डोंबिवली। आचार्य श्री महाश्रमण जी की विदुषी शिष्या शासन श्री साध्वी श्री सोमलता जी के सानिध्य में कन्या मंडल कार्यशाला: “अध्यात्म का ज्ञान, विकास का सोपान” का आयोजन हुआ। कन्या मंडल ने “जागो जागो कन्याओ यह बेला है अभियान कि” गीत का संगान किया।
शासन श्री साध्वी श्री सोमलता जी ने अपने मार्मिक उद्बोधन में वर्तमान की समस्याओं पर चिंतन व्यक्त करते हुए कहा – बी.ए., एम.ए., सी.ए., पी.एच.डी जैसी डिग्रीयां तो मिल जाएगी लेकिन उन डिग्रियों की भी उतनी उपयोगिता नहीं जितनी चरित्र और संस्कारों की उपयोगिता है। क्योंकि शिक्षा दिमाग को विकसित करती है और संस्कार दिल को विकसित करते है। जहा दिल के दरवाजे बंद हो और दिमाग के दरवाजे खुले हो वहां टेंशन अपना घर बना लेता है। जब टेंशन का संबंध जीवन के साथ जुड़ जाता है तो जिंदगी नीरस बन जाती है। चेहरे की मुस्कान गायब हो जाती है। आनंद और मस्ती की जिंदगी जीने के लिए समूह में प्रेम से रहना सीखना होगा। साध्वी श्री जी ने आगे कहा – विनम्रता, सहिष्णुता, मधुरता के संस्कारों से अपने जीवन को सुसज्जित करके आप जिस रास्ते से आगे बढ़ेंगे वहां ज्ञान का, प्रसन्नता का, पवित्रता का प्रकाश मिलेगा।
इस कार्यशाला में कन्याओं ने चार संकल्प स्वीकार किए:
१. प्रातः ८ बार नवकार मंत्र का स्मरण करना
२. दिन के १६ घंटे तक कुछ नहीं खाना – पीना।
३. भोजन में जूठन नहीं छोड़ना।
४. भोजन करते समय टी.वी. नहीं देखना।
साध्वी श्री शकुन्तलाकुमारी जी, संचितयशा जी, जगृतप्रभा जी व रक्षितयशा जी ने गोचरी की विधि, चरित्र आत्माओं से वार्तालाप कैसे करे, वंदन विधि के बारे में प्रश्नोत्तर शैली व एक्ट के माध्यम से बताया।
तेरापंथ कन्या मंडल, डोंबिवली की संयोजिका प्रेक्षा बड़ाला ने कार्यक्रम का कुशलता पूर्वक संचालन किया।
कन्या मंडल कार्यशाला: अध्यात्म का ज्ञान, विकास का सोपान

