नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस रंजन गोगोई ने असम में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) लागू करने का समर्थन किया। उन्होंने इसे भविष्य के लिए मूल दस्तावेज बताया। जस्टिस गोगोई ने कहा- इससे पहले राज्य में अवैध प्रवासियों की संख्या के बारे में केवल अनुमान लगाया जाता था। इसके चलते राज्य में घबराहट, भय, अराजकता और हिंसा का दौर शुरु हो गया था। जस्टिस गोगोई ने कहा कि एनआरसी कोई नया या अद्भुत विचार नहीं है। 1951 में ही इस पर काम किया जा चुका है और वर्तमान एनआरसी केवल 1951 के आंकड़ों को दुरुस्त करने की कवायद भर है। जस्टिस गोगोई यहां ‘पोस्ट कॉलोनियल असम (1947-2019)’ नाम की किताब के विमोचन के मौके पर बोल रहे थे।
सीजेआई ने कहा- लोकतांत्रिक संस्थाओं पर आरोप लगाने की प्रवृत्ति बढ़ी
सीजेआई ने कहा, “उद्देश्य स्पष्ट है, अवैध प्रवासियों की संख्या जानने के लिए एक प्रक्रिया तय होनी बहुत जरूरी थी, जो वर्तमान एनआरसी के जरिए हो रही है। न इससे कम, न इससे ज्यादा। एनआरसी इसके लिए सबसे शांतिपूर्ण तरीका है। इसके जरिए राज्य के लोग क्षेत्र की संस्कृति और समुदाय को प्रभावित करने वाली गलतियों को सुधारने की उम्मीद रखते हैं। ”
एनआरसी को लेकर उन्होंने कहा, “यह चीजों को व्यवस्थित करने की प्रक्रिया है। एनआरसी कोई कामचलाऊ दस्तावेज नहीं है। 19 लाख या 40 लाख मायने नहीं रखते। यह भविष्य के लिए आधार दस्तावेज है। यह ऐसा दस्तावेज है, जिस भविष्य में अपने अधिकार के लिए प्रस्तुत किया जा सकता है। मेरी नजर में एनआरसी का यही विशिष्ट मूल्य है।”
संवेदनशील मुद्दों पर बयानबाजी को लेकर जस्टिस गोगोई ने कहा, “ऐसे लोग लोकतांत्रिक संस्थाओं पर आधारहीन और प्रेरित आरोप लगाते हैं। उनकी प्रतिष्ठा को धूमिल करना इनका लक्ष्य होता है। इनका मकसद तब पूरा होता है, जब तथ्य नागरिकों की पहुंच से दूर कर दिए जाते हैं और अफवाहों की बहुतायत होती है। असम और उसके विकास का मुद्दा अज्ञानी लोगों की बयानबाजी का शिकार हुआ है।”
सीजेआई ने कहा- संस्थाओं की कार्यप्रणाली का मीडिया और विशेष तौर पर सोशल मीडिया के जरिए आकलन किया जाता है। उन्होंने कहा, “यह सार्वजनिक तौर पर कहने की जरूरत है कि जिन लोगों ने एनआरसी और इसे लागू करने की समय सीमा पर आपत्ति जताई, वो आग से खेल रहे हैं। काम करने वाली संस्थाओं से जवाबदेही की मांग करने की आदत पर अंकुश लगाया जाना चाहिए।”
असम में अंतिम एनआरसी 31 अगस्त को जारी की गई थी, जिसमें 19 लाख आवेदनकर्ताओं के नाम हटा दिए गए थे। कुल 3, 30, 27, 661 लोगों ने एनआरसी के लिए आवेदन किया था। इनमें से 3, 11, 21, 004 के नाम सूची में शामिल कर लिए गए थे, जबकि 19, 06, 657 लोगों के नाम छोड़ दिए गए थे। 31 दिसंबर, 2017 की आधी रात को जारी एनआरसी के ड्राफ्ट में 1.9 लोगों के नाम प्रकाशित किए गए थे।
सीजेआई ने कहा- एनआरसी भविष्य के लिए मूल दस्तावेज, बेवजह की बयानबाजी ने नुकसान किया

