सिलीगुड़ी। 30अगस्त को समणी निर्देशिका कांतिप्रज्ञाजी समणी हिमांशुप्रज्ञाजी के पावन सान्निध्य में पर्युषण महापर्व का चौथा दिन “वाणी सयम दिवस”के रूप में तेरापंथ भवन सिलीगुड़ी में मनाया गया।कार्यक्रम का प्रारम्भ महिला मंडल द्वारा आज के विषय पर गीतिका से मंगलाचरण किया गया।
इस मौके पर समणीजी हिमांशुप्रज्ञाजी द्वारा बहुत ही विस्तृत रूप में श्रावको को बताया, समणी निर्देशिका कांतिप्रज्ञाजी ने भगवान महावीर के वाणी पर तथा आज के विषय की महत्ता पर अपने विचार प्रस्तुत किये,और मंत्र साधना के बारे में भी अपने सारगर्भित विचार सभा के समक्ष रखे,वाणी सयम दिवस की महत्ता पर उन्होंने बताया की प्रत्येक श्रावक को प्रत्येक दिन कमसे कम एक घन्टा का मौन अवश्य रखना चाहिए,कम से कम बोलना चाहिए,जहा आवश्यक हो वही बोलना चाहिए,सोच कर बोलना चाहिए, बोलने से पहले उसे तोलना चाहिए,मीठा बोलना चाहिए।
उन्होंने बताया कि वाणी के द्वारा ही आप अच्छे भी बन सकते हैं और खराब भी इसलिए बोलने से पहले गहरा चिंतन करना चाहिए,भाषा अच्छी होनी चाइये, काफी संख्या में श्रावको की उपस्थिति थी। यह जानकारी मीडिया प्रभारी शशीकला जी बैद ने दी।
सिलीगुड़ी में चौथा दिन “वाणी सयम दिवस”के रूप में मना

