ज्ञानशाला नर्सरी में बच्चें रूपी बीज बनते वटवृक्ष : मुनि श्री ज्ञानेन्द्रकुमार

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तेरापंथ सभा द्वारा ज्ञानशाला दिवस एवं सामूहिक एकासन अनुष्ठान का हुआ आयोजन

साहूकारपेट, चैन्नई। आचार्य श्री महाश्रमणजी के सुशिष्य मुनि ज्ञानेन्द्र कुमार एवं मुनि रमेश कुमार के सान्निध्य में तेरापंथ सभा चैन्नई द्वारा ज्ञानशाला दिवस एवं बारह सौ पचास सामूहिक एकासन अनुष्ठान का आयोजन जैन तेरापंथ विद्यालय, साहूकारपेट में आयोजित हुआ।
ज्ञानशाला दिवस पर जनमेदनी को संबोधित करते हुए मुनि ज्ञानेन्द्रकुमार ने कहा कि ज्ञानशाला वह नर्सरी हैं जहां बच्चों में एक बीज की तरह देख भाल कर उसे उस योग्य बना लिया जाता है कि वह बाह्यय वातावरणों से अपने आप को सुरक्षित रख, आगे बढ़ एक वटवृक्ष के रूप में विकसित हो सकता हैं| ज्ञानशाला से संस्कारित बालक जीवन संग्राम में लडकर विजयी हो सकता है। ज्ञानशाला के ज्ञानार्थी आने वाले जीवन के खतरों का भी सहजता से मुकाबला कर उससे पार पा सकते हैं। संस्कार निर्माण में पहला योग माता-पिता का होता है।  संस्कार निर्माण में दूसरा योग प्रशिक्षिकाओं का होता है जो स्वयं पहले पढाई करती हैं, फिर पढाती है, नित्य नवीन चिन्तन से बच्चों को संस्कारी बनाने का प्रयास करती है।
मुनि श्री ने विशेष पाथेय देते हुए कहा कि संस्कार निर्माण ज्ञानशाला से ही संभव है। बच्चों का मन चंचल होता हैं, वे आकर्षण देखते हैं। अत: ज्ञानशाला में आकर्षण के साथ बच्चों में संस्कार देने से वे भविष्य में आने वाली विषम परिस्थितियों में भी सम रहते हुए, अपने संस्कारों को जीवित रखते हुए नवीन पथ पर अग्रसर हो सकते हैं| मुनि श्री ने ज्ञानशाला के साथ जुड़े हुए कार्यकर्ताओं, संस्थाओं को साधुवाद देते हुए युग परिवर्तन के साथ बाल पीढ़ी के नवनिर्माण के लिए श्रमशील बने रहने की प्रेरणा दी।
संस्कारों का महत्व बताते हुए  मुनि रमेश कुमार ने कहा – संस्कारों से संस्कृति बहाल होती है। संस्कृति सुरक्षित तब तक ही रहती जब तक संस्कार जीवित रहते हैं। जो इंसान अच्छे संस्कार और अच्छे विचार को पकड़ लेता हैं, उसे फिर हाथ में माला पकड़ने की जरुरत नहीं रहती। ज्ञानशाला संस्कार निर्माण की कार्यशाला है। बालक के मन में दिव्य गुणों का विकास होता है। मन, बुद्धि और भावना विकसित होती है।
मुनि श्री ने आगे कहा कि जीवन की विशुद्धियों का परिशोधन, परिमार्जन कर नवनिर्माण करना संस्कार हैं। जैसे दुध को जमाया दही बन गया, दही को मथा तो मक्खन बना और मक्खन का परिमार्जन किया तो नवनीत प्राप्त हो गया। वो माता पिता धन्य हैं जो अपने बच्चों को ज्ञानशाला में नियमित भेजते है। ज्ञानशाला की प्रशिक्षिकाएँ भी कर्म निर्जरा का महान कार्य कर बच्चों का नवनिर्माण करती हैं। यही ज्ञानशाला के ज्ञानार्थी आगे बढ़ कर अच्छे समाज सेवी, अच्छे कार्यकर्ता और आगे बढ़े तो उनमें से त्यागी तपस्वी एवं साधु भी बन सकते हैं।
