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सवर्णों को आरक्षण देने से जुड़ा संविधान संशोधन बिल पेश

Last updated: January 8, 2019 1:28 pm
Surabhi Saloni
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3 Min Read
File Photo
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नई दिल्ली. केंद्र ने सवर्णों को आर्थिक आधार पर शिक्षा और सरकारी नौकरियों में 10% आरक्षण देने से जुड़ा 124वां संविधान संशोधन बिल मंगलवार को सदन में पेश किया। केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत ने इसे पटल पर रखा। इस बिल को बसपा, कांग्रेस, आप और एनसीपी ने समर्थन देने की बात कही है। उधर, डीएमके ने इसका विरोध किया है। लोकसभा में आज विंटर सेशन का आखिरी दिन है।
इससे पहले बसपा प्रमुख मायावती ने कहा, “सवर्ण आरक्षण के प्रस्ताव का उनकी पार्टी समर्थन करेगी। लोकसभा चुनाव से पहले लिए गया यह फैसला हमें सही नीयत से लिया गया नहीं लगता है। यह चुनावी स्टंट और राजनीतिक छलावा लगता है। अच्छा होता अगर भाजपा सरकार यह फैसला चुनाव के और पहले लेती।” उन्होंने कहा कि बाबासाहेब के अथक परिश्रम और त्याग के बाद ही गरीब और शोषित वर्ग के दलित और आदिवासियों को आरक्षण दिए जाने की व्यवस्था काफी पुरानी हो चुकी है। इसलिए एससी-एसटी ओबीसी को उनकी आबादी के अनुपात के हिसाब से आरक्षण दिए जाने की व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।
आरक्षण 49.5% से बढ़कर 59.5% हो जाएगा : लोकसभा चुनाव से ठीक पहले हुए इस फैसले से विभिन्न वर्गों का कुल आरक्षण 49.5% से बढ़कर 59.5% हो जाएगा। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण की अधिकतम सीमा 50% तय कर रखी है। भाजपा का वोट बैंक मानी जाती रही सवर्ण जातियां आरक्षण की मांग करती रही हैं। जनरल कैटेगरी में सवर्णों के अलावा मुस्लिम और अन्य धर्मों के लोग भी शामिल होंगे। आरक्षण के लिए परिवार की अधिकतम सालाना आय 8 लाख रुपए तय की गई है। माना जा रहा है कि सरकार ने यह कदम एससी- एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलटे जाने से नाराज सवर्णों को लुभाने के लिए उठाया है। इसका खामियाजा पार्टी को हाल ही में मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में सत्ता गंवाकर भुगतना पड़ा था।
आरक्षण के लिए 5 प्रमुख मापदंड :  1. परिवार की सालाना आमदनी 8 लाख रु. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। 2. परिवार के पास 5 एकड़ से ज्यादा कृषि भूमि नहीं होनी चाहिए। 3. आवेदक के पास 1,000 वर्ग फीट से बड़ा फ्लैट नहीं होना चाहिए। 4. म्यूनिसिपलिटी एरिया में 100 गज से बड़ा घर नहीं होना चाहिए। 5. नॉन नोटिफाइड म्यूनिसिपलिटी में 200 गज से बड़ा घर न हो।

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