ठाणे। साध्वी श्री अणिमाश्रीजी एवं साध्वी श्री मंगलप्रज्ञाजी के सानिध्य में आचार्य महाप्रज्ञ जन्म शताब्दी वर्ष के तहत तेरापंथी सभा, ठाणा के तत्वाधान में प्रेक्षा वेलबिंग वर्कशॉप का आयोजन किया गया, जिसमे अच्छी संख्या में भाई-बहनों ने भाग लेकर अपनी जीवनी-शक्ति को प्रज्वलित करने के मन्त्र प्राप्त किए।
मुख्य वक्ता डॉ समणी प्रतिभाप्रज्ञाजी ने कहा आचार्य महाप्रज्ञ सिंह पुरुष थे। उन्होंने अपनी विशिष्ट साधना के द्वारा जो मोती प्राप्त किए, उनको प्रेक्षाध्यान के रूप में धर्मसंघ को समर्पित किया।
आचार्य महाप्रज्ञ ने कहा स्वास्थ्य को गौण क्र व्यक्ती अध्यात्म में व्यक्ती अधिक आगे तक नहीं बढ़ सकता। स्वास्थ्य के अंतर्गत कायकव्य प्रेक्षा एक आध्त्यमिक एवं प्रभावशाली प्रयोग है। कायकव्य अन्तर्मल के शोधन का प्रयोग है। शोधन के बिना पोषण कार्यकारी नहीं बनता। आयुर्वेद में भी इसी मत की पुष्टि हुई है। आचार्य महाप्रज्ञाजी ने भी पंचकव्य, कायकव्य आदि विभिन्न प्रयोग अपने जीवन कल में किये। समणिजी ने इस कार्यशाला में प्राण-पेक्षा, पंचभूत-प्रेक्षा एवं अर्हम न्यास के महत्त्वपूर्ण प्रयोग करवाए। परिषद ने प्रयोगों के माध्यम से नई ऊर्जा की अनुभूति की।
मंगलप्रज्ञाजी ने कहा – आचार्य महाप्रज्ञ प्रज्ञा के महाभंडार थे। उन्होंने अपनी प्रज्ञा के द्वारा धर्मसंघ को अनेक अवदान दिए। उनके चले जाने के बाद उनका साहित्य शताब्दियों-शताब्दियों तक मानव जाती का मार्गदर्शन करता रहेगा। वो कहते थे ऊर्जा के स्त्रोतों को ध्यान के द्वारा जागृत किया जा सकता है। मैंने स्वयं आचार्य महाप्रज्ञजी से न्यास के प्रयोग किये है। वे जब प्रयोग करवाते थे तब लगता था ऊर्जा का संचरण हो रहा है। प्रयोगों के द्वारा रूपांतरण घटित हो सकता है।
साध्वी श्री अणिमाश्रीजी ने अपने उद्बोधन में कहा – हमने अब तक अनेको बार ध्यान के बारे में सुना है। अब जानने समझने की जरूरत नहीं, जीने की जरुरत है। प्रयोगों के लिए समय निकाले। तभी हम आचार्य महाप्रज्ञजी को जन्म शताब्दी पर श्रहा का उपहार समर्पित कर पाएंगे।
समणी विपुलप्रज्ञाजी ने कहा – साध्वी अणिमाश्रीजी के आभामंडल से नई ऊर्जा प्राप्त होती है। आपका साधनामय पोसिटिव ओश सबको अपनी और आकर्षित करता है। साध्वी मंगलप्रज्ञा का वात्स्ल मेरी विकास यात्रा में सहयोगी बना है। मैं आपको अपने आदर्श के रूप में देखती हूँ। साध्वी कर्णिकाश्रीजी एवं साध्वी मैत्रीप्रभाजी मेरी संसार पक्षीय बहिनें है। वैसे भी साध्वी अणिमाश्रीजी के ग्रुप को मैं सिस्टर ग्रुप से जानती हूँ। आज मैं मेरी अनुजा साध्वी मैत्रीप्रभाजी के सिद्धि तप की एवं साध्वी सुधाप्रभाजी के कंठीतप की हार्दिक अनुमोदना करती हूँ। आपके पुरे ग्रुप में ही तप के फूल खिल रहे है। तप-सुमनों की सुवास से पूरा समाज सुवासित हो।
साध्वी कर्णिकाश्रीजी, साध्वी सुधाप्रभाजी, साध्वी समत्वयशाजी व् साध्वी मैत्रीप्रभाजी ने दोनों समणिजी के लंदन यात्रा की मंगलकामना करते हुए संघप्रभावना करने की बात कही। मंच संचालन साध्वी मैत्रीप्रभाजी ने किया।
प्रेक्षा वेलबिंग कार्यशाला: प्रज्वलित करें अपनी जीवनी शक्ति को – समणी प्रतिभाप्रज्ञा

