बेंगलुरु। जीतो बेंगलुरु टीम द्वारा आयोजित “विश्व नवकार महामंत्र दिवस” का भव्य एवं ऐतिहासिक आयोजन गांधीनगर स्थित फ्रीडम पार्क में अत्यंत उत्साह, श्रद्धा एवं आध्यात्मिक वातावरण के साथ संपन्न हुआ। शुभ मंगल प्रभात से ही श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा और आस्था, भक्ति एवं उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला।
कार्यक्रम का शुभारंभ जीतो के पदाधिकारियों, गणमान्य अतिथियों एवं सदस्यों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर चतुर्विध धर्मसंघ एवं सभी अतिथियों का भावभीना स्वागत किया गया। आज के इस भव्य आयोजन में 108000 से अधिक श्रद्धालुओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। फ्रीडम पार्क के साथ-साथ बेंगलुरु शहर के 108 विभिन्न स्थानों पर भी सामूहिक रूप से नवकार महामंत्र का जाप किया गया, जिससे पूरा शहर नवकारमय हो उठा।
जीतो बेंगलुरु नॉर्थ के चेयरमेन श्री विमल कटारिया ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि नवकार महामंत्र दिवस का यह पावन अवसर हम सभी के लिए अत्यंत प्रेरणादायक है, जो विश्व में शांति का संदेश पहुंचाने का माध्यम बना है। उन्होंने कहा कि जैन समाज की प्रतिभाएं आज विभिन्न उच्च पदों पर रहते हुए भी अपनी आस्था और सकारात्मक सोच से समाज की एकता और उन्नति को निरंतर सशक्त कर रही हैं।
जीतो बेंगलुरु साउथ के चेयरमेन श्री रणजीत सोलंकी ने अपने उद्बोधन में कहा कि “विश्व नवकार महामंत्र दिवस” केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मिक शांति एवं विश्व कल्याण की भावना से जुड़ा पावन अवसर है। उन्होंने बताया कि “श्रमण आरोग्यम”एवं जेबीएन नेटवर्किंग जैसे प्रकल्पों के माध्यम से जीतो समाज सेवा एवं आर्थिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रहा है।
कार्यक्रम का सफल संचालन बैंगलोर नॉर्थ के मुख्य सचिव श्री विजय सिंघवी एवं बैंगलोर साउथ के मुख्य सचिव श्री नितिन लुनिया द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। दोनों महामंत्रियों ने कहा कि यह आयोजन टीमवर्क, समर्पण और सामूहिक प्रयास का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसमें सभी सदस्यों का सहयोग सराहनीय रहा।
भारत के माननीय गृह मंत्री श्री अमित शाह का जप अनुष्ठान विज्ञान भवन, नई दिल्ली से ऑडियो-वीडियो माध्यम द्वारा प्रसारित किया गया, जिसे श्रद्धालुओं ने ध्यानमग्न होकर सुना। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि नवकार महामंत्र केवल जप नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाला सशक्त माध्यम है। उन्होंने युवा पीढ़ी से आह्वान किया कि इस मंत्र को श्रद्धा एवं विश्वास के साथ अपनाएं, क्योंकि इसका जप निश्चित रूप से सिद्धि प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि यह मंत्र किसी जाति, धर्म या काल की सीमा में बंधा नहीं है, बल्कि एक सार्वभौमिक प्रार्थना है जो आत्मज्ञान और मोक्ष का मार्ग दिखाती है। उन्होंने आगे कहा कि नवकार महामंत्र की महिमा अनंत है, यह आत्मशुद्धि एवं आंतरिक शत्रुओं के नाश का मार्ग प्रशस्त करता है और पंच परमेष्ठी के गुणों की वंदना के माध्यम से जीवन को ऊंचाइयों तक ले जाता है।
कर्नाटक सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री दिनेशजी गुंडूराव ने कहा कि विश्व शांति के उद्देश्य से आयोजित यह कार्यक्रम अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन प्रेम, भाईचारे एवं अहिंसा का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बना है।
कार्यक्रम में प. पू. मुनिराज मलयप्रभसागरजी म.सा. आदि ठाणा का सान्निध्य प्राप्त हुआ। उनके पावन मार्गदर्शन में नमस्कार महामंत्र का सामूहिक जाप अत्यंत श्रद्धा एवं एकाग्रता के साथ किया गया, जिससे संपूर्ण वातावरण दिव्यता से भर उठा। मुनिश्री ने कहा कि एक ही समय में विश्वभर में नवकार महामंत्र का जाप करना विश्व शांति का सशक्त संदेश है और यह जीतो की अद्भुत पहल है। उन्होंने आगे कहा कि नवकार महामंत्र के नियमित जप से आत्मिक शांति, ऊर्जा एवं जीवन में संतुलन प्राप्त होता है, जो शाश्वत सुख का मार्ग प्रशस्त करता है।
