आमिर खान की फिल्म “सितारे ज़मीन पर” रिलीज हो चुकी और इस फिल्म में आमिर खान ने जिस परफेक्शन के साथ ज़मीन के सितारों की दुनिया से रूबरू कराया है, उससे एक बार फिर साबित होता है कि बॉलीवुड में कोई मिस्टर परफेक्शनिस्ट है तो वे आमिर खान ही हैं। फिल्म “सितारे ज़मीन पर” के जरिये आमिर ने कई इमोशनल और मानवीय पहलुओं पर भी प्रकाश डाला है, जो काबिले तरीफ है। आमिर खान प्रोडक्शन के बैनर तले बनी फिल्म “सितारे ज़मीन पर” में मुख्य भूमिका आमिर खान और जेनेलिया देशमुख की है जबकि डॉली अहलुवालिया, बिजेंद्र काला, दीपराज राणा, गुरुपाल सिंह, आरूष दत्ता, गोपी कृष्ण वर्मा, संवित देसाई, वेदांत शर्मा, आयुष भंसाली, आशीष पेंडसे, ऋषि शाहानी, ऋषभ जैन, नमन मिश्रा, सिमरन मंगेशकर आदि कलाकार अन्य भूमिकाओं में हैं। इसका निर्देशन आर.एस. प्रसन्ना ने किया है।
कहानी: फिल्म की शुरुआत बास्केट बॉल मैच के ग्राउंड से होती है। जिसमें गुलशन अरोरा (आमिर खान) जूनियर कोच होता है, जिसका स्वाभाव काफी गुस्सैल है, इसका कारण आपको फिल्म में देखने को मिलेगा। ग्राउंड पर गुलशन की टीम पर बार बार गोल होता है, जिससे वह झल्लता है, लेकिन कुछ कह नहीं पाता क्योंकि वह जूनियर कोच है। टीम की कमान सीनियर कोच (दीपराज राणा) संभाल रहे होते हैं। कुछ समय बाद गुलशन सीनियर कोच को कुछ बताना चाहता है, लेकिन वह नहीं सुनते झल्लाकर कहते हैं, टिंगू तू जूनियर है जूनियर की तरह ही रह। सीनियर कोच द्वारा टिंगू कहना गुलशन को इतना नागवार गुजरता है कि वह वहीं सीनियर कोच को थप्पड़ मार देता है। इस वजह से उसे वहां से सस्पेंड कर दिया जाता है। गुलशन एक जगह जाकर खूब शराब पीता है और नशे की हालत में ही कार चलाकर घर जाता है। रास्ते में पुलिस की गाडी में टक्कर मार देता जो और उनसे बहस भी कर लेता है, जिसकी वजह से उस पर एफआईआर हो जाती है। मामला कोर्ट में जाता है, जहां उसे जज 5000 रुपये का जुर्माना और मेंटली अनहेल्दी लोगों को बोस्केट बॉल सिखाने की सजा सुनाती है। और यहीं से शुरू होती है, ज़मीन के सितारों से मिलने की असली कहानी। इसे थियेटर जाकर देखें, पैसा वसूल होना तय है।
निर्देशन एवं अभिनय: फिल्म “सितारे ज़मीन पर” में आमिर खान की एक्टिंग हमेशा की तरह आउटस्टैंडिंग है। एक गुस्सैल व्यक्ति का किरदार उन्होंने बखूबी परदे पर उतारा है, जो फिल्म को बिल्कुल नेचुरली फील कराता है। आमिर की एक्टिंग फिल्म को अलग ही ऊंचाई पर ले जाता है। जेनेलिया देशमुख सुन्दर तो हैं ही फिल्म में उनकी भूमिका भी काबिले तारीफ है। जितना भी स्पेश उन्हें मिला है, उसे बेहतर ढंग से जीवंत किया है। गुरुपाल सिंह, बिजेंद्र काला और डॉली अहलुवालिया ने अपनी-अपनी भूमिकाओं को बड़ी शिद्दत से निभाया है। अब आते हैं, स्टूडेंट्स के रूप में फिल्म में उन कलाकारों की जिन पर फिल्म बनाई गयी है। उन्होंने तो फिल्म में जान डाल दी है। आरूष दत्ता, गोपी कृष्ण वर्मा, संवित देसाई, वेदांत शर्मा, आयुष भंसाली, आशीष पेंडसे, ऋषि शाहानी, ऋषभ जैन, नमन मिश्रा और सिमरन मंगेशकर सभी के काम एक से बढ़कर एक हैं।
अब अगर बात निर्देशन का करें तो आर.एस. प्रसन्ना के निर्देशन की तारीफ किये बिना नहीं रह सकते। हर एक फ्रेम को उन्होंने बड़ी ही बरीकी से कसा है, जो फिल्म को पूरी तरह से जीवंत बनाता है। आने वाले समय में “सितारे ज़मीन पर” उनके निर्देशन में बनी बेहतरीन फिल्मों में गिनी जायेगी, जिसमें आमिर खान के बाद अगर किसी को उसका श्रेय दिया जाएगा तो वह आर. एस. प्रसन्ना ही होंगे। दिव्य निधि का लेखन बिल्कुल कसा हुआ और बेहतरीन है।
म्यूजिक की बात करें तो शंकर एहसान लॉय ने इसे बनाया है, जो फिल्म के जॉनर के हिसाब से बढ़िया बन पड़ा है। कुल मिलाकर 158 मिनट की इस फिल्म में किसी भी एंगल से निराशा नहीं मिलेगी, थियेटर से निकलने के बाद तारीफ किये बिना नहीं रह पाएंगे।
सुरभि सलोनी की तरफ से फिल्म को 4 स्टार।
– दिनेश कुमार
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