालेगांव जैसे छोटे शहर में भी एक नई जान आ जाती है। ये फिल्म न सिर्फ फिल्म बनाने की जद्दोजहद को दिखाती है, बल्कि दोस्ती की खूबसूरती को भी बखूबी बयां करती है। जब ये दोनों दुनिया एक-दूसरे से टकराती हैं, तो एक बेहद दिल छू लेने वाली और प्रेरणादायक कहानी सामने आती है।
इस फिल्म को 49वें टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में वर्ल्ड प्रीमियर के दौरान स्टैंडिंग ओवेशन मिला था। साथ ही, 36वें पाम स्प्रिंग्स इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में यंग सिनेस्ट्स अवॉर्ड कैटेगरी में स्पेशल मेंशन से नवाजा गया। इसके अलावा, फिल्म को ऑस्ट्रेलिया में आयोजित पहले नेशनल इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ ऑस्ट्रेलिया में बेस्ट फिल्म का सम्मान भी मिला।
समीक्षकों ने इसे “सपने देखने वालों की शानदार श्रद्धांजलि” कहा है, और इसकी कहानी और जड़ों से जुड़े फिल्म बनाने के तरीके की असलियत की तारीफ की है। इसे “मानव भावना का जश्न और कहानी कहने की कला के लिए एक लव लेटर” के रूप में भी देखा गया है। फिल्म ने दर्शकों के दिलों में गहरी जगह बनाई है, और इसे इसके प्रेरणादायक संदेश और मजबूत किरदारों के लिए खूब सराहा गया है। यह फिल्म दुनियाभर के फिल्म लवर्स के लिए मस्ट वॉच बन गई है।

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कलात्मक अभिव्यक्ति के बहुरंगी महोत्सव के रूप में सम्पन्न हुआ एलडब्ल्यूजी लिटफेस्ट 4.0 मुंबई। साहित्य, कविता, संगीत, नृत्य और कलात्मक अभिव्यक्ति के विविध रंगों से सजा लिटरेरी वॉरियर्स ग्रुप (एलडब्ल्यूजी) लिटफेस्ट 4.0 लखनऊ मेट्रो क्लब के सभागार में दो दिवसीय आयोजन के साथ सम्पन्न हुआ। इस साहित्यिक महोत्सव में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आये लेखकों, कवियों, पाठकों, कलाकारों और साहित्य प्रेमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। महोत्सव का उद्घाटन उत्तर प्रदेश मेट्रो कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक सुशील कुमार ने किया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश मेट्रो के निदेशक (परिचालन) प्रशांत मिश्रा और निदेशक (सिस्टम एवं रोलिंग स्टॉक) नवीन कुमार उपस्थित थे। एलडब्ल्यूजी संस्था की सह-संस्थापक रेणु मिश्रा ने उद्घाटन समारोह का संचालन किया। संस्था की संस्थापक नीलम सक्सेना चंद्रा भी इस अवसर पर मौजूद रहीं। अपने सम्बोधन में सुशील कुमार ने समाज को सही दिशा दिखाने में साहित्य की महत्त्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने लखनऊ मेट्रो में कला और साहित्य को प्रोत्साहित करने के लिए किये जा रहे प्रयासों की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मेट्रो परिसर में रचनात्मक गतिविधियों के लिए विशेष स्थान उपलब्ध कराने और कला एवं साहित्य से जुड़ी नियमित प्रदर्शनियों के माध्यम से सांस्कृतिक अभिव्यक्ति को बढ़ावा देने की पहल की जा रही है। इस दो दिवसीय महोत्सव का आयोजन ‘अभिव्यक्ति’ और ‘कला-कुटीर’ नामक दो सभागारों में किया गया। यहाॅं साहित्यिक विमर्श, पुस्तक लोकार्पण, काव्यपाठ, कार्यशालाओं, प्रतियोगिताओं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की विविध श्रृंखलाओं ने आयोजन को बहुआयामी स्वरूप प्रदान किया। महोत्सव के दौरान कई पुस्तकों और काव्य-संकलनों का लोकार्पण किया गया। इनमें एलडब्ल्यूजी के संकलन ‘रीवाइंड–यादें अनप्लग्ड’ और ‘अनफॉरगेटेबल स्ट्रेंजर’ के साथ नीलम सक्सेना चंद्रा, संतोष बकाया, सुरेखा साहू, संगीता गर्ग, सोमदत्ता मित्रा, जवाहर लाल, अपर्णा प्रधान, रेणु मिश्रा, मधुमिता भट्टाचार्य नैयर, प्रीति पांडेय, हरप्रीत कौर ‘प्रीत’ और आशु मंदीप रात्रा की पुस्तकें शामिल रहीं। सुप्रसिद्ध गायिका संजीवनी भेलांडे की पुस्तक ‘मीरा एंड मी’ का लोकार्पण