नई दिल्ली: नीति आयोग ने 2022-23 तक देश में बेसिक डिजिटल साक्षरता शत प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा है। आयोग का कहना है कि डिजिटल लिटरेसी को बढ़ावा देने के लिए स्कूलों और कालेजों पर विशेष फोकस करने का सुझाव दिया है।
नीति आयोग ने यह सुझाव ‘स्ट्रैटेजी फॉर न्यू इंडिया एट 75’ में दिया है। आयोग का यह सुझाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत में फिलहाल डिजिटल साक्षरता का स्तर काफी कम है। आबादी के बड़े हिस्से के पास कंप्यूटर, लैपटॉप या स्मार्ट फोन भी नहीं हैं। आयोग के इस दस्तावेज के अनुसार भारत में डिजिटल साक्षरता का लगभग 10 प्रतिशत होने का अनुमान है। ऐसे में डिजिटल साक्षरता का स्तर बढ़ाने के लिए सरकार को विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
वर्ष 2022-23 तक देश में डिजिटल लिटरेसी का स्तर शत प्रतिशत करने का लक्ष्य करते हुए आयोग ने कहा कि इसके लिए स्कूल व कालेज के स्तर फोकस देने की जरूरत है। राष्ट्रीय डिजिटल साक्षरता मिशन को सभी सरकारी स्कूलों में प्राथमिक स्तर पर डिजिटल साक्षरता के लिए फोकस करना चाहिए। इसके अलावा एडवांस लेवल के लिए उच्च कक्षाओं व कालेजों में डिजिटल साक्षरता पर फोकस करना चाहिए। आयोग का कहना है कि इस अभियान का असर उस समय होगा जब ये विद्यार्थी अपने परिवारों के सदस्यों को डिजिटल साक्षर बनाएंगे। डिजिटल साक्षरता बढ़ने से देश में कंप्यूटर हार्डवेयर का उपयोग भी बढ़ेगा।
डिजिटल साक्षरता की नजीर पेश कर रहा ‘डेल आरम्भ’
डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देने के मामले में आइटी कंपनी डेल की पहल अलग नजीर पेश कर रही है। ‘डेल आरम्भ’ नाम के इस अभियान के तहत स्कूलों में विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को डिजिटल साक्षरता देने पर जोर दिया जा रहा है। डेल आरम्भ के तहत अब तक 75 शहरों में 4500 स्कूलों में इस तरह के अभियान चलाए जा चुके हैं और 10 लाख विद्यार्थियों को इस अभियान से जोड़ा जा चुका है। डेल के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट कृष्णकुमार पी ने कहा कि नई श्रेणी की नौकरियां उभर रही हैं जिससे पुरानी नौकरियां काफी हद तक बदल रही हैं। इसलिए नए और पुराने सभी पेशों में नए तरह के कौशल की आवश्यकता होगी। भविष्य की नौकरियों के लिए रचनात्मकता आवश्यक है। इसके लिए डिजिटल साक्षरता को बढ़ाना जरूरी है।
नीति आयोग ने दिया डिजिटल साक्षरता बढ़ाने पर जोर, छोटे शहरों में शुरू हो रहा ‘डेल आरम्भ’ अभियान

