दुःख मुक्ति का मार्ग है अहिंसा : शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमण

  • शीतलहर के मध्य महातपस्वी महाश्रमण ने किया लगभग 14 कि.मी. का विहार
  • आचार्यश्री ने रिछोली की जनता को सद्भावना, नैतिकता और नशामुक्ति का कराया संकल्प
  • सान्ध्यकालीन विहार: 4 कि.मी. का विहार कर आचार्यश्री पहुंचे पाटोदी

13.01.2023, शुक्रवार, रिछोली, बाड़मेर (राजस्थान)। पदयात्रा द्वारा गांव-गांव, शहर-शहर में जाकर सद्भावना, नैतिकता और नशामुक्ति का संदेश देने वाले तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने शुक्रवार को प्रातः पचपदरा से मंगल प्रस्थान किया। आचार्यप्रवर का धवल सेना सहित एकदिवसीय प्रवास पचपदरावासियों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं था। एक ओर जहां विविध कार्यक्रमों के द्वारा लोगों को आचार्यश्री की सेवा-उपासना का लाभ मिला, वहीं पचपदरा की बेटियों के संगम में देश-विदेश से पहुंची लगभग एक हजार बेटियों को भी आचार्यश्री की सन्निधि में पावन आशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर मिला।
सुबह आसमान में छाया हल्का कुहासा एवं तेज शीतलहर आमजन को ठिठुरने पर मजबूर कर रही थी, वहीं जनकल्याण के लिए प्रतिबद्ध युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण गंतव्य की ओर प्रस्थित हो गए। मार्ग में अनेक स्थानों पर ग्रामीणों ने आचार्यश्री के दर्शन कर पावन आशीर्वाद प्राप्त किया। लगभग 13.5 किलोमीटर का कर आचार्यश्री रिछोली गांव के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में पधारे। जहां रिछोली के गांव के सरपंच, विद्यालय के प्रिंसिपल आदि ने आचार्यश्री का भावभीना अभिनंदन किया।
समुपस्थित ग्राम्यजनता को युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में पाप कार्यों से बचने का प्रयास करना चाहिए। पाप के अनेक भेद हो सकते हैं। मुख्य रूप से हिंसा, झूठ और चोरी से बचने का प्रयास हो। हिंसा को दुःखों का द्वार कहा गया है। जहां हिंसा होती है, वहां अशांति और जहां अहिंसा होती है, वहां शांति होती है। दुःखों से छुटकारा पाने के लिए आवश्यक है व्यक्ति अपने जीवन में अहिंसा को अपनाए। अहिंसा शांति की ओर ले जाने वाली होती है। साधु तो सर्वप्रकार की हिंसा से दूर होते हैं। जितना हो सके, गृहस्थ को इन पापों से बचने का प्रयास करना चाहिए। गृहस्थ जीवन में खेती, रसोई के रूप में आरम्भजा हिंसा और सुरक्षा आदि की दृष्टि से प्रतिरक्षात्मिकी हिंसा करनी हो सकती है होगी, किन्तु आदमी को लोभ अथवा क्रोध के कारण संकल्पपूर्वक हिंसा से बचने का प्रयास करना चाहिए।
आचार्यश्री ने आगे कहा कि झूठ बोलना और चोरी करना भी बहुत बड़ा पाप होता है। सत्य से बढ़कर कोई तप नहीं और झूठ से बड़ा कोई पाप नहीं होता। व्यक्ति अपने जीवन में ईमानदारी और नैतिकता को अपनाने का प्रयास करे।
आचार्यश्री के आह्वान पर समुपस्थित ग्रामीण जनता व विद्यालय के छात्रों ने सद्भावना, नैतिकता और नशामुक्ति के संकल्पों को स्वीकार किया। आचार्यश्री के स्वागत में रिछोली के सरपंच श्री बगरू खान ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी।
जनकल्याण के लिए आचार्यश्री ने रिछोली से सान्ध्यकालीन विहार किया। लगभग चार किलोमीटर का विहार कर आचार्यश्री पाटोदी गांव स्थित मेहता हिन्दूमल बच्छराज राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में पधारे। जहां स्थानीय जनता आदि ने आचार्यश्री का भावभीना अभिनंदन किया। आचार्यश्री का रात्रिकालीन प्रवास इसी विद्यालय में हुआ।

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