केंद्र सरकार ने दी कृषि निर्यात नीति को मंजूरी

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नई दिल्ली: कृषि क्षेत्र का निर्यात साल 2022 तक दोगुना कर 60 अरब डॉलर पर पहुंचाने के लक्ष्य को सामने रखते हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कृषि निर्यात नीति को मंजूरी दे दी है। गुरुवार को वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने मंत्रिमंडल के निर्णय की जानकारी देते हुए बताया कि कृषि निर्यात नीति का मकसद क्षेत्र से चाय, कॉफी, चावल तथा अन्य चीजों के निर्यात को बढ़ावा देना है। इससे वैश्विक कृषि व्यापार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद मिलेगी।
मंत्रिमंडल की बैठक के बाद पत्रकारों को जानकारी देते हुए प्रभु ने कहा, ‘कृषि निर्यात नीति का लक्ष्य वर्ष 2022 तक देश का कृषि निर्यात दोगुना कर 60 अरब डॉलर तक पहुंचाना है।’ इस नीति में कृषि निर्यात से जुड़े सभी पहलुओं पर गौर किया गया है। इसमें ढांचागत सुविधाओं का आधुनिकीकरण, उत्पादों का मानकीकरण, नियमन को बेहतर बनाना, बिना सोचे फैसलों पर अंकुश और शोध एवं विकास गतिविधियों पर ध्यान दिया गया है।
वाणिज्य मंत्री ने कहा कि नीति में जैविक उत्पादों के निर्यात पर लगे सभी तरह के प्रतिबंधों को हटाने पर भी जोर दिया गया है। एक अधिकारी के मुताबिक इस नीति के क्रियान्वयन से करीब 1,400 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रभाव होगा।
कैबिनेट के दूसरे फैसले
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया कि सीसीईए ने आरईसी में सरकार की 52.63 प्रतिशत हिस्सेदारी, प्रबंधन नियंत्रण के हस्तांतरण के साथ पीएफसी को बेचने को मंजूरी दी है। कैबिनेट ने नैशनल पेंशन स्कीम में बदलाव को भी मंजूरी दे दी है। स्कीम में पुरानी सुविधाएं शामिल होंगी। इसके साथ ही कैबिनेट ने जलियांवाला बाग नैशनल मेमोरियल ऐक्ट 1951 में संशोधन को भी मंजूर कर लिया है।
केंद्रीय कैबिनेट ने नैशनल मिशन ऑन इंटरडिसिप्लनरी साइबर-फिजिकल सिस्टम्स के तहत 15 टेक्नॉलजी इनोवेशन हब्स, 6 ऐप्लिकेशन इनोवेशन हब्स और 4 टेक्नॉलजी ट्रांसलेशन रिसर्च हब्स स्थापित करने का फैसला किया है।

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