प्रमुख आकर्षण का केंद्र रहा। इसके बाद नीलम सक्सेना चंद्रा के साथ उनकी एक रोचक संवाद-परिचर्चा हुई, जिसमें मीरा, लेखन, प्रसिद्धि और प्रेम जैसे विषयों पर विचार साझा किये गये। ‘पोएटिक लाइसेंस’, ‘काव्य मंच’, बहुभाषी कविता-पाठ, मुशायरा और ‘दास्तान- ए-सुखन’ जैसे कार्यक्रमों में विभिन्न भाषाओं की काव्यात्मक अभिव्यक्तियों ने श्रोताओं को भावविभोर किया। अंग्रेज़ी, हिंदी और उर्दू में कविता-पाठ प्रतियोगिताऍं भी आयोजित की गईं। अंग्रेज़ी प्रतियोगिता का संचालन डॉ. मैत्रेयी जोशी, हिंदी प्रतियोगिता का आशु रात्रा और उर्दू प्रतियोगिता का संचालन अजय वर्मा ने किया। साहित्य और समाज के बदलते सम्बंधों पर केंद्रित परिचर्चाओं ने भी महोत्सव को वैचारिक गहराई प्रदान की। कर्नल सलिल जैन के संचालन में ‘सोशल मीडिया–हिंदी साहित्य का नया मंच या नई चुनौती’ विषय पर सार्थक चर्चा हुई। वहीं सोमदत्ता मित्रा के संचालन में ‘मेटामॉर्फोसिस– समकालीन समय में साहित्य का विकास’ विषयक परिचर्चा आयोजित की गई। इन सत्रों में साहित्य की बदलती प्रवृत्तियों, डिजिटल माध्यमों की भूमिका और समकालीन रचनात्मकता पर विचार-विमर्श हुआ। रचनात्मक लेखन को प्रोत्साहित करने के लिए कई कार्यशालाऍं भी आयोजित की गईं। आशा सिंह गौर ने ‘दिल की दास्तां’ कार्यशाला का संचालन किया, जबकि वहीदा हुसैन ने ‘द आर्किटेक्चर ऑफ पोएट्री’ के माध्यम से कविता की संरचना और शिल्प पर चर्चा की। शायर अंबर खरबंदा की कार्यशाला भी प्रतिभागियों के लिए आकर्षण का विशेष केंद्र रही। नये और उभरते रचनाकारों को मंच देने के उद्देश्य से ‘बोले कलम’ और ‘एक्सप्रेसो- माइक’ जैसे ओपन माइक कार्यक्रम आयोजित किये गये। इनके अतिरिक्त ‘शब्दाक्षरी’, ‘यंग इंक’, ‘इम्पल्सिव वर्ड्स’, ‘द फ्लैश पेन’, ‘किस्से कहानी’ तथा ‘रीड, लिसन एंड रिफ्लेक्ट’ जैसे अनूठे आयोजन भी महोत्सव का हिस्सा रहे। इन कार्यक्रमों ने प्रतिभागियों को अपनी रचनात्मक प्रतिभा प्रदर्शित करने और साहित्य के विविध रूपों से जुड़ने का अवसर दिया। महोत्सव की शामें संगीत, नृत्य और रंगमंच की प्रस्तुतियों से जीवंत हो उठीं। हास्य नाटिका ‘बंटा की शादी’ ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। रियान बागची और आशा सिंह गौर ने गीत प्रस्तुत किये, जबकि डॉ. रेणु शर्मा और डॉ. अपर्णा प्रधान की नृत्य प्रस्तुतियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों में विविध रंग भरे। महोत्सव का समापन भव्य समारोह के साथ हुआ। इसमें भारतीय रेल के अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) के महानिदेशक प्रभास दंसाना, आरईसी लिमिटेड के महाप्रबंधक मोहम्मद फारुक कुरैशी तथा एमएमटीसी के मुख्य सतर्कता अधिकारी जवाहर लाल प्रमुख अतिथियों के रूप में उपस्थित रहे। समारोह में पद्मजा अयंगर ‘पैडी’ को साहित्य और कला के क्षेत्र में उनके दीर्घकालीन योगदान के लिए ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया। डॉ. अपर्णा प्रधान को साहित्य और कला में उनके असाधारण योगदान के लिए विशेष पुरस्कार प्रदान किया गया, जबकि सुरेखा साहू को ‘अनसंग हीरो अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त ऑनलाइन और ऑफलाइन आयोजित विभिन्न कविता, कहानी तथा पुस्तक प्रतियोगिताओं के विजेताओं को भी पुरस्कृत किया गया। एल डब्ल्यू जी लिटफेस्ट 4.0 ने साहित्य, कला और रचनात्मकता के विविध रूपों को एक साझा मंच पर लाकर विचारों के आदान-प्रदान और बहुभाषिक साहित्यिक संवाद की सम्भावनाओं को उल्लेखनीय विस्तार दिया। यह महोत्सव इस विश्वास को पुनः स्थापित करने में सफल रहा कि साहित्य केवल शब्दों की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि लोगों को जोड़ने, संवेदनशीलता जगाने और जीवन को समृद्ध बनाने का सशक्त माध्यम भी है।
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