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संविधान दिवस:मोदी ने संसद के संयुक्त सत्र में कहा- संविधान की मजबूती के कारण ही एक भारत श्रेष्ठ भारत बना पाए

Last updated: November 26, 2019 11:46 am
Surabhi Saloni
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5 Min Read
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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सविंधान दिवस के मौके पर संसद के संयुक्त सत्र को संबोधिक किया। मोदी ने कहा, ‘‘अंबेडकर ने 25 नवंबर 1949 को याद दिलाया था कि भारत पहली बार 1947 में आजाद हुआ है या फिर 29 जनवरी 1950 में गणतंत्र हुआ है। ऐसा नहीं है। हमारे यहां पहले भी गणतंत्र था। हमने पहले भी आजादी गंवाई है और गणतंत्र भी। बाबा ने याद दिलाया – हम गणतंत्र हुए हैं, क्या हम आजादी बनाए रख सकते हैं। आज बाबा होते तो उन्हें खुशी होती। आज भारत ने उनके सवालों का न सिर्फ जवाब दिया है बल्कि भारत ने खुद को सशक्त और अक्षुण्ण बना रखा है। मैं विशेष तौर 130 करोड़ भारतीयों के प्रति नतमस्तक हूं। उन्होंने कभी भी इसे झुकने नहीं दिया। इसे उन्होंने मार्गदर्शन माना। इसने हर्ष के साथ मिला-जुला अनुभव लाया है। देशवासियों ने संविधान पर आंच नहीं आने दिया है। संविधान की मजबूती के कारण एक भारत-श्रेष्ठ भारत बना पाए हैं।’’ वहीं, विपक्ष ने इसका विरोध किया है।

मोदी ने कहा, ‘‘आज ही दिन 70 साल पहले संविधान के एक-एक अनुच्छेद पर चर्चा हुई। संकल्पों पर चर्चा हुई। यह सदन ज्ञान का महाकुंभ था। भारत का हर कोना सपनों को मढ़ने का प्रयास हुआ था। राजेंद्र प्रसाद, आचार्य कृपलानी, हंसा मेहता, गोपाल स्वामी आयंगर इन्होंने प्रत्यक्ष- अप्रत्यक्ष योगदान दिया था। आज मैं उनस सभी मनीषियों को नमन करता हूं।’’

‘‘संविधान की भावना एक पंथ है। यह हमारा पवित्र ग्रंथ है। ऐसा ग्रंथ जिसमें हमारा जीवन, मूल्य, व्यवहार, परंपरा आदि का समावेश हैं। साथ ही इसमें चुनौतियों का समाधान भी है। इसमें बाहरी प्रकाश के लिए खिड़कियां खोल रखी है और अंदर के प्रकाश को अधिक प्रज्वलित करने का अवसर दिया है। मैंने लाल किले की प्राचीर से जो कहा था उसे मैं दोहराता हूं। डिग्निटी फॉर इंडियन और यूनिटी फॉर इंडिया। इसने भारत की एकता और अखंडता को अक्षुण्ण बना रखा है। संविधान में ही अधिकार की बात है और कर्तव्यों का अनुपालन भी हैं।’’

‘हमें अपने कर्तव्यों और दायित्वों पर मंथन करना होगा’

‘‘राजेंद्र बाबू ने कहा था कि जो संविधान में लिखा नहीं है, वह कन्वेंशन से पूरा करना है। समाज में ऐसी व्यवस्था बन गई थी जिससे एक बड़े वर्ग को वंचित रखा गया था। आज समय की मांग है कि हमें अधिकारों के साथ अपने कर्तव्यों और दायित्वों पर मंथन करना ही होगा। दायित्वोें को पूरा किए बिना इसे बनाए नहीं रख सकते। आज देश बापू के 150वीं का जंयंती मना रहे हैं तो उन्हें याद करना जरूरी है। गांधी जी ने एक कदम आगे बढ़कर कहा था कि नागरिकों के कर्तव्यों के बारे में बात करते हैं।’’

‘आज के दिन नया इतिहास रचा गया था’

लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला कहा- ‘‘आज हम भारतीय संविधान की 70वीं वर्षगांठ पर एकत्रित हुए हैं। आज के दिन एक नया इतिहास रचा गया था। जब हमें स्वतंत्रता मिली थी तब हम पर संविधान निर्माण करने की महती जिम्मेदारी थी। भीमराव अंबेडकर ने सभी भारतीयों के साथ मिलकर संविधान का निर्माण किया। हमारा संविधान भारतीय संस्कृति और समाज का आईना है। संविधान ने हमें मौलिक अधिकार दिए हैं और मौलिक कर्तव्य भी दिए हैं। मौलिक कर्तव्य 51 (ए) को अपने जीवन में उतारे तो यह मानव जीवन को परिवर्तित कर देगा। भारत की संप्रभुता, एकता अखंडता को बनाए रखें। हम वैज्ञानिक सोच को विकसित करते हुए श्रेष्ठता हासिल करें। समय आ गया है हम सांसद देश के सामने उदाहरण प्रस्तुत करें कि हम इसका अनुसरण करें और दूसरों को अनुपालन करने को कहें। हमें संविधान को अपना पथ-प्रदर्शक बनाना होगा। आज हम इस गौरवपूर्ण क्षण में नए भारत के निर्माण का संकल्प लें।’’

26 नवंबर को संविधान सभा ने औपचारिक तौर पर अपनाया था संविधान
संविधान दिवस हर साल 26 नवंबर को मनाया जाता है। भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 में लागू हुआ। लेकिन संविधान सभा ने इसे 26 नवंबर 1949 को ही औपचारिक तौर पर अपना लिया था। इसका उद्देश्य संविधान निर्माता बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के संविधान निर्माण में लगे प्रयासों को दुनियाभर में प्रसारित करना है। प्रधानमंत्री मोदी ने अक्टूबर 2015 में 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाए जाने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि हर स्कूल में यह दिन मनाया जाएगा। इसके बाद सरकार ने 19 नवंबर को नोटिफिकेशन जारी कर 26 नवंबर (कानून दिवस) को संविधान दिवस घोषित किया था।

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