लाडनूं । जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, अहिंसा यात्रा प्रणेता, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने शुक्रवार को प्रातःकालीन मुख्य मंगल प्रवचन कार्यक्रम के दौरान सुधर्मा सभा में उपस्थित चतुर्विध धर्मसंघ को आज के निर्धारित विषय मनःसमाधारणा से क्या मिलेगा?’ को आगम के माध्यम से विश्लेषित करते हुए कहा कि मन को सम्यक्तया श्रुत स्वाध्याय मर्यादा में नियोजित करना मनः समाधारणा होता है।
किसी विषय पर चिंतन-मनन, आगम के आलोडन-विलोडन, व्याख्या साहित्य आदि के अध्ययन में मन को नियोजित किया जा सकता है। आगम के भावों में अपने मन को लीन कर देना, श्रुत स्वाध्याय में लीन हो जाना बड़ी बात होती है। आगम के स्वाध्याय से अध्यात्म का मार्गदर्शन मिल सकता है, दार्शनिक, तात्त्विक बातें और कुछ घटना प्रसंग आदि भी मिल सकते हैं।
कुछ आगम कंठस्थ हो जाए तो फिर कितनी अच्छी बात हो सकती है। कोई दसवेआलियं, कोई नन्दी, कोई आयारो को याद कर ले, कंठस्थ कर ले तो क्या ही कहना। उत्तरज्झयणाणि आगम के दसवें अध्ययन में मन को लगाकर कंठस्थ कर लेना, कितनी अच्छी बात हो सकती है। श्लोकों का अर्थ ज्ञात हों और इसके अर्थ के चिंतन में मन को लगा देना मनःसमाधारणता हो सकती है।
मनःसमाधारणता श्रुत स्वाध्याय से संबंधित है। साधु के रात्रिकालीन के समय में जो भी आगम कंठस्थ हो, उसका पुनरावर्तन करने का प्रयास करना चाहिए। एक जगह एकत्रित होकर भी स्वाध्याय आदि किया जा सकता है। आदमी को अपने नियम के प्रति जागरूक रहने का प्रयास करना चाहिए।
मनःसमाधारणा से एकाग्रता हो जाती है। मन को स्वाध्याय में लगाने से मन एकाग्र हो सकता है। श्रुत के चिंतन में मन लीन हो जाता है तो मन एकाग्र हो सकता है। मन एकाग्र होता है तो अध्ययन करने वाला ज्ञान पर्यवों को उत्पन्न कर लेता है। स्वाध्याय करने से ज्ञान की प्राप्ति होने के साथ-साथ कुछ विशेष ज्ञान का भी अच्छा विकास हो सकता है और ज्ञान और ज्यादा स्पष्ट हो सकता है।
ज्ञान अच्छा हो गया तो सम्यक्त्व का विशोधन भी हो सकता है। आचार्यश्री ने आगे कहा कि मेरी दीक्षा में भी संभवतः कुछ योगदान ज्ञान का भी रहा। ज्ञान हुआ तो निष्ठा जागृत हुई। आचार्यश्री ने अनेक संतों से उनकी दीक्षा की प्रेरणा किन साधु-साध्वियों से प्रेरणा देने वाले चारित्रात्माओं के संदर्भ में जानकारी लेते हुए दीक्षा के लिए अन्य लोगों को भी प्रेरित करने की प्रेरणा प्रदान की। मंगल प्रवचन के उपरान्त आचार्यश्री ने चारित्रात्माओं की जिज्ञासाओं के उत्तर प्रदान किए।
मनःसमाधारणा से एकाग्रता की होती है प्राप्ति : शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमण
Highlights
- आगम आदि ग्रन्थों के स्वाध्याय के लिए आचार्यश्री ने किया अभिप्रेरित
- चारित्रात्माओं की जिज्ञासाओं को आचार्यश्री ने किया उत्तरित

