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अमेरिका-तालिबान समझौते का भारत पर होगा सीधा असर, अफगानिस्तान से लगातार संपर्क में केंद्र

Last updated: February 29, 2020 7:18 am
Surabhi Saloni
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3 Min Read
File Photo
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नई दिल्ली:अमेरिका और तालिबान के बीच होने वाले शांति समझौते का सीधा असर भारत पर पड़ेगा। समझौते के बाद तालिबानी आतंकियों के पाकिस्तान की सीमा के जरिये भारत में घुसपैठ करने की आशंका कई एजेंसियों जता चुकी हैं। इसके अलावा विकास से जुड़ी कई परियोजनाएं अफगानिस्तान में चल रहीं हैं, उसपर पड़ने वाले असर को लेकर भी भारत चिंतित है। काबुल में विदेश मंत्री एस जयशंकर और अफगानिस्तान के विदेश मंत्री की समझौते पर दस्तखत से ठीक पहले मुलाकात हुई है।

सूत्रों के मुताबिक भारत ने स्पष्ट किया है कि वह अफगान के हित में अफगान नेतृत्व वाली शांति की पहल का पक्षधर हैं। लेकिन इसमें अफगानिस्तान नेतृत्व की इच्छाओं का सम्मान और क्षेत्रीय सुरक्षा का पूरा ख्याल होना चाहिए। भारत समझौते को अपने हितों के अनुरूप ही तवज्जो देगा। भारत का मानना है कि तालिबान से कोई भी समझौता अधूरा नहीं होना चाहिए। इसमें शांति की शर्त का अक्षरश: पालन हो। भारत को अपने विकास कार्यक्रमों और अफगानिस्तान में अपनी भूमिका को लेकर भी चिंताएं हैं।

पाकिस्तान के करीब रहा है तालिबान
भारत को इस बात की आशंका है कि अगर समझौते के बाद तालिबान की सरकार वहां बनती है, तो इससे भारत का हित प्रभावित हो सकता है। तालिबान की पूरी कोशिश है कि वह समझौते के बाद सत्ता में आए। पाकिस्तान भी चाहता है कि वहां तालिबान की सरकार बने। तालिन की पाकिस्तान से काफी नजदीकी रही है।

तालिबान को भारत ने मान्यता नहीं दी
भारत तालिबान से होने वाली शांति वार्ता का कभी हिस्सा नहीं बना। पिछले दिनों हुई वार्ता में एक बार भारत ने अनाधिकारिक तौर पर अपने दो प्रतिनिधियों को भेजा था, लेकिन भारत आधिकारिक रूप से तालिबान का विरोध करता रहा है। पिछले दिनों जब अमेरिका ने शांति समझौते को लेकर प्रतिबद्धता जताई, तो विदेश मंत्री अमेरिका की ओर से वार्ता में शामिल दूत से मिले थे।

सुरक्षा सलाहकार पी. के. मिश्रा ने कहा, “शांति समझौते के बाद अगर सभी अमेरिकी सैनिकों की वापसी हो जाती है, तो इसका फायदा उठाकर तालिबान अफगानिस्तान में फिर अपना वर्चस्व कायम कर सकता है। इससे क्षेत्रीय सुरक्षा को खतरा होगा, इससे सबसे ज्यादा प्रभावित भारत होगा।”

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