मुंबई। मजेरा गांव में जन्म लेकर चेंबूर को अपनी कर्मभूमि बनाने वाले जीवराज मेहता ने संथारा सल्लेखना कर पंडित मरण का वरण किया । म्रत्यु को महोत्सव बनाने वाले मेहता का बचपन एवं शिक्षा मजेरा में हुई । मुंबई के शुरुआती दिन काफी संघर्षपूर्ण रहे । लगन, निष्ठा एवं प्रमाणिकता जैसे गुणों से आर्थिक बुलंदियों का स्पर्श किया । हंसमुख एवं मिलनसार स्वभाव से सभी के चहेते बने रहे ।
पिछले सात वर्षों से अस्वस्थ चल रहे थे मगर बीमारी में भी समता भाव से सहन करते रहे । अंतिम कुछ महीनों से मिलने आने वाले स्नेही जनों एवं परिवार वालों से संथारा करने की भावना व्यक्त करते रहते थे । आखिर योग बना शुभ कर्मों के पुदगल उदय में आए Dr एवं इच्छित मंजिल को प्राप्त किया। आचार्य श्री महाश्रमण जी की विशेष अनुकंपा रही । पारिवारिक जन, तेरापंथ समाज मुंबई तथा चेंबूर के सभी सदस्य उनकी आत्मा के उध्वारोहण में सहायभुत बने ।
संथारा साधक जीवराज मेहता पंचतत्व में विलीन

