भुसावल। महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमण जी की विदुश्री सुशिष्या साध्वीश्री निर्वाणश्रीजी के शुभागम के साथ भुसावल में अध्यात्म की नई बहार आ गयी | प्रत्येक संस्था में मानो नवजीवन का संचार हुआ है | भगवान पार्श्व जन्म कल्याणक एवं ३१ दिसम्बर को दोनों वक्त विशेष कार्यक्रम हुए |
सुराणा साधना भवन में विशेष समारोह: पुरुषदानीय भगवान पार्श्व के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए विदुषी साध्वीश्री निर्वाणश्रीजी ने कहा – तीर्थंकर परंपरा में भगवान पार्श्व का नाम विशेष समादर के साथ लिया जाता है | तीर्थंकरो की जितनी स्तुतिया है उनमे सर्वाधिक स्तुतियों के नायक पार्श्व है, तीर्थ – धामों में भी वे अग्रणी है | राजकुल में जन्म लेने पर भी उन्होंने अध्यात्म की और प्रस्थान किया | पूर्वभव के द्वेषी कमठ ने उन्हें साधना से विचलित करने का अनथक प्रयास किया | पर मेरु की भांति अविचल रहे | हम उन्हें भावप्रणति समर्पित करते है|
साध्वी योगक्षेमप्रभा जी ने अपने सारगर्भित वक्तय्व में कहा – लोकश्रुति है की एक हाथ से ताली नहीं बजती, पर जब हम भगवान पार्श्व की भव परंपरा पर दृष्टिपात करते है की उनका सहोदर कमठ जहा एक और विद्वेष के कारण भव परंपरा को बढ़ता है, वह मरुभूति (पार्श्व का जीव) समता के शिखर की ओर बढ़ता रहा | विषय को विश्लेषित करते हुए साध्वीश्री ने अनेक भवो की संक्षिप्त चर्चा की। साध्वीवृन्द ने समवेत स्वरों में नवग्रहस्तुति प्रस्तुत की। कार्यक्रम का शुभारंभ पार्श्व स्तुति से हुआ।
विराट धम्म जागरण: तेरापंथ भवन में विशाल सभागार में भक्तिधारा में निम्मज्जित श्रोताओ को सम्बोधित करते हुए साध्वीश्री निर्वाणश्रीजी ने कहा – भूसवालवासिओ के मुख पर आज विशेष प्रसन्नता है। वे भक्तिरस सराबोर हो श्रेष्ठ सांगायको के साथ सहसंगान का आनंद ले रहे है।
भक्ति संध्या में सांगायको ने अपनी प्रतिभा का जो परिचय दिया है वह काबिलेतारीफ है। व्यवस्थाओ की दॄष्टि से सभा ने पूरी सक्रियता दिखाई। इस सर्द रात्रि में जमकर के बैठे हुए श्रद्धालु श्रोता साधुवाद के पात्र है।
चेन्नई समागत संगायक नवीन बोहरा, साक्री के भूषन कांकरिया, जालना के दीपक संचेती ने अपने सुरो से और भावो से जो समां बांधा है उसके वर्धापन के लिए श्रोताओ की ओरसे बार बार once more , once more और ॐ अहम की ध्वनि होती रही। स्तुतिपरके और औपदेशिक दोनों प्रकार के गीतों ने श्रोताओ को संमोहित किया। इस बार संध्या में सामूहिक रूप में गीतों की प्रस्तुति का अवर स्थानीय युवती मंडल, कन्या मंडल एवं जलगाव भजन मंडली को मिला । सबकी प्रस्तुति सराहनीय रही। गीतों भरी शाम का शुभारंभ बालमंडली द्वारा समुच्चारित स्तुति से हुआ। कार्यक्रम का संचालन प्रबुद्ध साध्वीश्री योगक्षेमप्रभा जी ने कुशलतापूर्वक किया।

