संतुलन व सामंजस्य के द्वारा सफलता का वरण किया जा सकता है – साध्वी अणिमाश्रीजी

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ठाणे। साध्वी श्री अणिमाश्रीजी एवं साध्वी श्री मंगलप्रज्ञाजी ठाणा 6 गुरुदर्शन की तीव्र ललक के साथ द्रुतगति से विहार कर रही है। ठाणा, पूना, चिंचवड़, पिंपरी, निगड़ी के युवा अच्छी संख्या में विहार में संभागी बनकर श्रद्धा, भक्ति का परिचय दे रहे है। उत्साही युवकों की टोली जयकारों के साथ धरा-अम्बर को गुंजायमान करती हुई जिनशाशन, तेरापंथ व आचार्य महाश्रमण की यशोगाथा का गान करते हुए आगे बढ़ रही थी।
साध्वी अणिमाश्रीजी ने अपने मंगल उद्बोधन में कहा व्यक्ति जीवन के हर क्षेत्र में सफल होना चाहता है किन्तु जब तक चाह के अनुरूप राह नही मिलेगी, तब तक सपना सच मे नही बदल सकता। जो व्यक्ति जीवन के हर मोड़ में हर परिस्थिति एवं हर घटना में अपना संतुलन बनाये रख सकता है, उसे दुनिया की कोई ताकत विफल नही बना सकती। व्यक्ति के सामने अनुकूल एवं प्रतिकूल दोनों तरह की परिस्तिथियां है, एवं अच्छे बुरे लोग भी है, न तो परिस्थितियों को बदल जा सकता है न लोगों को। सबके साथ संतुलन व सामंजस्य बिठाने से जीवन मे सफलता व आनंद का वरण किया जा सकता है।
साध्वी मंगलप्रज्ञाजी ने मंगल पाथेय प्रदान किया। साध्वी कर्णिकाश्रीजी, साध्वी सुधाप्रभाजी, साध्वी समत्वयशाजी, साध्वी मैत्रीप्रभाजी ने प्रभु स्तवन के द्वारा प्रभु भक्ति में लीन किया। ठाणा सभा के मंत्री जितेंद्र बरलोटा, महिला मंडल संयोजिका सिमा सांखला ,युवा तेयुप अध्यक्ष विकास जैन ने विचार रखे। ठाणा सभाध्यक्ष देवीलाल श्रीश्रीमाल, विनोद कोठारी, रमेश राठौड़, सुरेश मेहता, भारत मेहता, जय,सौरभ, अनिता मेहता अमराव सेठिया, आनंदजी भंसाली, जयंती भंसाली, पिस्ता चौरड़िया, हरीश जैन, सुमिर, विकास, जितेंद्र बरलोटा, अमित, गिरीश, महेश, माणकचन्द, प्रदीप धोका आदि-अनेक भाई बहन यात्रा में सहभागी बने।

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