दीपावली (27 अक्टूबर) पर दीपक जलाने की परंपरा पुराने समय से जली आ रही है। घी या तेल का दीपक जलाने से धार्मिक लाभ के साथ ही स्वास्थ्य लाभ भी मिलते हैं। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार दीपक जलाते समय कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो मनोकामनाएं जल्दी पूरी हो सकती हैं। जानिए दीपक से जुड़ी खास बातें…
दीपक जलाते समय इस मंत्र का जाप करना चाहिए-
मंत्र- शुभम करोति कल्याणं, आरोग्यं धन संपदाम्, शत्रु बुद्धि विनाशाय, दीपं ज्योति नमोस्तुते।।
- इस मंत्र का सरल अर्थ यह है कि शुभ और कल्याण करने वाली, आरोग्य और धन संपदा देने वाली, शत्रु बुद्धि का विनाश करने वाली दीपक की ज्योति को नमस्कार है।
- जिन घरों में रोज सुबह-शाम नियमित रूप से दीपक जलाया जाता है, वहां सकारात्मक ऊर्जा सक्रिय रहती है। दीपक के धुएं से वातावरण में मौजूद हानिकारक सूक्ष्म कीटाणु नष्ट हो जाते हैं। दीपक अंधकार और नकारात्मकता को मिटाकर प्रकाश फैलाता है, इसी वजह से घर में सुबह-शाम दीपक का प्रकाश फैलाना चाहिए। इससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बना रहता है।
- दीपावली पर शाम मुख्य द्वार के पास दीपक लगाना चाहिए। इस संबंध में मान्यता है कि दीपावली पर देवी लक्ष्मी अपने भक्तों के घर जाती हैं, उनके स्वागत के लिए हमें द्वार पर दीपक जलाना चाहिए।
- पूजा करते समय घी का दीपक अपने बाएं हाथ की ओर जलाना चाहिए। तेल का दीपक दाएं हाथ की ओर रखना चाहिए। ध्यान रखें कि पूजा के बीच में दीपक बुझना नहीं चाहिए। ऐसी व्यवस्था करें कि पूजा में दीपक न बुझे।
- दीपक देवी-देवताओं की प्रतिमा के ठीक सामने लगाना चाहिए। कभी-कभी भगवान की प्रतिमा के सामने दीपक न लगाकर इधर-उधर लगा दिया जाता है, जबकि यह सही नहीं है।
- घी के दीपक के लिए सफेद रुई की बत्ती उपयोग करना चाहिए। तेल के दीपक के लिए लाल धागे की बत्ती श्रेष्ठ होती है। पूजा में खंडित दीपक नहीं जलाना चाहिए।

