नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पश्चिम एशिया संकट के कारण आर्थिक वृद्धि प्रभावित होने और खुदरा महंगाई बढ़ने की आशंका जाहिर करते हुए मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बुधवार को समाप्त बैठक में नीतिगत दरों को स्थिर रखने तथा ‘इंतजार करो और नजर रखो’ की नीति अपनाने का फैसला किया। एमपीसी ने सर्वसम्मति से रेपो दर 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने का निर्णय किया। साथ ही अपना रुख तटस्थ बनाये रखा है।
अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा हॉर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता फैल गई है। इससे कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं, जो भारत जैसे ऊर्जा-आयातक देशों के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गया है। रेटिंग एजेंसियों, आरबीआई और सरकार की रिपोर्टों में साफ चेतावनी दी गई है कि यदि यह संकट लंबा खिंचा तो भारत में महंगाई (इन्फ्लेशन) बढ़ने का खतरा है, साथ ही जीडीपी वृद्धि दर भी प्रभावित हो सकती है।
संकट की पृष्ठभूमि और तत्काल प्रभावपश्चिम एशिया में संघर्ष के चलते स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (जिससे विश्व का लगभग 20% तेल गुजरता है) में आपूर्ति बाधित हुई है। ईरान की ओर से नाकाबंदी जैसे कदमों और ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमलों के कारण कतर जैसे देशों में एलएनजी उत्पादन प्रभावित हुआ है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें 80-100 डॉलर प्रति बैरल या उससे ऊपर पहुंच गई हैं, जबकि भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत भी 120 डॉलर के आसपास पहुंच चुकी है। भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का 85% आयात करता है, जिसमें पश्चिम एशिया से 50-60% हिस्सा आता है। इससे आयात बिल बढ़ रहा है, चालू खाता घाटा (CAD) चौड़ा हो रहा है और रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ है। आरबीआई ने इस संकट के प्रमुख चैनलों का जिक्र किया है उनमें ऊर्जा कीमतें, आयातित महंगाई, विकास दर पर दबाव, राजकोषीय संतुलन और आपूर्ति श्रृंखला व्यवधान आदि हैं।
पेट्रोलियम उत्पादों (ईंधन, एलपीजी, परिवहन) पर महंगाई बढ़ेगी। कच्चे तेल में 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से सीपीआई महंगाई में लगभग 0.2-0.5 प्रतिशत अंक की वृद्धि हो सकती है। यदि कीमतें 100 डॉलर से ऊपर बनी रहीं, तो FY27 में औसत महंगाई 4.5-5% या उससे अधिक पहुंच सकती है (आरबीआई का अनुमान 4.6% है, लेकिन जोखिम ऊपर की ओर)।
उर्वरक (यूरिया, एनपीके) की आपूर्ति बाधित होने से खाद्य मुद्रास्फीति बढ़ेगी। एलपीजी और गैस की कमी से घरेलू स्तर पर संकट गहरा सकता है, जिसका असर खाने-पीने की चीजों और परिवहन लागत पर पड़ेगा। दूसरे दौर के प्रभाव से कोर इन्फ्लेशन भी प्रभावित होगा।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि संकट विकास पर ज्यादा असर डालेगा, लेकिन महंगाई नियंत्रण में रखने के प्रयास जारी हैं। सरकार ने घरेलू उपयोग के लिए एलपीजी को प्राथमिकता दी है और आपूर्ति वैकल्पिक स्रोतों से सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है। हालांकि, यदि संकट 3-6 महीने से ज्यादा चला तो पंप पर पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ाई जा सकती हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बुनियादी ढांचे के कारण पूरी तरह प्रभावित नहीं होगी, लेकिन ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और वैकल्पिक स्रोतों (नवीकरणीय ऊर्जा, अन्य आयातक देश) की ओर बढ़ने की जरूरत है।
पश्चिम एशिया संकट के कारण देश में महंगाई बढ़ने की आशंका: आरबीआई

