दूरदर्शी होने से मिलती है सफलता

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ऐसे कई लोग हमारे आसपास होते हैं, जो काम की शुरुआत करने के साथ उसका अंजाम जान लेते हैं। ऐसे लोगों को कई बार अपने आसपास वालों के हास्य, नाराजगी या जली-कटी बातों का शिकार होना पड़ता है। मगर हकीकत में यह लोग दूरदर्शी होते हैं, जो शुरू होने वाले काम की रफ्तार और उसकी प्रकृति के आधार पर उसका अंजाम समझ लेते हैं। ऐसी ही बात हमारी आज की कहानी में भी कही गई है।

एक बूढ़ा इंसान सुनार के पास आया। उसने सुनार से तराजू मांगा और कहा कि उसे कुछ सोना तोलना है। सुनार ने जवाब दिया, दफा हो जाओ। मेरे पास छलनी नहीं है। उस व्यक्ति ने कहा, मजाक मत करो, मैं छलनी नहीं, तराजू मांग रहा हूं। सुनार ने जवाब दिया, भाग जाओ मेरे पास झाड़ू नहीं है। वह आदमी गुस्से में आ गया। उसने कहा, ‘मैं तुमसे तराजू मांग रहा हूं और तुम छलनी, झाड़ू क्या-क्या बक रहे हो। बहरे होने का नाटक मत करो।

इतना सुनने के बाद सुनार ने उससे कहा, देखिए महाशय न मैं बहरा हूं, न मैं बक रहा हूं। सच यह है कि आप की उम्र हो चुकी है। आप खुद कांप रहे हैं, हाथ कांप रहे हैं, शरीर सीधा नहीं है। इसके अलावा आपके पास सोने का कोई बड़ा टुकड़ा नहीं है, बल्कि सोने के कण हैं। आप तराजू में तोलने की कोशिश करेंगे तो आपके कांपते हुए हाथों से सोने के कण फिसलकर गिर जाएंगे। फिर आप कहेंगे, सुनार मुझे एक झाड़ू दो ताकि मैं धूल में सोने के कण ढूंढ निकालूं। जब आप झाड़ू लगाएंगे तो सोने के कण के साथ धूल भी आ जाएगी। फिर आप कहेंगे, सुनार भाई, छलनी दो। शुरू से ही मैंने पूरा अंत देख लिया। इसलिए यहां से निकलो कहीं और जाओ।

किसी भी कार्य की शुरुआत करते ही उसका अंजाम देखने की कोशिश करनी चाहिए, ताकि मंजिल पर पहुंचकर पछतावा न हो। आप सोच रहे होंगे कि ऐसा कैसे संभव है कि अंजाम पहले ही देखा जाए। हां, ये संभव है क्योंकि किसी भी कार्य का अंत आपका लक्ष्य या आपकी मंजिल होता है और अगर आप उसे शुरुआत में नहीं देख पा रहे हैं, तो मुमकिन ही नहीं है कि आप कभी अपने लक्ष्य को प्राप्त कर पाएंगे। अगर आप शुरुआत में ही अंत देखकर कार्य करते हैं, तो इसका मतलब साफ है कि आपके पास लक्ष्य है, जिसे आप पाना चाहते हैं।

इस कहानी से हमें सीख मिलती है :
अगर आप शुरुआत में ही अपने काम का अंजाम देख लेते हैं, तो इसका मतलब साफ है कि आपके पास लक्ष्य है।

अगर वाकई आप जिंदगी में कुछ करना चाहते है तो आज ही अपने लक्ष्य को कागज पर लिख कर देखें। हो सकता है आप अपने विचारों को शब्द न दे पाएं, तब आपको यह अहसास होगा कि असल में आपके पास कोई लक्ष्य है ही नहीं।

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