भारत ने आतंकवाद पर पाकिस्तान को गिनाए उसके 5 बड़े झूठ

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नई दिल्ली:भारत ने पाकिस्तान के पीएम इमरान खान के उस बयान पर हमला बोला है, जिसमें उन्होंने कहा था कि वह भारत ने दोनों देशों के बीच संबंधों को ब्लॉक कर दिया है। भारत सरकार ने पाकिस्तान के पीएम पर हमला करते हुए कहा है कि इस्लामाबाद ने बातचीत के लिए अनुकूल माहौल बनाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है। नई दिल्ली ने साथ ही पाकिस्तान को उसके आतंकवाद पर बोले जा रहे झूठ पर भी घेरा।

शीर्ष आधिकारिक सूत्रों ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि इस्लामाबाद ने दावा किया था कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है, बावजूद इसके इस मोर्चे पर आंदोलन का कोई संकेत नहीं था। उन्होंने जोर देकर कहा कि इसके विपरीत खान (इमरान) के रहते पाकिस्तान की कार्रवाइयों से पता चलता है कि इस्लामाबाद न केवल आतंकवादियों को समर्थन प्रदान कर रहा था, बल्कि आतंकवादी समूहों को मुख्यधारा में लाने की कोशिश कर रहा था।
 भारत सरकार ने उन 5 पॉइंट को भी बताए, जिससे साबित होता है कि पाकिस्तान आतंकवाद को रोकना नहीं चाहता है…

पहला: पाकिस्तान के गृह राज्य मंत्री शहीर अफरीदी ने 16-17 दिसंबर, 2018 को इस्लामाबाद में जेयूडी नेता और संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्जित आतंकवादी हाफिज सईद के प्रतिनिधियों से मुलाकात की और कहा कि सईद और उसके संगठन को पाकिस्तान सरकार का ‘खुला समर्थन’ मिला है। रिपोर्ट के अनुसार, मंत्री ने यह भी कहा कि कोई भी सईद को तब तक निशाना बनाने वाला नहीं था जब तक पीटीआई पार्टी सत्ता में है।

दूसरा: दूसरा, जेयूडी ने नवंबर, 2018 में पीओके (POK) में बचाव केंद्र खोले, जिनका उद्घाटन एक स्थानीय पीटीआई नेता ने किया था। भारतीय अधिकारियों के अनुसार, यह जेयूडी के लिए खुला समर्थन दिखाता है जो UNSC प्रतिबंध सूची में है।

तीसरा: जेयूडी और उसके एनजीओ फलाह-ए-इन्सानियत फाउंडेशन (FIF) प्रतिबंधित संगठनों की सूची से तब बाहर हो गया जब राष्ट्रपति पद के उस अध्यादेश की समय सीमा खत्म हो गई, जिसमें उन्हें प्रतिबंधित संगठनों में शुमार किया गया था। यह बात उस समय साबित हुई जब पाकिस्तान की सरकार ने इस्लामाबाद उच्च न्यायालय में यह माना कि अध्यादेश खत्म हो गया है और इसे न तो बढ़ाया गया और न ही कानून का रूप देने के लिए सरकार की ओर से इसे संसद में पेश किया गया। सईद ने अदालत में जेयूडी और एफआईएफ पर प्रतिबंध लगाने वाले अध्यादेश को चुनौती दी थी।

चौथा: प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के नेता और यूनाइटेड जेहाद काउंसिल (यूजेसी) के अध्यक्ष सईद सलाहुद्दीन ने अक्टूबर, 2018 में जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकवादियों के लिए पाकिस्तान से सैन्य समर्थन मांगा। यह मुजफ्फराबाद में UJC द्वारा जैश-ए-मोहम्मद के मोहम्मद असगर, हिज्ब-ए-इस्लामी के मसूद आमिर और लश्कर के डॉ. मंजूर की मौजूदगी में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में हुआ था।

पांचवां: पाकिस्तान के धार्मिक मंत्री नूर-उल-हक कादरी ने 30 सितंबर, 2018 को सईद के साथ एक सार्वजनिक मंच साझा किया, जहां दोनों ने भारत विरोधी बयान दिए। कादरी के हवाले से कहा गया कि उन्होंने खान के निर्देश पर दफ्तर-ए-पाकिस्तान काउंसिल द्वारा सम्मेलन में भाग लिया। उल्लेखनीय है कि खान ने इस साल नवंबर में भारतीय पत्रकारों के एक समूह से कहा था कि पाकिस्तान अपनी धरती का इस्तेमाल बाहर आतंकवाद के लिए नहीं होने देगा। हालांकि, भारत सरकार के अनुसार, पाकिस्तान द्वारा उठाए गए कदम केवल दिखावा थे।

इस मामले से परिचित एक अधिकारी की मानें तो पाकिस्तान में JuD और FIF को प्रतिबंधित नहीं किया गया है। वे केवल आंतरिक मंत्रालय की NACTA (राष्ट्रीय काउंटर टेररिज्म अथॉरिटी) की वॉच लिस्ट में हैं। वे कानूनी रूप से अपनी तथाकथित कल्याणकारी गतिविधियों को जारी रख सकते हैं, जिसका वे भारत-विरोधी गतिविधियों के लिए भारत-पाक बॉर्डर के आसपास उपयोग करते हैं।

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