घाटकोपर तेरापंथ भवन में उपासक संगोष्ठी का हुआ आयोजन

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मुंबई: रविवार को उपासक प्रकोष्ठ मुम्बई द्वारा उपासक संगोष्ठी का आयोजन श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा मुम्बई के तत्वावधान में एवं निवर्तमान राष्ट्रीय संयोजक उपासक प्राध्यापक डालिमचंद नौलखा और नव मनोनीत उपासक श्रेणी राष्ट्रीय संयोजक सूर्य प्रकाश शामसुखा के निर्देशन में आयोजित हुई। इस संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य उपासकों बेहतर ट्रेनिंग देना था। इस आयोजन में विशेष तौर पर विश्व भर में महामारी घोषित हो चुका कोरोना वायरस को लेकर जागरूकता फैलाई गई। इस आयोजन में शामिल सभी लोगों को मास्क दिया गया साथ ही कार्यक्रम में शामिल होने से पहले सेनिटाइजर से हाथ साफ कराया गया।
निवर्तमान राष्ट्रीय संयोजक उपासक प्राध्यापक डालिमचंद नौलखा ने कहा हम सभी आत्मा के उपासक है जब अपनी आत्मा के उपासक बनेंगे तभी हम धर्म संघ के उपासक बनेंगे। हमारे अंदर यह भावना आना जरूरी है कि हम अपने आत्मा के उपासक हैं। नव मनोनीत उपासक श्रेणी राष्ट्रीय संयोजक सूर्य प्रकाश शामसुखा ने उपासकों का ज्ञानवर्धन एवं मार्गदर्शन अपने ओजस्वी वाणी के माध्यम से कहा कि हमारे अंदर साधना का विकास होना चाहिए ना कि सिर्फ पर्युषण पर्व के नव दिन के लिए हम उपासक बने।
जिस तरह से भौतिक संपत्ति बढ़ाने के लिए कार्य करते हैं उसी तरह आध्यात्मिक संपत्ति भी बढ़ाए। महासभा राष्ट्रीय महामंत्री रमेश सुतरिया ने कहा की उपासक श्रेणी बाकी सभी संस्थाओं से उच्च स्थान मेरे ह्रदय में रखती हैं क्योंकि महासभा के अंतर्गत आने वाली ज्ञानशाला के बाद उपासक श्रेणी ही है जो संतों के बाद श्रावकों का मार्गदशन करता हैं। धर्म संघ की बात जन जन तक पहुचाते हैं। मुम्बई सभा अध्यक्ष नरेंद्र तातेड़ ने कहा कि गुरुदेव की कृपा से श्रमण श्रेणी के बाद उपासक श्रेणी आती है जो अपने आप श्रेष्ठ हैं। मैं यही मंगल कामना करता हूँ कि इसी तरह शीर्ष की ओर उपासक श्रेणी बढ़ती रहे। अणुव्रत समिति मुम्बई अध्यक्ष रमेश चौधरी ने अपने विचार रखें।
इस अवसर पर विशेष तौर पर मुम्बई सभा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष नवरत्न गन्ना, बाबुलाल बाफना, मंत्री विजय पटवारी, मुम्बई सभा उपाध्यक्ष सुरेश राठौड़, मुम्बई महिला मंडल अध्यक्षा भाग्यश्री कच्छारा आदि की उपस्थिति रही। कार्यक्रम में मंच का कुशलतापूर्वक संचालन सोहनलाल कोठारी ने किया। वही संगोष्ठी में मुम्बई के हर कोने से भारी संख्या में उपासक एवं उपसिकाओं की उपस्थिति रही।

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