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25 वर्ष की उम्र में परिवार छोड़कर स्वामी विवेकानंद बने विश्व प्रसिद्ध् आध्यात्मिक गुरु

Last updated: January 11, 2020 8:55 am
Surabhi Saloni
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3 Min Read
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रविवार, 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद जयंती है। 1863 में इसी तारीख को कोलकाता में एक कायस्थ परिवार में स्वामी विवेकानंद का जन्म हुआ था। उनके बचपन का नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था। उनके पिता विश्वनाथ दत्त उस समय कलकत्ता हाईकोर्ट के एक वकील थे। उनकी माता भुवनेश्वरी देवी धार्मिक विचारों की महिला थीं।

  • स्वामी विवेकानंद ने परिवार को 25 की उम्र में छोड़ दिया था, संन्यास धारण कर लिया था। वे विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु थे। उनके कुछ ऐसे विचार भी हैं जिनको अपनाकर कोई अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। 1893 में अमेरिका के शिकागो में विश्व धर्म महासभा हुई थी, जिसमें विवेकानंदजी ने भाषण दिया। इस भाषण के बाद उन्हें काफी ख्याति मिली थी। उनके इस भाषण के प्रभाव से ही कई अंग्रेजी लोग भारत की संस्कृति से प्रभावित हुए और आध्यात्मिक सुख के लिए भारत भी आए। स्वामी विवेकानंद के कुछ ऐसे विचार, जिनका ध्यान रखने पर आप सफलता हासिल कर सकते हैं।

स्वामी विवेकानंद के विचार

  1. जिस समय जिस काम के लिए प्रतिज्ञा करो, ठीक उसी समय पर उसे करना ही चाहिए, नहीं तो लोगों का आप पर से विश्वास उठ जाता है।
  2. हम वो हैं, जो हमें हमारी सोच ने बनाया है। इसलिए इस बात का धयान रखें कि आप क्या सोचते हैं। जैसा आप सोचते हैं वैसे बन जाते हैं।
  3. जब तक आप खुद पर विश्वास नहीं करते, तब तक आप भगवान पर विश्वास नहीं कर सकते।
  4. सत्य को हजार तरीकों से बताया जा सकता है, फिर भी हर एक सत्य ही होगा।
  5. जिस दिन आपके सामने कोई समस्या न आए, आप यकीन कर सकते हैं कि आप गलत रास्ते पर चल रहे हैं।
  6. हम जितना ज्यादा बाहर जाए और दूसरों का भला करें, हमारा हृदय उतना ही शुद्ध होगा और परमात्मा उसमें वास करेंगे।
  7. भला हम भगवान को खोजने कहां जा सकते हैं, अगर उसे अपने हृदय और हर एक जीवित प्राणी में नहीं देख सकते।
  8. आपको अंदर से बाहर की ओर विकसित होना है। कोई तुम्हें पढ़ा नहीं सकता, कोई तुम्हें आध्यात्मिक नहीं बना सकता. तुम्हारी आत्मा के आलावा कोई और गुरु नहीं है।
  9. पहले हर अच्छी बात का मजाक बनता है, फिर उसका विरोध होता है और फिर उसे स्वीकार कर लिया जाता है।
  10. किसी भी चीज से मत डरो। तुम अद्भुत काम करोगे। यह निर्भयता ही है जो पलभर में परम आनंद लाती है।

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