मुनि श्री ने आगे कहा भौतिक विकास के साथ विज्ञान के इस युग में बच्चों में सत् संस्कार अत्यन्त जरूरी है, अत: अभिभावकों को अपने बच्चों के नवनिर्माण के लिए ज्ञानशाला जरूर भेजना चाहिए। जीवन के प्रारम्भ काल में ध्यान देने पर बच्चे देव तुल्य भी बन सकते हैं। समाज को भी बाल, किशोर, युवा पीढ़ी के सशक्त निर्माण के लिए प्रशंसनीय प्रयास करने चाहिए।
इससे पूर्व मुनि श्री ज्ञानेन्द्रकुमारजी के महामंत्रोच्चारण से समारोह शुभारंभ हुआ। ज्ञानार्थी काव्या बांठिया ने मंगलाचरण किया। तेरापंथ सभा अध्यक्ष श्री विमल चिप्पड़ ने समाज की ओर से ज्ञानशाला दिवस पर बधाई देते हुए प्रशिक्षिकाओं, ज्ञानार्थियों एवं सामूहिक एकासन अनुष्ठान में सहभागी भाई- बहनों का भावभरा स्वागत किया। ज्ञानशाला संयोजक श्री सुरेशचन्द बोहरा ने ज्ञानशाला का महत्व बताते हुए समाज के बच्चों को अधिक से अधिक ज्ञानशाला में आने के लिए प्रेरित किया।
वर्तमान युगीन परिस्थिति के परिप्रेक्ष्य में जन समाज को विशेष प्रेरणा देती हुई लघु नाटिका “जल है तो कल हैं”, पानी बचाओ इस विषय पर वेस्ट ज़ोन की पांच ज्ञानशालाओं की संयुक्त प्रस्तुति से पुरे जनमानस को आन्दोलित कर दिया। सभी ने ऊँ अर्हम् की ध्वनि से प्रस्तुति की सराहना करते हुए पानी बचाने का मानसिक संकल्प लिया।
आचार्य श्री महाप्रज्ञजी की जन्म शताब्दी पर ज्ञानशाला ज्ञानार्थीयों द्वारा अभ्यर्थना में ट्रिप्लीकेन ज्ञानशाला द्वारा संस्कारों का महत्व विषय पर और नार्थ जोन की संयुक्त पांच ज्ञानशाला ने महाप्रज्ञ के अवदानों की आकर्षक परिसंवाद से प्रस्तुति दी। ज्ञानशाला प्रशिक्षिकाओं ने आचार्य भिक्षु पर शानदार प्रस्तुति दी। चेन्नई की इक्कीस ज्ञानशालाओं के सैकड़ों बच्चों, 85 से अधिक प्रशिक्षिकाओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। तेरापंथ महिला मंडल की अध्यक्षा श्रीमती शांति दुधोडिया, सभा संगठन मंत्री श्री विनोद डागा, तेरापंथ युवक परिषद् के उपाध्यक्ष श्री गजेन्द्र खाटेड़ ने प्रासंगिक विचार व्यक्त किये।
आचार्य श्री महाप्रज्ञ जन्म शताब्दी वर्ष पर तेरापंथ सभा की ओर से आज 1250 लगभग सामूहिक  एकासन अनुष्ठान भी कराया गया। इसके संयोजक श्री सम्पतमल चौरडिया को तेरापंथ सभा की ओर से प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।ज्ञानशाला दिवस कार्यक्रम का सफल संचालन प्रशिक्षका श्रीमती अक्षिता संचेती और धन्यवाद ज्ञापन श्री नरेन्द्र भंडारी ने किया।

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