न्यूयॉर्क:संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों के बावजूद उत्तर कोरिया मिसाइल परीक्षण से बाज नहीं आ रहा है। अपने हथियार कार्यक्रम के लिए धन जुटाने को वह वित्तीय संस्थानों और क्रिप्टो करेंसी एक्सचेंज पर साइबर हमलों का सहारा ले रहा है। मंगलवार को लीक हुई संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की एक गोपनीय रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।
120 अरब रुपये इकट्ठे किए
33 पन्नों की यूएन रिपोर्ट में कहा गया है, ‘उत्तर कोरिया के साइबर हमलावर वित्तीय संस्थाओं और क्रिप्टो करेंसी एक्सचेंज को निशाना बना रहे हैं। वे देश के नरसंहारक हथियार कार्यक्रम के लिए अनुमानित दो अरब डॉलर (लगभग 120 अरब रुपये) एकत्रित कर चुके हैं।’ यह रिपोर्ट बीते दो हफ्ते में मंगलवार को उत्तर कोरिया की ओर से किए गए चौथे मिसाइल परीक्षण के बीच आई है।
स्रोत की पहचान मुश्किल
यूएन अधिकारियों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को बेमाना बनाने के लिए प्योंगयांग बेहद पेचीदा साइबर हमलों का सहारा ले रहा है। वह बड़े पैमाने पर क्रिप्टो करेंसी एक्सचेंज से धन उड़ा रहा है, क्योंकि उसे पता है कि क्रिप्टो करेंसी के स्रोतों का पता लगाना न सिर्फ मुश्किल है, बल्कि पारंपरिक बैंकिंग संस्थानों के मुकाबले सरकारों का इस पर नियंत्रण भी काफी कम होता है।
छोटी नावों से फंड का स्थानांतरण
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उत्तर कोरिया वित्तीय संस्थानों और क्रिप्टो करेंसी एक्सजेंच से उड़ाई गई अवैध रकम को वैध बनाने की दिशा में भी सक्रिय है। वह पैसों के स्थानांतरण के लिए छोटी नावों की मदद ले रहा है। यही नहीं, विदेश में सक्रिय उत्तर कोरियाई कंपनियां अब भी राजनयिक आड़ में पांरपरिक हथियारों का सौदा करने और नई तकनीक हासिल करने के काम में जुटी हैं।
तेल पर प्रतिबंध बेअसर
यूएन अधिकारियों ने खुफिया डाटा के आधार पर दावा किया है कि उत्तर कोरिया के लिए जो सालाना पांच लाख बैरल पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात की सीमा तय की गई है, वह भी बेअसर साबित हो रही है। 2019 के शुरुआती चार महीनों में ही प्योंगयांग में इससे ज्यादा पेट्रोलियम उत्पाद पहुंच चुके हैं। विदेश में सक्रिय 30 बैंक अधिकारी अवैध खातों के जरिये पेट्रोलियम उत्पादों का भुगतान कर रहे हैं।

