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अमेरिकी सैन्य बेसों पर हमले के बाद ईरान ने कहा- शांति के लिए भारत पहल करे तो उसका स्वागत है

Last updated: January 8, 2020 4:11 pm
Surabhi Saloni
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8 Min Read
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बगदाद: ईरान ने जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या का बदला लेने के लिए बुधवार सुबह इराक स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला किया। बताया गया है कि ईरान ने इराक के अनबर प्रांत में स्थित ऐन अल-असद बेस और इरबिल में एक ग्रीन जोन (अमेरिकी सैन्य ठिकानों) पर 22 बैलिस्टिक मिसाइल दागीं। ईरानी मीडिया ने दावा किया है कि इन हमलों में 80 ‘अमेरिकी आतंकी’ मारे गए। हाल ही में ईरान ने अमेरिका की सभी सेनाओं को आतंकी घोषित कर दिया है। इन सबके बीच भारत में ईरान के राजदूत अली चेगेनी ने कहा है कि हम युद्ध नहीं चाहते। हम क्षेत्र में सभी के लिए शांति और समृद्धि चाहते हैं। ऐसे में भारत अगर ईरान और अमेरिका के बीच शांति की पहल करता है, तो हम उसका स्वागत करते हैं।

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई ने बुधवार को कहा कि इराक में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला उनके लिए करारा तमाचा है। अमेरिकी सेना को पश्चिम एशिया क्षेत्र को छोड़ना होगा। ईरान स्टेट टीवी ने रेवॉल्यूशनरी गार्ड्स के हवाले से दावा किया कि हमले में अमेरिकी हथियारों और हेलिकॉप्टरों को नुकसान पहुंचा है। ईरान के निशाने पर अभी 100 अमेरिकी ठिकाने और हैं। अगर अमेरिका ने पलटवार की कोशिश की, तो वह इन ठिकानों पर हमला करेगा।

विदेश मंत्री जयशंकर ने की थी ईरान-अमेरिका से बात

हाल ही में विदेश मंत्री जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री जावेद जरीफ और अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो से फोन पर बात की थी। उन्होंने दोनों से संयम बरतने की अपील भी की थी। उन्होंने कहा था कि दोनों देशों के विवाद से हम भी चिंता में हैं। दोनों नेताओं ने हमसे संपर्क में रहने की बात कही थी।

डेनमार्क, नॉर्वे, ऑस्ट्रेलिया और इराक ने जवानों की मौत से इनकार किया
इराकी सेना ने कहा कि ईरान ने दोनों बेसों पर कुल 22 मिसाइलें दागी थीं। इनमें ऐन अल-असद बेस पर गिरी दो मिसाइलों में धमाका नहीं हुआ। नॉर्वे ने कहा है कि अल-असद बेस पर तैनात उसके 70 सैनिकों में से कोई हताहत नहीं हुआ। डेनमार्क ने भी कहा है कि उसके 130 जवानों में से किसी के मारे जाने या घायल होने की खबर नहीं है।

ट्रम्प ने कहा था- ‘ऑल इज वेल’

हमलों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ट्वीट कर कहा था, “अभी सब ठीक है। ईरान ने इराक स्थित दो मिलिट्री बेस पर मिसाइल लॉन्च कीं। नुकसान और मौतों का जायजा लिया जा रहा है। अब तक सब ठीक है। हमारे पास दुनिया की सबसे ताकतवर सेना है। मैं कल सुबह इस मामले पर बयान जारी करुंगा।”

ईरान ने अमेरिका के साथियों को भी धमकी दी

ईरान की सरकारी मीडिया के मुताबिक, यह हमले जनरल सुलेमानी की हत्या का बदला लेने के लिए किए जा रहे हैं। ईरान के रेवॉल्यूशनरी गार्ड्स ने बयान जारी कर कहा, “हम अमेरिका के सभी साथियों को चेतावनी देते हैं कि वे एक आतंकी सेना को अपने बेस इस्तेमाल न करने दे। अगर उनके किसी भी क्षेत्र को ईरान के खिलाफ हमले में इस्तेमाल किया गया, तो उसे निशाना बनाया जाएगा।” ईरान ने धमकी दी है कि अगर अमेरिका इन हमलों का जवाब देता है, तो उसकी हिज्बुल्ला सेना इजराइल पर रॉकेट दागेगी।

ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी ने बताया कि रेवॉल्यूशनरी गार्ड्स ने अमेरिकी बेसों पर हमले के लिए फतेह-313 मिसाइलें इस्तेमाल कीं। यह जमीन से जमीन पर मार करने वाली मिसाइलें हैं। इनकी रेंज 300 किमी. तक है।

ईरान के विदेश मंत्री ने कहा- आत्मरक्षा में हमला किया
ईरान के विदेश मंत्री जावेद जरीफ ने हमलों के बाद ट्वीट में कहा, “ईरान ने आत्मरक्षा के लिए संयुक्त राष्ट्र चार्टर के आर्टिकल 51 के तहत कदम उठाए। हमने उन बेसों को निशाना बनाया, जिनका इस्तेमाल हमारे नागरिकों और वरिष्ठ अफसरों को निशाना बनाने के लिए किया गया। हम युद्ध नहीं बढ़ाना चाहते, लेकिन किसी भी आक्रमण के खिलाफ अपनी रक्षा करेंगे।

क्या ट्रम्प दे सकते हैं ईरान के खिलाफ युद्ध का आदेश? 
ईरान के हमले के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के नेतृत्व में सिक्योरिटी एजेंसियों की बैठक बुलाई। अमेरिकी संविधान के अनुसार किसी भी तरह के सीधे सैन्य कार्रवाई की ताकत राष्ट्रपति और कांग्रेस (संसद) के बीच बंटी है। जहां संसद किसी भी देश के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर सकती है, वहीं राष्ट्रपति देश की सुरक्षा के लिए सेना के इस्तेमाल का आदेश दे सकता है।

अमेरिका ने ईरान-इराक के ऊपर नागरिक उड्डयन सेवाएं बंद कीं
अमेरिका की फेडरल एविएशन कमीशन ने ईरान, इराक और ओमान की खाड़ी की तरफ जाने वाले यात्री विमानों के लिए नोटाम (नोटिस टू एयरमैन) जारी किए हैं। इसके मुताबिक, अमेरिका ने पश्चिमी एशिया पर करीब से नजर बनाई है। न्यूज एजेंसी एएफपी के मुताबिक, इसके बाद इराक के आसमान पर मिलिट्री जेट्स की हलचल देखी गई।

भारत ने इराक जाने वालों के लिए ट्रैवल वॉर्निंग जारी की
भारत ने इराक जाने वाले नागरिकों के लिए ट्रैवल वॉर्निंग जारी की है। इसमें कहा गया है कि अगर जरूरी न हो तो भारतीय इराक न जाएं। विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इराक में रहने वाले भारतीय सतर्क रहें। वे इराक में भी सफर करने से बचें। बगदाद स्थित दूतावास और इरबिल स्थित वाणिज्य दूतावास उनकी मदद के लिए सेवा में रहेंगे।

भास्कर एक्सपर्ट: विवेक काटजू, पूर्व आईएफएस
‘‘अमेरिका ने जनरल सुलेमानी को मारा। सुलेमानी को ईरान हीरो मानता था। सवाल यह उठता है कि ईरान को हमले को लेकर कुछ न कुछ तो करना था। देखने वाली बात यह है कि क्या इस वक्त ईरान अमेरिका का कोई भी प्रहार झेल पाने की स्थिति में है। ईरान ने इराक में अमेरिकी ठिकानों पर जो मिसाइलें दागीं, उनका असर क्या हुआ? ईरान दावा करता है कि उन्होंने 80 लोग मारे। इस पर अमेरिकियों ने तो कुछ कहा नहीं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ट्वीट से भी ऐसा ही लगता है कि कुछ नहीं हुआ। एक जानकारी यह भी आ रही है कि ईरान ने उन बेसों को निशाना नहीं बनाया, जहां अमेरिकी रहते थे। अगर अमेरिका को कोई क्षति नहीं पहुंची तो कह सकते हैं कि ईरान ने अपना काम कर दिया और अब आगे कुछ नहीं होगा। अमेरिका भी अपनी जीत की घोषणा कर देगा। दुनिया का भी मामले को खत्म करने पर जोर है। फिलहाल तो भारत मसले से अप्रभावित है।’’

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