प.पू. लोकेश मुनिजी म.सा. ने मंगल पाठ प्रदान करते हुए कहा कि नवकार महामंत्र जैन श्रावक की आस्था का मूल आधार है और इसका स्मरण जीवन की अंतिम श्वास तक बना रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि वास्तविक कमाई धन-संपत्ति नहीं, बल्कि जप और तप है, जो आत्मकल्याण का मार्ग है। उन्होंने प्रेरित किया कि जीवन में ऐसी भावना हो कि जप-तप करते हुए ही इस संसार से विदा लें—यही सर्वोत्तम साधना है।
कार्यक्रम का प्रभावशाली मंच संचालन युवा प्रेरक स्मित कोठारी ने किया। संगीतकार श्री पारस गड़ा एवं श्री जैनम वारिया ने मधुर स्वरलहरियों के साथ नवकार महामंत्र की प्रस्तुति देकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया, जिससे उपस्थित श्रद्धालु ध्यानमग्न हो गए।
“एक विश्व, एक मंत्र – शांति के लिए सामूहिक जाप” के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालुओं ने एक स्वर में नवकार महामंत्र का जाप कर विश्व शांति का संदेश दिया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में श्री एम.आई. अरुण (कर्नाटक उच्च न्यायालय न्यायाधीश), श्री दिनेशजी गुंडूराव (स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री), श्री पी.एन. देसाई (माननीय न्यायाधीश, कर्नाटक उच्च न्यायालय), श्री सुभवीर जैन (संभावित माननीय न्यायाधीश, लोकायुक्त), श्री पद्मा प्रसाद जैन (अपर नगर सिविल न्यायालय सत्र न्यायाधीश), श्री मनोज जैन (सचिव, योजना एवं सांख्यिकी विभाग), श्री अजय कुमार जैन (आईआरएएस अधिकारी), श्री पी.पी. हेगड़े (वरिष्ठ अधिवक्ता, उच्च न्यायालय एवं उच्चतम न्यायालय) एवं श्री जिनेंद्र खानगावी (आईपीएस, पुलिस उप महानिरीक्षक – जेल) की गरिमामयी उपस्थिति रही।
साथ ही कार्यक्रम में जीतो अपेक्स एवं विभिन्न प्रकल्पों से जुड़े गणमान्य पदाधिकारियों एवं वरिष्ठ सदस्यों की भी विशेष उपस्थिति रही, जिनमें श्री प्रवीण शाह (DIC. यूथ विंग अपेक्स), श्री शैलेश हरण (DIC. JIIF, जीतो अपेक्स), श्री महावीर मेहता (चेयरमैन जीतो इंटरनेशनल), श्री विनोद पोखरणा (चेयरमैन जीतो जॉब्स), श्री रमेशचंद बोहरा (उपाध्यक्ष जेएटीएफ), श्रीमती मोनिका पिरगल (उपाध्यक्ष सीएफई), श्री ओम जैन (डायरेक्टर जेईएपी), श्री दिलीप जैन (मुख्य सचिव, जीतो केकेजी जॉन), श्री महेश नाहर (मुख्य सचिव जेएटीएफ केकेजी), श्रीमती पिंकी जैन (कन्वीनर केकेजी जॉन), जीतो बेंगलुरु के पूर्व चेयरमैन श्री तेजराज गुलेच्छा, श्री प्रकाशचंद सिंघवी, श्री पारस भंडारी, श्री श्रीपाल खिवेसरा, श्री अशोक नागोरी, श्री दिनेश बोहरा एवं श्री इंदरचंद बोहरा की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
कर्नाटक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश श्री एम.आई. अरुण ने अपने उद्बोधन में कहा कि नवकार महामंत्र “मंत्रों में मंत्र” है, क्योंकि यह किसी व्यक्ति विशेष नहीं, बल्कि श्रेष्ठ गुणों की वंदना करता है। उन्होंने कहा कि यह महामंत्र अहिंसा, वीतरागता एवं सर्वकल्याण की भावना का संदेश देता है और त्याग में ही सच्चा सुख निहित है।
श्री मनोज जैन (खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता विभाग) ने कहा कि नवकार महामंत्र एक अद्भुत एवं सार्वभौमिक मंत्र है, जो समाज को एकता के सूत्र में पिरोता है। उन्होंने आग्रह किया कि जनगणना में “जैन” शब्द को नाम के साथ जोड़कर समाज की पहचान को और सशक्त बनाया जाए।
कार्यक्रम के संयोजन की जिम्मेदारी जीतो बेंगलुरु नॉर्थ के संयोजक श्री प्रवीण चौहान तथा जीतो बेंगलुरु साउथ के संयोजक बेंगलुरु साउथ श्री महेंद्र रांका एवं बेंगलुरु नॉर्थ सहसंयोजक श्री सुनील लोढ़ा एवं सहसंयोजक श्री महावीर दांतेवाड़िया ने कुशलतापूर्वक निभाई।
अंत में आयोजकों ने सभी साधु-संतों, अतिथियों, पदाधिकारियों एवं श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सभी के सहयोग, समर्पण एवं सक्रिय सहभागिता से यह आयोजन ऐतिहासिक एवं सफल बन पाया।

