नाथद्वारा। नाथद्वारा बस स्टैंड निवासी श्री जयचंद लाल सामोता, उम्र 89 वर्ष ने मृत्युपरांत अपनी देह का दान करके नाथद्वारा जैन समाज में एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया।
ज्ञात हो लगभग 25 वर्षों से उनकी इच्छा थी कि वो मृत्यु के पश्चात अपना शरीर मेडिकल विद्यार्थियों के शोध के लिए दान करे। गत 26 फरवरी को अचानक बीमार होने के कारण उन्हें अनंता हॉस्पिटल में एडमिट किया, जहां वे 17 दिन एडमिट रहे। तत्पश्चात परिवार जनो ने वही अनंता कॉलेज & रिसर्च सेंटर में उनकी देह दान का निर्णय लिया और मृत्यु पश्चात वही देहदान की। अनंता हॉस्पिटल डॉक्टर्स, आईसीयू स्टाफ, मैनेजमेंट टीम और कॉलेज से एनाटॉमी डिपार्टमेंट से डॉ स्तुति श्रीवास्तव एवं पूरी टीम का विशेष सहयोग रहा।
रविवार को बैंड बाजों के साथ देहदान यात्रा उनके निवास से प्रारंभ हुई। सोमवार को परिवारिक जन ने स्मृति सभा का आयोजन मुनि श्री संजय कुमारजी प्रकाशकुमार जी सिद्धप्रज्ञ के सानिध्य में तेरापंथ भवन में आयोजित की।
मुनि श्री ने शरीर की नश्वरता को समझाते हुए परिवार को धार्मिक प्रेरणा प्रदान की। जयचंदजी के निधन पर आचार्य श्री महाश्रमणजी का संदेश का वचन किया ।
सांसद श्रीमती महिमा कुमारीजी मेवाड़, विधायक श्री विश्वराज सिंह जी मेवाड़, सकल जैन समाज नाथद्वारा, तेरापंथ सभा नाथद्वारा, तेरापंथ महिला मंडल नाथद्वारा, श्री वर्धमान स्थानक जैन श्रावक संघ(ज्ञानगच्छ), श्री अखिल भारतीय सुधर्म जैन संस्कृति रक्षक संघ शाखा मेवाड़, प्रदीप काबरा महामंत्री बीजेपी राजसमंद, लोक अधिकार मंच नाथद्वारा एवं उनके परम मित्र मदन जी सियाल का संवेदना पत्र प्राप्त हुए।
ऋतु धाकड़ ने जयचंद जी के ससुराल पक्ष की तरफ से अपनी भावभीवक्ति की।
जयचंद जी की पुत्री ने उनके जीवन के विभिन्न पहलू के बारे में बताते हुए संपूर्ण परिषद को देहदान की प्रेरणा दी और इसी स्मृति सभा के साथ जयचंद जी के पारिवारिक जन सामोता परिवार एवं धाकड़ परिवार ने शोक सम्पन्न किया।
जयचंद लाल जी अपने पीछे परिवार में पुत्र पारसमल चंद्रप्रकाश गणपत लाल बसंतीलाल राजेंद्र कुमार व पुत्री कैलाश देवी स्व. कांता देवी किरण करुणा का भरापुरा परिवार छोड़ कर गए।
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