मुंबई। नाशिक के भोंदू बाबा अशोक खरात को पुलिस ने गिरफ्तार किया, यह अच्छा हुआ, लेकिन यह भोंदू बाबा महाराष्ट्र का आसाराम बापू है। आसाराम बापू और राम रहीम ने जो किया, वही इस अशोक खरात ने भी किया है। सिर्फ 58 वीडियो ही नहीं, यदि गहराई से जांच की जाए तो सैकड़ों वीडियो सामने आएंगे। महिलाओं का शोषण करने वाले इस भोंदू बाबा को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। साथ ही, अब तक उसके कारनामों को देखते हुए उसे किसी न किसी का राजनीतिक आशीर्वाद जरूर प्राप्त रहा होगा। उसके पीछे कौन सी राजनीतिक ताकत है, यह महाराष्ट्र की जनता के सामने आना चाहिए, ऐसा महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा।
गांधी भवन में मीडिया से बात करते हुए सपकाल ने आगे कहा कि महाराष्ट्र शिव, शाहू, फुले और आंबेडकर के विचारों का राज्य है। राज्य में अंधश्रद्धा विरोधी कानून होने के बावजूद अशोक खरात जैसा भोंदू बाबा खुलेआम अपने काले धंधे करता है और किसी को इसकी भनक तक नहीं लगती, यह गंभीर बात है। अशोक खरात के ट्रस्ट से जुड़े और उसे समर्थन देने वाले लोगों की भी जांच होनी चाहिए। आसाराम बापू के साथ नरेंद्र मोदी कई बार दिखाई दिए थे, वही विकृति अब महाराष्ट्र में भी फैल रही है। नाशिक में जो हुआ, वह आश्चर्यजनक नहीं है। प्रगतिशील राज्य में अंधश्रद्धा को बढ़ावा दिया जा रहा है और ऐसे विकृत लोग सत्ता के संरक्षण में खुलेआम अपने धंधे चला रहे हैं। भाजपा की खुशामद करने वाली यह प्रवृत्ति महाराष्ट्र की संस्कृति के खिलाफ है। अंधश्रद्धा के खिलाफ डॉ. नरेंद्र दाभोलकर ने जीवनभर संघर्ष किया, लेकिन उन्हें ही गोली मारकर हत्या कर दी गई, ऐसा भी सपकाल ने कहा।
महिला आयोग से अपेक्षा होती है कि वह महिलाओं के शोषण के खिलाफ काम करे, लेकिन महिला आयोग की अध्यक्ष रुपाली चाकणकर ने अशोक खरात की पाद्यपूजा की, यह कृत्य खरात जैसे भोंदू बाबाओं को बढ़ावा देने वाला है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है; पुणे का हगवणे प्रकरण हो या सातारा की महिला डॉक्टर का मामला, चाकणकर आरोपी का बचाव करती नजर आई हैं। उनके कामकाज को देखते हुए अब तक उनका इस्तीफा हो जाना चाहिए था, ऐसा भी सपकाल ने कहा।
रासप अध्यक्ष महादेव जानकर ने की सपकाल से मुलाकात
राष्ट्रीय समाज पक्ष के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मंत्री महादेव जानकर ने आज गांधी भवन में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल से मुलाकात कर राज्य की राजनीतिक स्थिति पर विस्तृत चर्चा की। इसके बाद मीडिया से बात करते हुए सपकाल ने कहा कि इससे पहले नांदेड़, पुणे के कसबा और देगलूर विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव हो चुके हैं। नांदेड़ लोकसभा और देगलूर विधानसभा चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस के खिलाफ उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन वहां कांग्रेस विजयी रही। कसबा उपचुनाव में भी कांग्रेस उम्मीदवार जीते थे। इससे स्पष्ट है कि चुनाव और सहानुभूति दो अलग-अलग मुद्दे हैं। अजित पवार का असामयिक और आकस्मिक निधन दुखद घटना है। बारामती के संदर्भ में देखें तो इस क्षेत्र में विधानसभा और लोकसभा दोनों चुनावों में पवार बनाम पवार मुकाबला हो चुका है और राज्यसभा में भी आठवां उम्मीदवार होता तो पवार बनाम पवार मुकाबला होता। बारामती और राहुरी दोनों सीटों पर पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस के उम्मीदवार रहे हैं। महाविकास आघाड़ी के रूप में हम इस विषय पर उनसे चर्चा करेंगे और उसके बाद उम्मीदवार उतारना है या नहीं, इस पर निर्णय लिया जाएगा, ऐसा हर्षवर्धन सपकाल ने कहा।

