दांतों की सेहत बिगड़ने पर डेंटिस्ट के यहां जाने से अक्सर लोग कतराते हैं। उसके अजीबो-गरीब औजार देखकर मन कांप जाता है। तो क्यों न कुछ घरेलू नुस्खे अपनाए जाएं। दांतों की सही से देखभाल न करने से इसके इनेमल खोखले होने लगते हैं। यही कैविटी का कारण बनते हैं। आइए जानते हैं दांतों की कैविटी दूर करने के कुछ घरेलू नुस्खे
आयुर्वेद में, हल्दी को कैविटी दर्द से राहत प्रदान करने के लिए प्रयोग किया जाता है। इसमें मौजूद एंटी-बैक्टीरियल गुणों के साथ एंटी-इंफ्लेमेंटरी गुण मसूढ़ों को स्वस्थ रखने के साथ बैक्टीरियल संक्रमण के कारण दांतों के गिरने की समस्या को भी रोकता है। प्रभावित दांत पर थोड़ी सा हल्दी पाउडर लगाकर इसे कुछ मिनटों के लिए छोड़ दें। फिर गुनगुने पानी से अच्छे से कुल्ला कर लें।
लहसुन दांतों के टूटने और कैविटी की समस्या को दूर करने में मदद करता है। यह एंटी बैक्टीरियल और एंटीबायोटिक गुणों से लैस होता है। 3 से 4 लहसुन की कली को कुचलकर और 1/4 चम्मच सेंधा नमक मिलाकर पेस्ट बना लें। इसे संक्रमित दांत पर लगाकर 10 मिनट के लिए छोड़ दें। कैविटी को कम करने के लिए इस उपाय को कुछ दिनों के लिए दिन में दो बार करें।
नमक में एंटीसेप्टिक और एंटीबायोटिक गुण होते हैं। इसके कारण यह कैविटी के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह दर्द और सूजन को कम करने, किसी भी प्रकार के संक्रमण और मुंह में बैक्टीरिया की वृद्धि को रोकने में मदद करता है। एक गिलास गर्म पानी में एक चम्मच नमक मिलाकर उससे दिन में कई बार कुल्ला करने से दांत दर्द में राहत मिलती है। इसी तरह नमक, सरसों का तेल और नींबू का रस मिलाकर मसूढ़ों की मसाज करने से भी आराम मिलता है। बैक्टीरिया को मारने के लिए इस उपाय को कुछ दिन तक दिन में दो बार करें।
ऑयल पुलिंग बहुत ही पुराना नुस्खा है जो कैविटी को कम करने के साथ-साथ मसूढ़ों से खून बहना और सांस की बदबू को भी दूर करता है। इसके लिए एक चम्मच तिल का तेल 20 मिनट तक मुंह में रखकर इसे थूक दें। लेकिन इसे निगलने से बचें। फिर गुनगुने पानी से मुंह धो लें। रोगाणुरोधी लाभ पाने के लिए नमक के पानी का प्रयोग करें। फिर हमेशा की तरह अपने दांतों को ब्रश करें। इस उपाय को रोजाना सुबह खाली पेट करें। यह उपाय सूरजमुखी या नारियल के तेल के साथ भी किया जा सकता है।
लौंग में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी, एनाल्जेसिक और एंटी-बैक्टीरियल तत्व दर्द को कम करने और कैविटी को फैलने से रोकता है। समस्या होने पर 1/4 चम्मच तिल के तेल में 2 से 3 बूंदें लौंग के तेल की मिलाकर लें। इस मिश्रण को रात को सोने से पहले कॉटन बॉल में लेकर प्रभावित दांत में लगाएं।
मुलेठी में मौजूद एंटी-बैक्टीरियल गुण बैक्टीरिया के कारण होने वाली कैविटी को बढ़ने से रोकने में मदद करता है। इसके अलावा यह जड़ी-बूटी प्लाक को कम करने में भी मदद करती है। नियमित रूप से दांतों में ब्रश करने के लिए मुलेठी के पाउडर का प्रयोग करें। इसके अलावा आप टूशब्रश करने के लिए मुलेठी की स्टीक का इस्तेमाल कर सकते हैं।
नीम का एंटी-बैक्टीरियल गुण बैक्टीरिया के कारण होने वाली कैविटी को दूर करने में मदद करता है। दांतों और मसूड़ों पर नीम के पत्तों का रस रगड़ें, कुछ मिनट के लिए छोड़ दें और फिर गुनगुने पानी से कुल्ला कर लें। इस उपाय को दिन में एक या दो बार करें। नीम की दातून भी दांतों की सेहत के लिए अच्छी होती है।
आंवला सिर्फ एक फल ही नहीं है, यह एक जड़ी-बूटी है जो कैविटी के इलाज में मददगार है। इसमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन सी होता है जो बैक्टीरिया और संक्रमण से लड़ने में मदद करता है। यह संयोजी ऊतक के विकास को बढ़ावा देकर मसूड़ों के लिए बहुत लाभकारी होता है। इसके अलावा, यह मुंह को साफ करने और बदबूदार सांस से छुटकारा पाने में आपकी मदद करता है। नियमित रूप से आधा गिलास पानी के साथ आधा चम्मच आंवला पाउडर नियमित रूप से लेना फायदेमंद होगा।
(यहां दी गई जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित क्ष्ोत्र के पेशेवर चिकित्सक से सलाह जरूर लें।)

