नई दिल्ली:अपनी ड्यूटी के हालात को लेकर अमूमन चुप रहने वाले जवान मुखर हो रहे हैं। इसकी झलक सुरक्षा बलों में शिकायतों के निपटारे के लिए बनाए गए आंतरिक तंत्र में देखी जा सकती है। सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पहले जवानों की शिकायत केवल अपने स्थानांतरण तक सीमित रहती थीं। अब वे कामकाज के माहौल को लेकर भी लिखित शिकायतें दर्ज करा रहे हैं। कामकाज के माहौल में छुट्टी न मिलना, लगातार ड्यूटी, आवास का इंतजाम न होना, मेडिकल को लेकर दिक्कत आदि समस्याएं शामिल हैं।
सोशल मीडिया से जागरुकता
सीआईएसएफ, सीआरपीएफ जैसे संगठनों में वर्ष 2016 तक वर्किंग कंडीशन (कामकाजी माहौल) से जुड़ी शिकायतें नगण्य थीं। वर्ष 2017 और वर्ष 2018 के दौरान इसका ग्राफ बढ़ा है। इसकी एक बड़ी वजह सोशल मीडिया के जरिए जवानों का आपसी संपर्क और जागरुकता को बताया जा रहा है। सीआरपीएफ के एक अधिकारी ने कहा, ‘जवान स्मार्ट फोन के जरिए एक दूसरे के संपर्क में रहने लगे हैं। उन्हें कहीं पर ज्यादा सुविधाओं की जानकारी मिलती है तो वे अपने यूनिट में भी उसी तरह का सुधार चाहते हैं।’
खानपान को लेकर शिकायतें नगण्य
सुरक्षा बलों के लिए संतोष की बात यह है कि खानपान की गुणवत्ता को लेकर अभी भी जवानों की ओर से शिकायतों का स्तर नगण्य है। गौरतलब है कि जनवरी 2017 में बीएसएफ के एक जवान द्वारा खाने की गुणवत्ता को लेकर सोशल मीडिया के जरिए सवाल उठाया गया था। इसके बाद से सभी सुरक्षा बलों में शिकायतों के निपटारे के लिए मजबूत तंत्र बनाने की कवायद हुई है।
कुछ में तुरंत निदान असंभव
सूत्रों ने कहा कि कई मामलों में वास्तविक तौर पर शिकायतों का निपटारा किया जाता है, जबकि कुछ मामलों में शिकायत ऐसी होती है जिसका तुरंत निदान संभव नहीं होता। ऐसे में उसका उचित तरीके से जवाब देकर जवान को संतुष्ट करने का प्रयास किया जाता है। इसी तरह का रुझान अन्य सुरक्षा बलों में है।
सीआईएसएफ में 2017 में कुल शिकायतें 3219
मुद्दा शिकायतें प्रतिशत
स्थानांतरण 2754 करीब 85
प्रोन्नति 85 करीब 03
कामकाजी माहौल 380 करीब 12
कुल शिकायतें 3219 100
कामकाजी माहौल को लेकर मुखर हो रहे जवान, दर्ज करा रहे हैं शिकायतें

