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”जल ही जीवन, जल ही विकास: क्या मारवाड़ अपना भविष्य बदलने को तैयार है?”

Last updated: March 20, 2026 12:48 am
Surabhi Saloni
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3 Min Read
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पंच तत्वों से बने हमारे शरीर में पानी का हिस्सा सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है-मानव शरीर का लगभग 60–70% भाग जल होता है। क्या यह संयोग है कि जिस प्रकार शरीर का संतुलन पानी से बना रहता है, उसी प्रकार पूरी सृष्टि में भी लगभग 70% भाग जल ही है? जब प्रकृति और मानव दोनों ही जल पर आधारित हैं, तो क्या किसी भी क्षेत्र का विकास जल के बिना संभव है?
यदि हम शहरों को देखें-चाहे मुंबई हो, जोधपुर हो या पाली—इनकी बढ़ती आबादी और विकास का मूल कारण क्या है? क्या यह उनकी जल आपूर्ति और संचय व्यवस्था नहीं है? क्या इन शहरों में केवल दो दिन पानी की सप्लाई रुक जाए तो क्या हालात होंगे? क्या लोग वहां टिक पाएंगे, या मजबूर होकर पलायन करेंगे?
फिर सवाल यह उठता है कि हम मारवाड़ी समाज के लोग अपने घर, गांव और खेत छोड़कर सैकड़ों किलोमीटर दूर महानगरों में क्यों गए? क्या यह केवल रोजगार की तलाश थी, या इसके पीछे एक बड़ा कारण सिंचाई जल की कमी भी था? यदि मारवाड़ में पर्याप्त जल संचयन और वितरण व्यवस्था होती, तो क्या हमें अपना घर-आंगन छोड़ना पड़ता? शायद नहीं। तो क्या अब समय नहीं आ गया कि हम इस स्थिति को बदलने के लिए ठोस कदम उठाएं? यदि अरावली पर्वतमाला में जवाई बांध से भी बड़े पाँच पक्के बांध बनाए जाएं, तो क्या मारवाड़ की सूखी धरती फिर से हरियाली नहीं ओढ़ेगी? क्या खेतों में फिर से फसलें लहलहाने नहीं लगेंगी? क्या यह धरती फिर “सोना उगलने” वाली नहीं बन सकती?
और यदि ऐसा होता है, तो क्या उद्योगपति अपने कारखाने मारवाड़ में स्थापित करने नहीं आएंगे? क्या रोजगार के नए अवसर नहीं बनेंगे? क्या गांवों से शहरों की ओर पलायन रुक नहीं जाएगा? हम देश के अन्य राज्यों को देखें—चाहे पंजाब हो या महाराष्ट्र—वहां विकास की गति तेज क्यों है? क्या इसका मुख्य कारण मजबूत जल संचयन और सिंचाई व्यवस्था नहीं है? जब वहां बांधों ने किस्मत बदली, तो क्या मारवाड़ में यह संभव नहीं? इसी संदर्भ में कांकलावास बांध केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि पूरे मारवाड़ के भविष्य को बदलने का माध्यम बन सकता है। तो क्या हम इस परिवर्तन का हिस्सा बनेंगे? क्या हम केवल चर्चा करेंगे या एक कदम आगे बढ़ाकर योगदान देंगे? याद रखिए—“कांकलावास बांध निर्माण परियोजना – पब्लिक सिग्नेचर कैंपेन” में आपका एक हस्ताक्षर केवल समर्थन नहीं, बल्कि भविष्य निर्माण की नींव है। क्या आप एक सिग्नेचर देकर मारवाड़ की तकदीर बदलने में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करेंगे? क्योंकि – एक सिग्नेचर, एक ईंट… और लाखों ईंटें मिलकर बनता है भविष्य।

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