पंकज श्रीवास्तव/पटना।। मधेपुरा की पहचान दो महारथियों लालू और शरद की लड़ाई से भी जानी जाती है। सुरभि सलोनी ने यादवी संग्राम की इस भूमि से कुछ स्थानीय पत्रकारों से वहाँ की जमीनी हकीकत जाननी चाही। पेश है उन्हीं के आकलन पर ये ग्राउंड जीरो रिपोर्ट।
इस बार मधेपुरा की चुनावी जंग राजद के शरद यादव और जदयू प्रत्याशी दिनेश चंद्र यादव के बीच का है। मौजूदा सांसद पप्पू यादव इस लड़ाई से बाहर हैं। अपनी बातों में दम लाने के लिए वरिष्ठ पत्रकार संतोष सिंह तोमर का तर्क है। लालू का माई समीकरण यहाँ पप्पू के वजह से और व्यापक हुआ है। मतलब यादव और मुस्लिम वोट जो पप्पू को जाते थे वो इस बार उनसे नाराज होकर राजद की ओर मुडा है। दूसरी हम ओर नवोदित (VIP) पार्टी से तालमेल का नतीजा मल्लाह और दलित जाति का वोट भी शरद को मिल रहा है। दिनेश चंद्र यादव को उनके अपनी जाति यानि यादव वोट तो मिल ही रहा है। एकमुश्त भाजपा के सवर्ण वोट की फसल भी वो काट रहें हैं। नीतीश का आधार वोट यानि कुर्मी और महादलित का वोट दिनेश चंद्र यादव को मिल रहा है।
संतोष सिंह तोमर एक चौकाने वाली जानकारी दे रहें हैं। उनकी माने तो इस इलाके के कोईरी किसी उपेन्दर कुशवाहा को अपना नेता नहीं मानते। वो सिर्फ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जानते हैं। अब एक नजर पिछले लोकसभा के नतीजे पर डाल लें 2014 में पप्पू यादव को 3,68,997 वोट मिले थे जबकि जदयू उम्मीदवार शरद यादव को 3,12,728 वोट मिले थे। वही तीसरे नंबर पर रहे भाजपा प्रत्याशी विजय कुमार सिंह को 2,52,534 वोट मिले थे। इस बार परिस्थितियां बदली हैं जदयू भाजपा के साथ है। अब दोनों का वोट जोड़ दें तो 5.50 लाख हो जाता है।
संतोष सिंह तोमर इस बात को भी जोड़ते है। पप्पू को हल्के में लेना गलत होगा। उनका तर्क है जिस लालू के माई समीकरण में सेंध लगाकर वो पिछली बार सांसद तक पहुँचे थे। उनके असंतोष पर पप्पू काबू करने में सफल हो गये तो मधेपुरा का चुनावी तस्वीर पूरी तरह से बदल जायेगा। यानि लड़ाई पप्पू और दिनेश चंद्र राय के बीच रह जायेगी।
लोकसभा चुनावः राजद और जदयू के बीच होगी मधेपुरा की लड़ाई

